शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों को SEBI की सौगात! खुल गए निवेश के कई नए रास्ते

अगर आपका पैसा कोई पोर्टफोलियो मैनेजर संभालता है, तो उसके लिए निवेश के रास्ते अब पहले से ज्यादा खुलने वाले हैं. सेबी ने PMS के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब पोर्टफोलियो मैनेजर IPO, विदेशी शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, ETF और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज समेत कई विकल्पों में निवेश कर सकेंगे.

Advertisement
पोर्टफोलियो मैनेजर अब IPO, विदेशी शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, ETF और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज समेत कई विकल्पों में निवेश कर सकेंगे. (File Photo) पोर्टफोलियो मैनेजर अब IPO, विदेशी शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, ETF और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज समेत कई विकल्पों में निवेश कर सकेंगे. (File Photo)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:50 AM IST

आप किसी पोर्टफोलियो मैनेजर को अपना पैसा इसलिए देते हैं कि वह आपके लिए अलग-अलग जगह निवेश करके बेहतर मौके तलाशे. अब तक उसके पास निवेश के कुछ तय रास्ते थे, लेकिन जल्द ही उसकी पहुंच कई और विकल्पों तक हो सकती है. IPO से लेकर विदेशी शेयरों और डेट सिक्योरिटीज तक, निवेश का दायरा बढ़ने वाला है.

भारतीय शेयर मार्केट की निगरानी करने वाली संस्था सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए नियमों में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है. इसके साथ ही विदेशी निवेश, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT), सेटलमेंट और विज्ञापनों से जुड़े कई नियम भी बदले गए हैं.

Advertisement

PMS के जरिए अब ज्यादा जगह निवेश

सेबी ने 2020 के पुराने नियमों की जगह 2026 के नए पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशन को मंजूरी दी है. इसके बाद पोर्टफोलियो मैनेजर्स यानी PMS के लिए निवेश के रास्ते बढ़ जाएंगे. अब वे विदेशी लिस्टेड शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे. इसके लिए सेबी के तय नियम और सीमाएं लागू रहेंगी. इतना ही नहीं, क्लाइंट की मंजूरी मिलने पर पोर्टफोलियो मैनेजर उसके कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10 फीसदी तक इंवेस्टमेंट-ग्रेड वाले अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज में भी लगा सकेगा.

IPO, प्राइमरी मार्केट का रास्ता भी खुला

सेबी के नए नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए IPO और प्राइमरी मार्केट डेट में निवेश का रास्ता भी आसान हुआ है. यानी PMS के जरिए पैसा संभालने वाले निवेशकों के लिए शेयर बाजार में नए शेयर आने के समय निवेश का विकल्प भी बढ़ेगा.

Advertisement

इसके साथ ही भारतीय म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान स्कीम्स में निवेश की अनुमति भी दी गई है. इसमें ETF, इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड शामिल हैं. इस सुविधा के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपये रखी गई है.

नियमों की मोटी किताब अब हो गई छोटी

सेबी ने निवेश के विकल्प बढ़ाने के साथ नियमों को आसान करने पर भी जोर दिया है. नए PMS नियमों का दस्तावेज 70 पेज से घटकर 33 पेज रह गया है. सेबी के मुताबिक इसमें शब्दों की संख्या भी करीब 42 फीसदी कम हुई है. यानी पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए नियमों को समझना और उनका पालन करना पहले के मुकाबले आसान बनाने की कोशिश की गई है. सेबी ने इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर का नया कॉन्सेप्ट भी मंजूर किया है.

ऐसे फंड मैनेजर रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ मिलकर क्लाइंट का पोर्टफोलियो संभाल सकेंगे. हालांकि उनके काम की जिम्मेदारी और देनदारी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर की ही रहेगी. प्रिंसिपल ऑफिसर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में भी राहत दी गई है. वहीं 100 करोड़ रुपये से कम AUM वाले पोर्टफोलियो मैनेजर्स को डीलिंग रूम की अनिवार्य शर्त से छूट मिलेगी. हालांकि उन्हें ऑडिट ट्रेल और मजबूत इंटरनल कंट्रोल रखना होगा.

विदेशी निवेशकों के लिए भी बदले नियम

Advertisement

सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के लिए भी नया रास्ता खोला है. अब FPI फिजिकली सेटल्ड नॉन-एग्रीकल्चर कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे. ये कैपिटल मार्केट के ऐसे कॉन्ट्रैक्ट (जैसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस) होते हैं, जिनका अंतर्निहित मूल्य (Underlying value) कृषि उत्पादों को छोड़कर अन्य कच्चे माल, धातुओं या ऊर्जा स्रोतों से तय होता है. हालांकि इसके लिए समयसीमा तय की गई है. FPI को टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले और एक्सपायरी से कम से कम तीन दिन पहले अपनी पोजिशन खत्म करनी होगी.

