अमेरिका में कुछ ऐसा हो रहा है, जो न सिर्फ भारत, बल्कि चीन के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है. दरअसल, अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को रूस प्रतिबंध विधेयक पारित किया और ये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ (100% Trump Tariff) लगाने का अधिकार देगा, जो रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं. ये भारत और चीन जैसे देशों की टेंशन बढ़ाने वाला है, क्योंकि रूसी तेल के सबसे बड़ी खरीदारों में India-China टॉप पर हैं. Kpler ने इसे भारतीय तेल सप्लाई के लिए जोखिम भरा बताया है.
केप्लर ने बताया बड़ा जोखिम
पीटीआई की रिपोर्ट में तेल के जहाजों की आवाजाही, उनकी स्थिति और कच्चे तेल के प्रवाह पर नजर रखने वाली ग्लोबल डेटा और शिप-ट्रैकिंग एजेंसी Kpler के हवाले से कहा है कि अमेरिका का ये कदम भारत की तेल सप्लाई में व्यवधान का जोखिम बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. एजेंसी के एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने हालांकि, यह भी कहा है कि इससे भारत और चीन को होने वाले कच्चे तेल के प्रवाह में तुरंत बदलाव की संभावना कम है.
अमेरिका क्या लाया है ये विधेयक?
रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए अमेरिकी सीनेट में हुए मतदान से रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान का जोखिम बढ़ गया है. लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एक्ट ऑफ 2026 रूसी एनर्जी के 5 सबसे बड़े खरीदारों को टारगेट करता है. इनमें भारत-चीन शामिल हैं. इसका उद्देश्य तेल-गैस की बिक्री से रूस को होने वाली इनकम पर शिकंजा कसना है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, पारित होने के बाद अब विधेयक को अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलना बाकी है, तो वहीं अन्य विधायी व प्रशासनिक चरणों से गुजरते हुए ही ये लागू होगा.
केप्लर एनालिस्ट रितोलिया की मानें, तो इसके लागू होने के बाद इसका असर काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इन्हें कितनी आक्रामक तरीके से लागू करता है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के बैन की टाइमिंग बड़ा रोल निभाएगी, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल के मार्केट में पहले से ही कमी बनी हुई है. वेस्ट एशिया से सप्लाई को को लेकर अनिश्चितता ने तमाम देशो के लिए वैकल्पिक स्रोतों के महत्व को बढ़ाने का काम किया है.
भारत के लिए सबसे बड़ा ये जोखिम
रितोलिया का कहना है कि रूसी कच्चा तेल (Russian Crude Oil) भारतीय रिफाइनरियों के लिए जरूरी सप्लाई हेज बन चुका है, क्योंकि इससे मिडिल ईस्ट के तेल सप्लाई रूट्स में आने वाली बाधाओं के चलते उपजा जोखिम कम करने में मदद मिली है. ऐसे में अमेरिका की ओर से रूसी तेल को लेकर लिया गया कोई भी फैसला भारत के लिए कम समय में रूसी तेल खरीद को बदलने के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है.
ट्रंप को 100% टैरिफ लगाने का अधिकार
अमेरिका का रूस प्रतिबंध विधेयक न सिर्फ तेल सप्लाई पर असर डालने वाला साबित होगा, बल्कि इसमें Donald Trump को उन रूसी तेल के खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा, जो बड़ी मात्रा में रूसी तेल (Russian Oil) और गैस (Russian Gas) खरीदना जारी रखे हुए हैं.
बीते दिनों आई रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव पर कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने चिंता जताई है. उन्होंने तर्क दिया है कि यह उपाय राष्ट्रपति को व्यापक नई टैरिफ शक्तियां देते हैं, जो अमेरिकी सहयोगियों को भी प्रभावित कर सकती हैं और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा सकती हैं.
भारत-China के लिए क्यों चिंता?
ये अमेरिकी विधेयक इसलिए भारत के लिए बड़ी चिंता है, क्योंकि साल 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) शुरू हुआ था, जो रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारत ने तेज बढ़ोतरी की थी. बता दें कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा है. क्योंकि रूसी तेल ने भारतीय रिफाइनरियों को रियायती कीमत पर कच्चा तेल दिया और इससे देश में ईंधन की आपूर्ति में सुचारू रखने में मदद मिली.
रिपोर्ट्स की मानें, तो रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है, जो करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल की खरीदारी करता है. वहीं भारतीय आयात करीब 17 लाख बैरल डेली का है. यही वजह है कि India-China अमेरिका के इस कदम से सबसे प्रभावित होने वाले देशों में हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क