भारतीय शेयर बाजार में स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है. हर दिन मार्केट में गिरावट देखी जा रही है. पिछले हफ्ते भी स्टॉक मार्केट गिरकर बंद हुआ था और आज भी इसमें भारी दबाव दिखाई दे रहा है. इस गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल दिखाई दे रहा है.
इस बीच, यूबीएस इन्वेस्टमेंट बैंक के मुख्य वैश्विक रणनीतिकार भानु बावेजा ने बड़े खतरे की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि चीन की मांग में भारी उछाल और होर्मुज से तेल सप्लाई में रुकावट के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकती है. अगर ऐसा हुआ तो शेयर बाजारों में एक हैवी फाल देखने को मिलेगा. खासकर भारतीय बाजार में इसका असर ज्यादा दिख सकता है, क्योंकि भारत एनर्जी को लेकर दूसरे देशों पर ही निर्भर है.
बावेजा ने एक तर्क रखते हुए कहा कि शुरुआत में जब होर्मुज बंद हुआ था तो ऐसा माना जा रहा था कि तेल की कीमतें में 200 डॉलर प्रति बैरल तक चली जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और यह ज्यादा देर तक 120 डॉलर तक भी नहीं टिक पाईं. इसका एक महत्वपूर्ण करण चीन था.
फिर मार्केट में आया चीन
इस साल की शुरुआत में चीन तेल नहीं खरीद रहा था, जिसका मतलब था कि रुकावट के बावजूद इन्वेंट्री में गिरावट नहीं आई. अब स्थिति बदल गई है, क्योंकि चीन फिर से बाजार में आ गया है. तेल की कीमतों में गिरावट का इंतजार करते हुए खरीदारी टालने वाली एयरलाइंस और अन्य कंपनियां भी अब खरीदार के तौर पर लौट सकती हैं. जबकि आपूर्ति अभी भी सीमित है, जिसका मतलब है कि तेल की कीमतों का ऊपर जाना तय दिख रहा है.
खतरे में 14 मिलियन बैरल तेल
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, बावेजा ने कहा कि कि होर्मुज से हर दिन करीब 20 मिलियन बैल कच्चा तेल और अन्य उत्पाद गुजरते थे, लेकिन बंद होने के बाद से गुप्त तरीके से जहाजें जा रही हैं और यह केवल एक तिहाई यानी करीब 6 मिलियन बैरल ही गुजर रहा है. ऐसे में देखा जाए तो 14 मिलियन बैरल का तेल अभी भी इस रास्ते से नहीं आ पा रहा है. इस कारण मार्केट में काफी दबाव पड़ सकता है और उन्होंने आगे कहा कि यह रुकावट एक ऐसा रिस्क है, जिसके हर भारतीय और ग्लोबल दोनों बाजारों के निवेशकों को विशेष रूप से सचेत रहने की आवश्यकता है.
दूसरा बदलाव यह है कि बाजार को यह एहसास होने लगा है कि अमेरिकी प्रशासन अकेले इस रुकावट को सॉल्व नहीं कर पाएगा. हालांकि बाजारों पर दबाव पड़ने पर व्हाइट हाउस के लिए टैरिफ या अन्य नीतियों को पलटना आसान हो सकता है.
बाजार स्थिर भी हो सकता है
एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि शेयर बाजार अभी सही चल रहे हैं, लेकिन एक डर बना हुआ है. तेल की कीमतों के उछाल के उलट बाजार में प्रदर्शन अच्छा देखा जा रहा है, जबकि शेयरों और करेंसी में अस्थिरता अपने सबसे निचले स्तर के करीब है.
महंगाई का संकट
तेल की कीमतों में उछाल होने से सिर्फ ईंधन के भाव ही नहीं ज्यादा होंगे, बल्कि नेफ्था और उर्वरक की बढ़ती लागत भी तेजी से बढ़ सकती है और उर्वरक की बढ़ती कीमतें कुछ समय बाद फूड इंफ्लेशन में बदल सकता है. एक्सपर्ट ने कहा कि भारत जैसी इकोनॉमी के लिए तेल का महंगा होना अच्छा नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति रही तो जल्द ही कीमतें ज्यादा हो सकती हैं.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क