'सैलरी 2006 की, किराया 2046 का!' बेंगलुरु में महंगे रेंट पर छिड़ी बहस

बेंगलुरु में नौकरीपेशा लोगों के लिए बढ़ता मकान किराया अब केवल एक सामान्य घरेलू खर्च नहीं रहा, बल्कि उनके पूरे मासिक बजट पर भारी पड़ता जा रहा है. लगातार बढ़ते किराये, मकान में मिलने वाली सुविधाओं, सैलरी स्ट्रक्चर और शहर की बढ़ती जीवन-लागत को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच एक लंबी बहस छिड़ गई है.

Advertisement
बेंगलुरु में 1BHK का ₹24 हजार किराया और ₹1.5 लाख Deposit (Photo-ITG) बेंगलुरु में 1BHK का ₹24 हजार किराया और ₹1.5 लाख Deposit (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:48 PM IST

बेंगलुरु में रहने और काम करने वाले लोगों के लिए बढ़ता किराया हर महीने का खर्च चलाना मुश्किल बना रहा है. Reddit पर एक यूजर ने शहर में लोगों की आय और मकान मालिकों की ओर से मांगे जा रहे किराये के बीच बढ़ते अंतर को उजागर किया है. 

“सैलरी 2006 में अटकी हुई है, लेकिन बेंगलुरु का किराया 2046 में पहुंच गया है, क्या आप भी इस अजीब स्थिति में फंस गए हैं?” एक Reddit पोस्ट में एक शख्स ने कुछ इसी अंदाज में बेंगलुरु के बढ़ते किराये पर सवाल उठाया. उसने New Thippasandra और इंदिरानगर जैसे इलाकों का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस रफ्तार से कॉरपोरेट कर्मचारियों की सैलरी बढ़ रही है, उससे कहीं तेज रफ्तार से यहां के किराये बढ़ते जा रहे हैं, यूजर ने अपनी पहचान जाहिर नहीं की है.

Advertisement

Reddit यूजर ने लिखा, “हमने हाल ही में अपने मासिक खर्चों का हिसाब लगाया और एक मजेदार आर्थिक गड़बड़ी सामने आई, निजी क्षेत्र हमें ऐसी सैलरी देता है, जो 20 साल पहले के दौर में अटकी हुई लगती है, यह शुरुआती आईटी हब के दिनों की याद दिलाती है, वहीं, स्वतंत्र मकान मालिक कैलकुलेटर लेकर ऐसे किराये मांग रहे हैं, जो सीधे 20 साल भविष्य में पहुंच चुके हैं.”

यह भी पढ़ें: घर बिक रहे कम, लॉन्च ज्यादा! 2026 में रियल एस्टेट मार्केट का क्या है हाल

सैलरी बढ़ी नहीं, किराया आसमान छूने लगा

यूजर ने 1BHK के लिए 22,000 से 24,000 रुपये महीने के किराये और 1.5 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट का उदाहरण दिया. बताया गया कि फ्लैट 15 साल से ज्यादा पुराना है और दूसरी मंजिल पर स्थित है, जहां जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा नहीं है. सीमित समय के लिए मिलने वाली नगर निगम की पानी की सप्लाई को भी एक बड़ी समस्या बताया.

Advertisement

यूजर ने इसे “अविश्वसनीय आर्थिक टाइम मशीन” बताते हुए कहा कि कंपनियां कर्मचारियों को “अतीत के हिसाब से” सैलरी देती हैं, मकान मालिक “भविष्य के हिसाब से” किराया वसूलते हैं, जबकि नगर निगम का बुनियादी ढांचा अब भी “90 के दशक के पुराने सॉफ्टवेयर” पर चल रहा है. इस पोस्ट के बाद किराये के बदले मिलने वाली सुविधाओं और छोटे किराये के घरों की परिभाषा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई. एक यूजर ने सवाल उठाया कि मकान मालिक और ब्रोकर छोटे किराये के घरों को किस तरह 1BHK या 1RK बताते हैं.

एक यूजर ने कहा कि यहां मकान मालिक और ब्रोकर 1BHK और 1RK की परिभाषा ही अलग रखते हैं. छोटे से ग्रेनाइट स्लैब को भी एक कोने में रखकर उसे किचन बता दिया जाता है, इसके अलावा पेंटिंग आदि के नाम पर एक महीने का किराया भी लिया जाता है, लेकिन किराये पर लेते समय आज तक किसी को नया पेंट किया हुआ फ्लैट नहीं मिला.

क्या किराए पर कंट्रोल की है जरूरत

एक अन्य यूजर ने भी बेंगलुरु में किराये पर कंट्रोल की जरूरत बताई, उसने कहा कि शहर में किराये की स्थिति को देखते हुए अब इसकी निगरानी जरूरी हो गई है, अगर लोग और कंपनियां बेंगलुरु से बाहर जाना शुरू कर देंगी, तब इसके असर को समझा जाएगा. चर्चा में बेंगलुरु में सैलरी और बढ़ती जीवन-यापन लागत का मुद्दा भी उठा. एक यूजर ने सुझाव दिया कि बेंगलुरु स्थित कंपनियों में नौकरी के लिए सैलरी पर बातचीत करते समय शहर में रहने की अधिक लागत को भी ध्यान में रखना चाहिए.

Advertisement

उसने कहा कि बेंगलुरु में काम करने के लिए कर्मचारियों को कम से कम 20% अतिरिक्त सैलरी की मांग करनी चाहिए, अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है तो कर्मचारी टियर-2 शहर से काम करने का विकल्प रख सकते हैं. यूजर ने दावा किया कि कुछ बड़ी कंपनियों ने नागपुर, भुवनेश्वर और कोयंबटूर जैसे शहरों में इसी वजह से ऑफिस शुरू किए हैं.

एक अन्य यूजर ने कर्मचारियों को ज्यादा किराये या होम लोन की EMI के बोझ को लेकर सावधान किया, उसने कहा कि मकान मालिक और रियल एस्टेट ब्रोकर कर्मचारियों को आय का एक ऐसा स्रोत मानते हैं, जो कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन नौकरी जाने की स्थिति में भारी किराया या EMI आर्थिक संकट पैदा कर सकती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »