तमाम वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था दम भर रही है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी दर्ज की गई. लेकिन उसके बाद कुछ लोगों ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं. खासकर GDP के आंकड़ों और गणना के तरीकों को लेकर पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के बयान चर्चा में हैं.
अब सवाल उठता है कि क्या जीडीपी की गणना सही तरीके से नहीं हो रही है? दूसरे देश किस तरह से जीडीपी को मापते हैं? इसी साल मई में UN के बनाए एक एक्सपर्ट ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में GDP से हटकर तरक्की को मापने के लिए ग्लोबल नियम को लागू करने की सिफारिश की थी.
रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि किसी देश की वास्तविक आर्थिक प्रगति और नागरिकों के जीवन स्तर को मापने के लिए केवल GDP का आंकड़ा पर्याप्त नहीं है. इस रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक वृद्धि और विकास का अधिक सटीक, समावेशी और व्यावहारिक आकलन करने के लिए 31 इंडिकेटर्स वाले डैशबोर्ड को अपनाने की जरूरत है.
केवल GDP क्यों पर्याप्त नहीं?
पारंपरिक रूप से GDP को किसी भी देश की आर्थिक ताकत का मुख्य पैमाना माना जाता है. हालांकि रिपोर्ट में बताया गया है कि जीडीपी केवल देश की सीमाओं के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है. लेकिन जीडीपी यह नहीं बताता कि आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रहा है या केवल शीर्ष वर्ग तक सीमित है.
प्राकृतिक संसाधनों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल और पर्यावरण के नुकसान की कीमत जीडीपी गणना में दर्ज नहीं होती है. स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की गुणवत्ता जैसे बुनियादी फैक्ट्स जीडीपी के आंकड़ों में सीधे नहीं झलकते.
फिर 31 इंडिकेटर्स वाला डैशबोर्ड फ्रेमवर्क क्या है?
रिपोर्ट में प्रस्तावित 31 इंडिकेटर्स का डैशबोर्ड अर्थव्यवस्था के सभी पैमानों को टच करता है. इसे मुख्यतौर पर तीन भागों में विभाजित किया जाता है.
1. आर्थिक और वित्तीय स्थिति: इसमें राजकोषीय स्थिति, व्यापार संतुलन, रोजगार के आंकड़े और मुद्रास्फीति जैसे पारंपरिक आर्थिक संकेतक शामिल हैं.
2. सामाजिक विकास और मानव पूंजी: यह स्तंभ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, शिक्षा की गुणवत्ता, लैंगिक समानता (Gender Equality) और सामाजिक सुरक्षा के दायरे का मूल्यांकन करता है.
3. पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability): इसमें कार्बन उत्सर्जन, रिन्यूबल एनर्जी का उपयोग, वायु व जल की गुणवत्ता, और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े पैरामीटर्स को मापा जाता है.
पॉलिसी मैकर्स के लिए क्यों खास?
एकल जीडीपी डेटा पर अत्यधिक निर्भरता कभी-कभी पॉलिसी मैकर्स को गुमराह कर सकती है. 31 इंडिकेटर्स का यह डैशबोर्ड सरकारों को अधिक लक्षित और प्रभावी नीतियां बनाने में मदद करेगा.
- इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि नीतियां केवल आर्थिक आंकड़ों को बढ़ाने के बजाय जन-कल्याण और समावेशी विकास को प्राथमिकता दें.
- जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सतत विकास की रणनीति बनाई जा सकेगी.
आजतक बिजनेस डेस्क