ये चीजें होने वाली हैं महंगी! ईरान युद्ध का असर... घर से अस्पताल तक इस्तेमाल

US-Iran War से तेल और गैस संकट गहराया हुआ है, लेकिन अब इसका असर रोजमर्रा के सामानों से लेकर हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स पर भी पड़ता नजर आ रहा है. प्लास्टिक की कीमतों में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी से महंगाई का खतरा बढ़ गया है.

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देश में प्लास्टिक के दाम में लगातार इजाफे से महंगाई का खतरा. (Photo: Getty Image) देश में प्लास्टिक के दाम में लगातार इजाफे से महंगाई का खतरा. (Photo: Getty Image)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:17 AM IST

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध और इससे बढ़ी ग्लोबल टेंशन के चलते तेल-गैस संकट से दुनिया जूझ रही है, लेकिन असर सिर्फ इन तक सीमित नहीं है, बल्कि कई और चीजों पर भी देखने को मिलने वाला है. जी हां, आने वाले दिनों में कई ऐसी चीजें महंगी हो सकती हैं, जिनका हर घर में इस्तेमाल होता है. दरअसल, मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते सप्लाई चेन पर पड़े असर की वजह से पॉलिमर की कीमतों में एक बार फिर से तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. भारत में IOCL ने बीते 25 मार्च को प्लास्टिक प्राइस में इजाफा किया है, ये कदम रोजमर्रा के कई उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकता है.   

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पॉलिमर की कीमतों में बढ़ोतरी से खासतौर पर पैकेज्ड खाद्य पदार्थ और बोतलबंद पानी, जूस या अन्य सामानों के दाम बढ़ सकते हैं, जबकि घरेलू यूज के प्लास्टिक के सामान खरीदने के लिए भी अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. 

ईरान युद्ध से सप्लाई चेन में रुकावट का असर
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने होमोपॉलिमर पॉलीप्रोपाइलीन (PPH) की कीमत में करीब 4,000 रुपये प्रति टन, तो वहीं कोपॉलिमर की कीमत में 7,000 प्रति टन की बढ़ोतरी की है. इसके अलावा पॉलीइथिलीन (PE) का दाम भी इतना ही यानी करीब सात हजार रुपये प्रति टन बढ़ाया गया है. इस महीने कई बार इनकी कीमतों में तेजी देखने को मिली है. 1 मार्च, 3 मार्च और 11 मार्च को दाम बढ़ाए जा चुके हैं. पीवीसी की कीमतों में भी इस महीने लगभग 13,000 रुपये प्रति टन की वृद्धि हुई.

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कुल मिलाकर, प्लास्टिक की इनपुट लागत में हाल के हफ्तों में भारी वृद्धि हुई है. ये इजाफा कच्चे माल की बढ़ती लागत और मिडिल ईस्ट में टेंशन से जुड़ा हुआ है. इससे पेट्रोकेमिकल सप्लाई और लॉजिस्टिक्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. प्लास्टिक उद्योग के जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसका असर अब घरेलू पॉलिमर की कीमतों पर भी पड़ रहा है.

ऐसे दिखेगा महंगाई का असर 
PPH से PE तक का इस्तेमाल व्यापक रूप से पैकेजिंग, कंटेनर, बाल्टी, बोतल और रोजमर्रा के उपयोग की कई वस्तुओं में होता है. जानकारों का कहना है कि कंपनियां भले ही रिटेल प्राइस में तत्काल बढ़ोतरी करने से बचें, लेकिन इनपुट कॉस्ट में इजाफा आमतौर पर समय के साथ ग्राहकों पर बोझ बढ़ाता है. इन चीजों की कीमतों में या तो बढ़ोतरी की जा सकती है, या फिर इनकी पैकेजिंग का आकार छोटा किया जा सकता है. भारत के लिए ये बात इसलिए भी खास है, क्योंकि रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं की कम लागत वाली पैकेजिंग में प्लास्टिक का व्यापक रूप से यूज किया जाता है. 

दवाइयों पर भी पड़ेगी महंगाई की मार!
न सिर्फ पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और प्लास्टिक बोतलों में बेचे जाने वाले पेय पदार्थों पर महंगाई का खतरा है, बल्कि दवाइयों समेत हेल्थ सेक्टर में यूज होने वाली तमाम चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, क्योंकि पॉलिमर का उपयोग सिरिंज, आईवी बोतल, डायग्नोस्टिक किट और दवाइयों की पैकेजिंग में किया जाता है.

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एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) के राजीव नाथ का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) बंद होने से हेल्थ सेक्टर के लिए जरूरी सामग्रियों में से एक प्लास्टिक की लागत में 50-60% और पैकेजिंग व बिजली की लागत में 20% से अधिक का इजाफा हुआ है, जिससे सिरिंज और दस्ताने जैसी वस्तुओं पर मुनाफा कम हुआ है. उन्होंने कहा कि अप्रैल में कीमतों में संशोधन देखने को मिल सकता है. 

वाडी सर्जिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के को-फाउंडर के अनिंदिथ रेड्डी ने कहा कि विशेष रूप से नाइट्राइल दस्ताने की मैन्युफैक्चरिंग ईरान युद्ध के कारण नाइट्राइल ब्यूटाडीन रबर लेटेक्स (NBR) जैसे कच्चे माल कमी और उच्च लागत से चुनौतीपूर्ण हो गई है. इससे अस्पतालों में दस्तानों की कीमतें बढ़ रही हैं और इनकी कमी भी हो रही है. 

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