जियो-पॉलिटिकल तनाव में बढ़ोतरी के बीच अर्थव्यवस्था को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा बयान दिया है. वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के लिए अपनी आर्थिक मजबूती को लगातार बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया. भारत के लिए, लचीलेपन का अर्थ है पिछले दशक में रखी गई संरचनात्मक नींव पर निर्माण करते हुए विकास को गति देना और व्यापक बनाना है.
उन्होंने कहा कि आने वाले सालों की असली परीक्षा एक बार फिर यह होगी कि भारत बिना परिवारों और कारोबारों को बाधित किए किन झटकों को झेल पाता है. उन्होंने आगे कहा कि यह रिकॉर्ड किसी भी विकास आंकड़े की तरह ही इकोनॉमिक मैनेजमेंट का एक पैमाना हैं.
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब एक 'स्थायी स्थिति' बन चुकी है, इसलिए वित्त मंत्री ने कहा कि इससे निपटने के लिए नीतियां तैयार की जानी चाहिए. उन्होंने कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2026 में बोलते हुए कहा कि हमें समय के साथ-साथ लचीलापन बढ़ाते रहना होगा, यह एक बार का काम नहीं है.
प्राइवेट सेक्टर की इन्वेशन में बढ़े भागीदारी
हालांकि भारत आने वाले दशकों में एक मजबूत स्थिति से प्रवेश कर रहा है, उन्होंने रणनीतिक संसाधन सुरक्षा सहित कई प्राथमिकताओं का भी जिक्र किया. उन्होंने प्राइवेट सेक्टर से रिसर्च और इन्वेशन समेत इन्वेस्टमेंट सर्किल का लीडरशिप करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि भारत का रिसर्च और विकास पर व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 0.83% है, जबकि ओईसीडी देशों का यह 2.7% है. वहीं, निजी क्षेत्र भारत के कुल रिसर्च और विकास व्यय में केवल 36% का योगदान देता है. उन्होंने आगे कहा कि निवेश के पैमाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी दोनों को बढ़ाना हमारी इन्वेशन क्षमता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है.
विदेश मंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक खुलापन महत्वपूर्ण बना हुआ है और वैश्विक आर्थिक संबंध भी खुले, पूर्वानुमानित और नियम-आधारित होने चाहिए. विदेश मंत्री ने कहा कि अधिक लचीली ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए देशों को साझेदारी में विविधता लाने, बाजारों को खुला रखने, प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने और वस्तुओं, सेवाओं, ऊर्जा और पूंजी की आवाजाही को यथासंभव स्थिर और पूर्वानुमानित बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता होगी.
उन्होंने बदलते कार्य जगत के लिए लोगों को तैयार करने हेतु कौशल विकास की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने यह भी कहा कि 2014 से सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत और स्थिर बनाने के लिए अलग-अलग उपाय कर रही है. उन्होंने बताया कि वित्तीय सूझबूझ ने हमारी विकास प्रतिबद्धताओं को जारी रखने में मदद की है.
आजतक बिजनेस डेस्क