कॉफी खरीदने से लेकर दोस्तों को पैसे भेजने और बिल चुकाने तक, UPI ने डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है. अब UPI की अगली चुनौती सिर्फ पेमेंट की रफ्तार बढ़ाना नहीं, बल्कि इसे ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल पेमेंट का अगला ग्रोथ फेज स्मार्ट फ्रॉड डिटेक्शन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऐसी सुरक्षा तकनीकों पर निर्भर करेगा, जो यूजर के अनुभव में ज्यादा रुकावट पैदा किए बिना बैकग्राउंड में काम करें.
UPI की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्पीड और सरलता रही है. लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है, यूजर्स के लिए यह जानना भी उतना ही जरूरी हो गया है कि सामने वाला व्यक्ति या बिजनेस वास्तविक है या नहीं.
डिजियो (Digio) के को-फाउंडर और सीईओ अभिनव पराशर के मुताबिक, आज पेमेंट की रफ्तार अब अलग पहचान नहीं रही, बल्कि भरोसा सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर बन गया है.
उनके मुताबिक, पेमेंट फ्रॉड का एक बड़ा हिस्सा अब सोशल इंजीनियरिंग के जरिए हो रहा है. इसमें यूजर को किसी तरह प्रभावित या गुमराह करके उससे खुद ट्रांजैक्शन अप्रूव करा लिया जाता है. ऐसे में चुनौती सिर्फ पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित रखने की नहीं, बल्कि यूजर की पहचान और उसके भरोसे को मजबूत करने की भी है.
ज्यादा चेक नहीं, स्मार्ट सिक्योरिटी
फ्रॉड रोकने के लिए आमतौर पर ज्यादा ऑथेंटिकेशन और अतिरिक्त जांच को समाधान माना जाता है. लेकिन बहुत ज्यादा वेरिफिकेशन पेमेंट प्रोसेस को जटिल बना सकते हैं और सामान्य यूजर्स को परेशानी हो सकती है. अभिनव पराशर के मुताबिक, फ्रॉड रोकने का तरीका अतिरिक्त रुकावटें खड़ी करने के बजाय स्मार्ट इंटेलिजेंस में है.
इसके लिए बिहेवियरल बायोमेट्रिक्स, डिवाइस इंटेलिजेंस, AI बेस्ड फ्रॉड एनालिटिक्स और लाइवनेस डिटेक्शन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ सकता है. ये सिस्टम यूजर के सामान्य व्यवहार, डिवाइस की जानकारी और ट्रांजैक्शन पैटर्न का विश्लेषण कर सकते हैं. इसके जरिए असामान्य गतिविधि, संदिग्ध डिवाइस या फोटो, वीडियो और डीपफेक जैसी चीजों को पहचानने में मदद मिल सकती है.
बायोमेट्रिक से सुरक्षित होगा पेमेंट
Pulse के सीईओ चिराग शाह के मुताबिक, UPI के अगले फेज में ऐसी तकनीक महत्वपूर्ण होगी, जो सुरक्षा बढ़ाए लेकिन यूजर को अतिरिक्त मेहनत न करनी पड़े. ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन इसका एक उदाहरण हो सकता है. इसमें फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के जरिए पेमेंट को ऑथराइज किया जा सकता है. इससे पेमेंट का अनुभव मौजूदा सिस्टम जितना ही आसान रह सकता है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ सकती है.
पैसा जाने से पहले मिलेगा अलर्ट
Zaggle के फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरमैन डॉ. राज पी. नारायणम का जोर ऐसे सिस्टम पर है, जो संदिग्ध ट्रांजैक्शन को पेमेंट पूरा होने से पहले पहचान सके. उनके मुताबिक, AI और बिहेवियरल इंटेलिजेंस को मिलाकर रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन, बिहेवियरल एनालिटिक्स, डिवाइस बाइंडिंग, ट्रांजैक्शन रिस्क स्कोरिंग और कॉन्टेक्स्चुअल ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ सकता है. इसके साथ ही प्रोएक्टिव स्कैम वार्निंग, मजबूत आइडेंटिटी वेरिफिकेशन और कंज्यूमर एजुकेशन भी जरूरी होंगे. खासकर इसलिए क्योंकि UPI से जुड़े कई फ्रॉड पेमेंट सिस्टम की तकनीकी कमजोरी के बजाय सोशल इंजीनियरिंग से होते हैं.
UPI यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?
अगर आप UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो भविष्य में सुरक्षा बढ़ने का मतलब हर पेमेंट पर अतिरिक्त स्टेप जोड़ना जरूरी नहीं होगा. सिस्टम बैकग्राउंड में डिवाइस, यूजर बिहेवियर और ट्रांजैक्शन के रिस्क का आकलन कर सकता है. अगर कोई ट्रांजैक्शन संदिग्ध पाया जाता है, तो जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त सुरक्षा या अलर्ट सामने आ सकता है. यानी सामान्य पेमेंट का अनुभव आसान बना रह सकता है, जबकि जोखिम वाले ट्रांजैक्शन पर सिस्टम ज्यादा सतर्क हो सकता है.
डॉ. राज पी. नारायणम के मुताबिक, UPI की कामयाबी में सुविधा हमेशा महत्वपूर्ण रहेगी, लेकिन आने वाले समय में सुरक्षा और कंज्यूमर प्रोटेक्शन इसकी बड़ी पहचान बन सकते हैं. चिराग शाह भी मानते हैं कि UPI का अगला ग्रोथ फेज सुविधा को बरकरार रखते हुए डिजिटल पेमेंट पर यूजर का भरोसा बढ़ाने पर निर्भर करेगा.
आजतक बिजनेस डेस्क