भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भी तेजी का सिलसिला जारी रहा. सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ खुले. हालांकि, गुरुवार के मुकाबले यह बढ़त धीमी रही. सेंसेक्स में दिन के पहले कारोबारी घंटे में करीब 400 अंकों की बढ़त रही, वहीं निफ्टी ने 100 से अधिक अंकों की बढ़त दर्ज की. बैंक निफ्टी में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. इससे पहले गुरुवार को बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने एकदिन में करीब चार महीने की सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की थी.
इससे पहले गुरुवार को बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने एकदिन में करीब चार महीने की सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की थी. बैंकिंग, आईटी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया. हालांकि, बाजार की इस तेजी के बीच कुछ जोखिम भी बने हुए हैं. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई की चिंता और मध्य पूर्व में जारी तनाव निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर सकते हैं.
सेंसेक्स 1,534 अंक उछला, निफ्टी चढ़ा
बीएसई सेंसेक्स गुरुवार को 1,533.72 अंक यानी 2.11 फीसदी की बढ़त के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ था. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,548.4 अंक उछलकर 74,330.29 तक पहुंच गया. यह करीब तीन सप्ताह में सेंसेक्स का सबसे ऊंचा बंद स्तर रहा. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 374.65 अंक यानी 1.66 फीसदी चढ़कर 22,997.35 पर बंद हुआ. निफ्टी का यह 25 सितंबर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था. बैंकिंग और आईटी शेयरों में खरीदारी के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी ने भी बाजार को सहारा दिया.
बाजार में तेजी के पीछे क्या रहे कारण?
शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत रहे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई वापसी और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर बनी उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया. अमेरिका में लंबे समय के सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला प्रतिफल यानी ट्रेजरी यील्ड भी सितंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया.
बाजार में चिंता थी कि एआई क्षेत्र की विकास रफ्तार धीमी पड़ सकती है. इसके साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगली बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है. जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटती है, तो निवेशकों के लिए शेयरों जैसे जोखिम वाले निवेश आकर्षक हो सकते हैं. इससे उभरते बाजारों में भी निवेश धारणा को सहारा मिल सकता है.
सेबी के फैसले से ट्रेडर्स को राहत की उम्मीद
बाजार में तेजी के बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के एक फैसले ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा. सेबी ने गुरुवार को कहा कि एक्सपायरी वाले शेयर और सूचकांक डेरिवेटिव सौदों का निपटारा अब नियमित कारोबार के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड औसत भाव के आधार पर किया जाएगा. इससे पहले सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के आधार पर निपटारे का फैसला किया था.
कारोबारियों के विरोध के बाद सेबी ने अपना रुख बदल दिया. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, इस बदलाव से एक्सपायरी के दिन बाजार में अचानक होने वाले तेज उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद मिल सकती है. इससे उन ब्रोकरों को भी राहत मिल सकती है जिनके ऑर्डर पहले की तुलना में कम स्तर पर रह गए थे.
कच्चे तेल की कीमतें अब भी चिंता का कारण
बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है. निवेशक मध्य पूर्व के तनाव और ईरान से जुड़े तेल टैंकरों पर अमेरिकी प्रतिबंधों में संभावित ढील जैसे घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर महंगाई, कंपनियों के मुनाफे और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है. विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई रिकवरी अभी पूरी तरह मजबूत नहीं कही जा सकती. तेल की ऊंची कीमतें और महंगाई का जोखिम निवेशकों को सतर्क रख सकते हैं.
बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के नतीजों, अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व के हालात पर रहेगी. अगर वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहे और कंपनियों के नतीजे उम्मीदों के मुताबिक रहे, तो बाजार को सहारा मिल सकता है. लेकिन कच्चे तेल में तेजी या महंगाई की चिंता बढ़ने पर बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इसलिए हालिया तेजी के बावजूद निवेशकों के लिए बाजार की दिशा पर नजर बनाए रखना अहम होगा.
आजतक बिजनेस डेस्क