BRICS Summit 2026: रेयर अर्थ, व्‍यापार घाटा और ट्रेड डील... क्‍यों खास है BRICS में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्‍ट्रपति शी-जिनपिंग की मुलाकात आज भारत मंडपम में होने वाली है. इस बैठक में व्‍यापार घाटा से लेकर डील तक कई मुद्दों पर बात हो सकती है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (File photo: ITG) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (File photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:19 PM IST

BRICS शिखर सम्‍मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्‍ट्रपति शी-जिनपिंग भारत आ चुके हैं और आज शाम तक प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात होने वाली है. इस मुलाकात को लेकर पूरी दुनिया की नजर जमी हुई है. खासकर अमेरिका, भारत और चीन के लीडर्स के इस मुलाकात को बेहद करीब से देख रहा है. 

अगर इस मुलाकात को करीब से देखें तो यह सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई चीजें नजर आती हैं. खासकर रेयर अर्थ मिन‍िरल्‍स से लेकर ट्रेड डेफिसिट, ऊर्वरक और भारतीय कंपनियों से व्‍यापार को लेकर बातचीत हो सकती है. चीन के विदेश मंत्रालय ने भी बैठक से पहले भारत-चीन संबंधों में संवाद और सहयोग बढ़ाने की बात कही है. आइए जानते हैं चीन भारत के लिए क्‍यों खास है और मोदी-जिनपिंग की ये मुलाकात क्‍यों अहम है... 

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रेयर अर्थ मिनिरल्‍स 
चीन रेयर अर्थ मिनिरल्‍स का बहुत बड़ा आयातक है और इसका 90 फीसदी हिस्‍सा कंट्रोल करता है और यह रेयर अर्थ मिनिरल्‍स भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, EV, बैटरी, डिफेंस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए बहुत जरूरी है, वह भी ऐसे समय में जब भारत इन सेक्‍टस में अपनी मैन्‍युफैक्‍चरिंग को तेजी से बढ़ा रहा है. साथ ही सेमीकंडक्‍टर सेक्‍टर में आत्‍मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है.  

पिछले दिनों जब चीन पर टैरिफ लगा था तो चीन ने इस मिनिरल्‍स पर रोक लगा दी थी, जिस कारण भारत की इंडस्‍ट्री भी प्रभावित हुई थी. ऐसे में इस बैठक के दौरान भारत ये सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि चीन से रेयर अर्थ की सप्‍लाई जारी रहे. 

चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट 
भारत के लिए एक सबसे जरूरी चर्चा का विषय चीन के साथ भारत का व्‍यापार घाटा. भारत निर्यात की तुलना में चीन से ज्‍यादा आयात करता है, जिस कारण चीन से भारत का व्‍यापार घाटा (Trade Deficit) बहुत ज्‍यादा है. 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्‍यापार करीब 155.6 अरब डॉलर पहुंचा, जबकि भारत का चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट लगभग करीब 115 अरब डॉलर रहा है. 

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भारत चीन से मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल्‍स, APIs, सोलर एक्‍यूपमेंट और कई सामान खरीदता है. मोदी-जिनपिंग की बातचीत में भारत की कोशिश होगी कि चीन भारतीय चीजों के लिए अपना व्‍यापार ज्‍यादा खोले. उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी अपने पिछले बयान में कहा था कि ब्रिक्‍स देशों को एक दूसरे के लिए व्‍यापार खोलना चाहिए. 

ट्रेड इकोसिस्‍टम 
मौजूदा समय में जियो-पॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है. अमेरिका ने चीन और भारत दोनों पर टैरिफ की धमकी दे चुका है. वहीं रूसी तेल खरीदने को लेकर भी चेतावनी देते आया है. ऐसे में इस मुलाकात के दौरान दोनों देश एक व्‍यापार को लेकर इकोसिस्‍टम तैयार करने पर भी बात कर सकते हैं. 

चीन और भारत मिलकर ईवी, इलेक्‍टॉनिक्‍स, सोलर, मशीनरी और अन्‍य जरूरी चीजें बना सकते हैं और दुनिया को सप्‍लाई कर सकते हैं. चीन, भारत के व्‍यापार के लिए अपने देश में नियामक में छूट देने की कोशिश कर सकता है. वहीं भारत भी चीनी कंपनियों के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रख सकता है. 

शिपमेंट को लेकर बातचीत 
भारत अभी भी स्‍पेशल ऊर्वरक ज्‍यादा भारत से ही मंगाता है, जो भारत के फसलों के लिए काफी अहम है. इसके साथ ही सोलर, क्रिटिकल मिनिरल्‍स और अन्‍य चीजें भी चीन से आती है और पिछले साल हमने ये देखा था कि ऊर्वरक के रुक जाने से भारत के किसानों के लिए दिक्‍कतें पैदा हुई थीं. चीन से शिपमेंट जारी रखने के लिए भारत एक स्‍पष्‍टता मांग सकता है, ताकि सप्‍लाई जारी रहे. 

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क्‍यों खास है मोदी-जिनपिंग की मुलाकात
साल 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में बड़ा तनाव आया था. अब स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है, दोनों देश संवाद बढ़ा रहे हैं और व्यापारिक संबंध भी बढ़े हैं और जिनपिंग का ये दौरा 7 सालों के बाद हो रहा है.  BRICS में यह बैठक और भी महत्वपूर्ण क्‍योंकि यह पांच देशों का एक छोटा ग्रुप नहीं रहा है, बल्कि इसमें मिडिल ईस्‍ट देश भी शामिल हो चुके हैं और यह 11 देशों का एक समूह बन चुका है. ऐसे में ये देश मिलकर डॉलर पर निर्भरता कम करने, व्‍यापार-निवेश बढ़ाने और सप्‍लाई चेन को मजबूत करने पर फोकस कर सकते हैं.

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