चीन में नहीं बिक रहे घर, लाखों मकान अधूरे; 40% तक और गिर सकते हैं प्रॉपर्टी के रेट

सवाल यह है कि क्या चीन प्रॉपर्टी बाजार की इस लंबी गिरावट के बीच घरेलू मांग को फिर से मजबूत कर पाएगा, या दुनिया को आने वाले वर्षों में एक और बड़े निर्यात दबाव का सामना करना पड़ेगा.

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प्रॉपर्टी संकट ने बदली चीन की अर्थव्यवस्था की दिशा (Photo-Pixabay) प्रॉपर्टी संकट ने बदली चीन की अर्थव्यवस्था की दिशा (Photo-Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:24 AM IST

कभी चीन की तेज आर्थिक तरक्की का सबसे बड़ा इंजन रहा प्रॉपर्टी बाजार अब उसकी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है. जिस रियल एस्टेट सेक्टर ने दशकों तक संपत्ति, रोजगार और घरेलू मांग को गति दी, वही अब लगातार छठे साल गिरावट से जूझ रहा है. इसका असर सिर्फ चीन के लाखों परिवारों की संपत्ति पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक विकास रणनीति और वैश्विक व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है.

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चीन के प्रॉपर्टी बाजार के उत्थान और पतन का चेहरा बन चुके पूर्व अरबपति हुई का यान चाइना एवरग्रांडे के संस्थापक और कभी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति रहे उनको पिछले सप्ताह एक चीनी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई. उन्हें फंड के दुरुपयोग और रिश्वतखोरी समेत कई अपराधों में दोषी ठहराया गया, उनकी सजा ने चीन के संकटग्रस्त रियल एस्टेट सेक्टर की गहराई को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया.

लेकिन एवरग्रांडे का संकट सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है, वित्तीय नियामकों द्वारा अत्यधिक कर्ज में डूबे डेवलपर्स पर शिकंजा कसने के करीब छह साल बाद भी प्रॉपर्टी बाजार में स्थिरता नहीं लौट पाई है. देशभर में लाखों अधूरे मकान पड़े हैं. जमीन की बिक्री लगातार कमजोर हो रही है और नए घरों की बिक्री और निर्माण गतिविधियों में गिरावट जारी है. बीजिंग और शंघाई जैसे बड़े शहरों में भी नए घरों की कीमतों में सुधार की रफ्तार थम गई है.

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छोटे शहरों की हालत और गंभीर

छोटे और कम विकसित शहरों में स्थिति और गंभीर है. कई शहरों में सेकेंड-हैंड घरों की कीमतें 2020 के स्तर से लगभग एक-चौथाई तक नीचे आ चुकी हैं, इससे परिवारों की संपत्ति का मूल्य घटा है और लोगों के खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ा है. नतीजा यह है कि जिस प्रॉपर्टी बाजार को कभी चीन की घरेलू खपत का प्रमुख आधार माना जाता था, वह अब आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल रहा है.

जून में समाप्त हुई तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 4.3% की दर से बढ़ी, जो करीब तीन वर्षों में सबसे धीमी वृद्धि रही. ऐसे में प्रॉपर्टी संकट सिर्फ रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर उपभोक्ता खर्च, स्थानीय सरकारों के राजस्व, निवेश और रोजगार तक पहुंच रहा है.

40% तक और गिर सकती हैं कीमतें

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चीन के प्रॉपर्टी बाजार में कीमतों में अभी और बड़ी गिरावट की गुंजाइश है. एक अनुमान के मुताबिक, प्रॉपर्टी की कीमतों में करीब 40% तक की अतिरिक्त गिरावट संभव है. अगर ऐसा होता है तो चीन के उन परिवारों पर और दबाव पड़ेगा जिनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा घरों में लगा हुआ है.

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इस संकट का एक बड़ा असर चीन की विकास रणनीति में बदलाव के रूप में भी दिखाई दे रहा है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सरकार प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट से पूंजी को रणनीतिक विनिर्माण, हाई-टेक उद्योगों, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, सौर ऊर्जा और अन्य उभरते क्षेत्रों की ओर मोड़ने पर जोर दे रही है.

लेकिन इस बदलाव की अपनी कीमत है, घरेलू मांग कमजोर होने के बीच चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से निर्यात पर निर्भर होती जा रही है. 2019 के बाद से चीन के व्यापार अधिशेष में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है. चीन के बढ़ते निर्यात ने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव को और बढ़ाया है.

यहीं से दुनिया के सामने एक नई चुनौती उभर रही है ‘China Shock 2.0’. आशंका है कि चीन की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और बढ़ते निर्यात से ग्लोबल साउथ समेत कई व्यापारिक साझेदार देशों के स्थानीय उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है.

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इस तरह चीन का प्रॉपर्टी संकट अब केवल मकानों, डेवलपर्स या बैंकों की समस्या नहीं रह गया है. यह चीन के आर्थिक मॉडल में बदलाव की कहानी बन चुका है. एक ऐसा बदलाव जिसमें कभी घरेलू मांग और रियल एस्टेट पर टिकी विकास व्यवस्था अब रणनीतिक विनिर्माण और निर्यात की ओर मुड़ रही है. 

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