नो-एनिमल फैट, चीन-PAK से दूरी! प्लास्टिक नोट के लिए RBI ने रखीं शर्तें, रेस में ये दिग्गज कंपनियां

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ₹10 और ₹20 के नोटों को कागज की जगह पॉलीमर पर छापने की योजना पर काम कर रहा है. इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड ने टेंडर जारी किया है, जिसमें दो विदेशी और एक भारतीय कंपनी ने बोली जमा की है.

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को कागज की जगह पॉलीमर पर छापने की योजना पर काम कर रहा है. (Photo: ITG) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को कागज की जगह पॉलीमर पर छापने की योजना पर काम कर रहा है. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को कागज की जगह पॉलीमर पर छापने की योजना पर विचार कर रहा है. यानी मौजूदा कागजी नोटों की जगह ज्यादा टिकाऊ और मजबूत पॉलीमर नोट लाने की दिशा में काम शुरू हो गया है. हालांकि, अभी यह बदलाव लागू नहीं हुआ है और यह प्रक्रिया फिलहाल टेंडर, सैंपल और टेस्टिंग के चरण में है.

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अपनी इस योजना को आगे बढ़ाने की दिशा में आरबीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने टेंडर जारी किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेंडर के लिए दो विदेशी कंपनियों और एक भारतीय कंपनी ने बोली जमा की है. पॉलीमर नोटों को लेकर इस बार कुछ विशेष शर्तें भी रखी गई हैं. ब्रिटेन समेत कुछ देशों में एनिमल फैट को लेकर सामने आए विवादों को देखते हुए आरबीआई की ओर से प्रक्रिया में सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं.

कंपनियों के सामने रखी गईं सख्त शर्तें

BRBNMPL ने बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं. कंपनियों को हलफनामा देकर यह प्रमाणित करना होगा कि भारत में उनके ऑपरेशन्स चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों से पूरी तरह अलग हैं. इसके अलावा, उन्हें यह भी प्रमाणित करना होगा कि इस्तेमाल होने वाली पॉलीमर शीट में किसी भी तरह की जानवरों की चर्बी या DNA मौजूद नहीं होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, BRBNMPL को शुरुआती तौर पर 68,000 रीम पॉलीमर सबस्ट्रेट की तत्काल जरूरत है. एक रीम में पॉलीमर फिल्म की 500 शीट्स शामिल होंगी.

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टेंडर में शामिल कंपनियों को अपने सैंपल भी जमा करने होंगे. इन सैंपल्स की भारत के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में टेस्टिंग की जाएगी. इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में पॉलीमर सबस्ट्रेट कितना टिकाऊ और उपयोगी है.

कौन सी कंपनियों ने जमा की है बोली?

इस टेंडर में भारतीय और विदेशी कंपनियां शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी BOPP (बाइऐक्शली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन) एक्सपोर्टर कंपनी कॉस्मो फर्स्ट (Cosmo First) ने ब्रिटेन की डी ला रू (De La Rue) को अपना टेक्निकल पार्टनर बनाया है. De La Rue सिक्योरिटी फीचर्स और पॉलीमर सबस्ट्रेट से जुड़ी तकनीक उपलब्ध कराएगी.

ऑस्ट्रेलिया बेस्ड कंपनी सीसीएल सिक्योर (CCL Secure) ने भी बोली जमा की है. यह कंपनी दुलिया के 40 से अधिक केंद्रीय बैंकों को पॉलीमर नोट सोल्यूशन्स दे रही है. कंपनी का दावा है कि इसके पॉलीमर सबस्ट्रेट सामान्य नोटों की तुलना में छह गुना तक ज्यादा टिकाऊ होते हैं.

इसके अलावा वियतनाम की कंपनी क्यूएंडटी हाई-टेक पॉलीमर (Q&T Hi-Tech Polymer) ने भी बोली जमा की है. कंपनी ने अपनी तकनीक के जरिए कॉटन करेंसी के मुकाबले पॉलीमर नोटों पर 78% कम लागत का दावा किया है.

पॉलीमर नोट में क्या होगा खास?

पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं. पानी, नमी और धूल-मिट्टी का इन पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है. इनकी उम्र सामान्य पेपर नोटों की तुलना में कई गुना ज्यादा हो सकती है. इन नोटों में आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स के साथ विंडो ट्रांसपेरेंसी जैसी तकनीक भी इस्तेमाल की जा सकती है, जिससे नकली नोट बनाना मुश्किल हो सकता है. पॉलीमर की सतह को साफ रखना भी अपेक्षाकृत आसान होता है.

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