ये लोग भी एक्रेडिटेड इनवेस्टर बन सकेंगे

सेबी ने एक्रेडिटेड इनवेस्टर्स की कैटेगरी का दायरा भी बढ़ाया है. अब सिक्योरिटीज मार्केट में 5 करोड़ रुपये की संपत्ति रखने वाले व्यक्तिगत निवेशक और 20 करोड़ रुपये वाले बॉडी कॉरपोरेट्स भी कुछ मौजूदा आय और नेटवर्थ शर्तों को पूरा करने पर इस कैटेगरी में आ सकेंगे. एक्रेडिटेड इनवेस्टर यानी ऐसे निवेशक जिन्हें कुछ खास निवेश विकल्पों में निवेश के लिए अधिक वित्तीय क्षमता वाला माना जाता है.

सेलिब्रिटी के विज्ञापन नियमों में भी बदलाव

अब अगर किसी वित्तीय कंपनी या मार्केट इंटरमीडियरी के विज्ञापन में कोई सेलिब्रिटी नजर आता है, तो उसके लिए भी नियम तय किए गए हैं. सेबी ने कॉमन एडवरटाइजमेंट कोड को मंजूरी दी है. इसके तहत सेलिब्रिटी किसी ब्रांड या कंपनी का प्रचार कर सकता है, लेकिन किसी खास फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस को सीधे एंडोर्स नहीं कर सकेगा. यानी किसी विज्ञापन में सेलिब्रिटी कंपनी का चेहरा हो सकता है, लेकिन वह यह नहीं कह सकेगा कि निवेशक किसी खास वित्तीय प्रोडक्ट को खरीदें या उसमें पैसा लगाएं.

Advertisement

सेटलमेंट के मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक

शेयर बाजार से जुड़े विवादों और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सेटलमेंट की प्रक्रिया भी बदलेगी. सेबी ने सेटलमेंट अमाउंट निकालने का नया फॉर्मूला मंजूर किया है. 10 लाख रुपये तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट का रास्ता होगा. गलत तरीके से कमाई गई रकम, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली अलग से तय होगी. नए फॉर्मूले का मकसद सेटलमेंट की रकम तय करते समय एक ही नुकसान या रकम की दो बार गणना की समस्या को दूर करना है.

सेबी के आंकड़ों के मुताबिक FY24-25 में सेटलमेंट के 703 आवेदन आए थे. FY25-26 में 439 आवेदन आए और 170 मामलों का निपटारा हुआ. सेबी ने 1 अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच BSE के इलिक्विड स्टॉक ऑप्शंस में गैर-असली ट्रेड से जुड़े मामलों के लिए चौथी सेटलमेंट स्कीम, 2026 को भी मंजूरी दी है.

REIT और InvIT के लिए आसान नियम

सेबी ने REIT और पब्लिकली लिस्टेड InvIT से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है. अब ये मंजूर विदेशी बाजारों में डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी कर सकेंगे. आसान भाषा में समझें तो इससे इन साधनों के लिए विदेशी निवेश जुटाने का एक नया रास्ता खुल सकता है. वोटिंग के नियमों में भी बदलाव हुआ है. अब 75 फीसदी आउटस्टैंडिंग यूनिट्स की जगह डाले गए वोट्स का 75 फीसदी होना पर्याप्त होगा. स्पॉन्सर बदलने की स्थिति में एग्जिट ऑफर के नियम भी बदले गए हैं और असहमत यूनिटहोल्डर्स के साथ किस तरह व्यवहार किया जाएगा, इसे स्पष्ट किया गया है.

Advertisement

रिसर्च एनालिस्ट और वॉल्ट मैनेजर के नियम

सेबी ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च एंटिटीज के लिए कुछ कंप्लायंस नियम भी आसान किए हैं. संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग रखने से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है. वहीं वॉल्ट मैनेजर्स के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये कर दी गई है. नए नियमों में स्टोरेज, सुरक्षा, इंश्योरेंस, गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया गया है. वॉल्ट मैनेजर्स के नियमों में गोल्ड और सिल्वर ETF तथा बुलियन डेरिवेटिव्स से जुड़े बुलियन को भी शामिल किया गया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »