ऑफिस मार्केट में बड़ा बदलाव, लीज नहीं अब को-वर्किंग स्पेस पसंद कर रहीं कंपनियां

स्टार्टअप्स, फ्रीलांसर्स, रिमोट एम्प्लॉइज और अलग-अलग जगहों से काम करने वाली टीमें स्थायी ऑफिस स्पेस के बजाय फ्लेक्सिबिलिटी को ज्यादा तवज्जो दे रही हैं.

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फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस और दफ्तर की मांग (Pexels) फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस और दफ्तर की मांग (Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. कंपनियां अब पारंपरिक ऑफिस लीज के बजाय फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस को प्राथमिकता दे रही हैं. ANAROCK की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस से जुड़ी लगभग चार में से तीन (73%) खोजें अब को-वर्किंग स्पेस के लिए हो रही हैं. यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक लीज या मालिकाना हक के बजाय फ्लेक्सिबिलिटी ही कार्यस्थल की नई रणनीति बन रहा है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ऑफिस स्पेस की कुल सर्च में से 73% मांग को-वर्किंग स्पेस के लिए रही, जिसकी सर्च वॉल्यूम पारंपरिक लीजिंग की तुलना में 5 गुना अधिक थी. ये आंकड़े बताते हैं कि भले ही पारंपरिक दफ्तरों की अपनी भूमिका बनी हुई है, लेकिन वे अब कंपनियों की पहली पसंद नहीं रहे.

यह ट्रेंड बदलती जरूरतों के कारण है, कंपनियां अब ऐसे समाधान चुन रही हैं, जो उन्हें तेजी से विस्तार करने, अचल लागत घटाने और लंबे करारों में बंधे बिना हाइब्रिड वर्क मॉडल अपनाने की सुविधा देते हैं.

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कंपनियों को चाहिए फ्लेक्सिबिलिटी

रिपोर्ट की सबसे बड़ी सीख यह है कि कंपनियां अब सिर्फ "ऑफिस स्पेस" नहीं खोज रही हैं, बल्कि अपनी परिचालन जरूरतों के हिसाब से खास वर्कस्पेस सॉल्यूशंस तलाश रही हैं. मीटिंग रूम्स सर्च में 2022 से 187% की बढ़ोतरी हुई है. वर्चुअल ऑफिस में 99% का उछाल आया है. डे पास में 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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यह 'पे-एज-यू-यूज' (जितना इस्तेमाल करें उतना भुगतान करें) वर्कस्पेस की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है. रिपोर्ट के अनुसार, को-वर्किंग सर्च की लगभग 90% मांग मीटिंग रूम्स, वर्चुअल ऑफिस और डे पास इन तीन श्रेणियों से आती है. 

सस्टेनेबिलिटी बनी प्रमुख वजह

ऑफिस का चयन करते समय सस्टेनेबिलिटी अब एक महत्वपूर्ण कारक बन गई है, सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले 10 में से 7 ऑफिस पार्क ग्रीन-सर्टिफाइड हैं, जिनकी कुल ऑफिस सर्च डिमांड में 66.3% हिस्सेदारी है. ग्रीन-सर्टिफाइड ऑफिस पार्कों की वार्षिक सर्च 1,22,500 तक पहुंच गई है.

यह दिखाता है कि पर्यावरण के अनुकूल होना अब एक खास पसंद के बजाय प्राथमिक जरूरत बन चुका है. डेवलपर्स और मकान मालिकों के लिए ग्रीन सर्टिफिकेशन अब केवल एक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट किरायेदारों की बुनियादी उम्मीद बन गया है.

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'मैनेज्ड ऑफिस' का विरोधाभास

दिलचस्प बात यह है कि कंपनियां जो सेवा चाहती हैं और जो शब्द वे सर्च करती हैं, उनमें थोड़ा अंतर है, वैसेतो मैनेज्ड ऑफिस (Managed Office) की मांग 2022 से 137% बढ़ी है, लेकिन "मैनेज्ड ऑफिस" शब्द सर्च में उतना लोकप्रिय नहीं है, इसकी सर्च वॉल्यूम 'को-वर्किंग' की तुलना में 20 गुना कम है, इससे पता चलता है कि ग्राहक प्रोडक्ट को समझते तो हैं, लेकिन सर्च करने के लिए 'को-वर्किंग' या 'फर्निश्ड ऑफिस' जैसे आम शब्दों का ही उपयोग करते हैं. वर्कस्पेस ऑपरेटर्स के लिए यह एक ब्रांडिंग चुनौती और ग्राहकों को शिक्षित करने का अवसर दोनों है.

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भारतीय फ्लेक्स-ऑफिस मार्केट की वैश्विक पहचान

भारत के फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस बाजार की ओर अब अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी आकर्षित हो रहा है. ऑफिस स्पेस की लगभग 3% सर्च अब भारत के बाहर से आ रही है, जिनमें अमेरिका (US), ब्रिटेन (UK), यूएई (UAE), कनाडा और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां, विदेशी निवेशक, एनआरआई (NRIs) और भारत में व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे लोग यहां परिचालन शुरू करने से पहले ही फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस विकल्पों पर शोध कर रहे हैं. भारत का फ्लेक्स-ऑफिस अवसर अब केवल घरेलू नहीं रहा, बल्कि वैश्विक कॉर्पोरेट विस्तार रणनीति का हिस्सा बन चुका है. 

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