Exclusive: लालू, सुरेश प्रभु और अश्विनी वैष्णव... किस रेल मंत्री ने चार्टर प्लेन पर खर्चे सबसे ज्यादा? RTI में हुआ खुलासा

रेल मंत्रियों की चार्टर उड़ानों पर सरकारी खजाने से हुए खर्च का बड़ा खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ है. आजतक को मिले रेलवे बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2007 से अब तक 33 चार्टर उड़ानों पर करीब ₹8.90 करोड़ खर्च हुए. पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सबसे ज्यादा 12 बार चार्टर सुविधा ली, जबकि सुरेश प्रभु का कुल खर्च सबसे अधिक ₹3.01 करोड़ रहा. मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2023 में बालासोर हादसे के बाद सिर्फ एक बार चार्टर विमान का इस्तेमाल किया.

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आजतक ने रेलवे बोर्ड में आरटीआई डालकर पता किया है कि पिछले 16 वर्षों में किस रेल मंत्री ने सबसे ज्यादा चार्टर प्लेन का इस्तेमाल किया. (File Photo) आजतक ने रेलवे बोर्ड में आरटीआई डालकर पता किया है कि पिछले 16 वर्षों में किस रेल मंत्री ने सबसे ज्यादा चार्टर प्लेन का इस्तेमाल किया. (File Photo)

अशोक उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

रेल मंत्रियों की चार्टर फ्लाइट पर 2007 से अब तक करीब ₹8.90 करोड़ खर्च हुए हैं. आजतक को आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते 16 साल में रेल मंत्रियों ने 33 बार चार्टर फ्लाइट से उड़ान भरी. इन उड़ानों का खर्च सरकारी खजाने से किया गया. रिकॉर्ड में बताया गया है कि रेल मंत्रियों ने चार्टर विमानों का इस्तेमाल रेल हादसों, संकट की स्थिति और विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए किया गया. आजतक ने रेलवे बोर्ड से आरटीआई के जरिए यह रिकॉर्ड हासिल किया है.

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दस्तावेजों से पता चलता है कि शुरुआती वर्षों में चार्टर उड़ानों के इस्तेमाल की वजहों का काफी विस्तृत ब्यौरा दर्ज किया गया था. हालांकि, बाद के वर्षों में कई एंट्रियों में कारणों की जानकारी सीमित होती गई और कई जगह सिर्फ 'आधिकारिक' या 'विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रम' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया.

लालू यादव ने सबसे ज्यादा चार्टर प्लेन में भरी उड़ान

रिकॉर्ड के मुताबिक, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सबसे ज्यादा 12 मौकों पर चार्टर उड़ान की सुविधा ली. यह 33 दर्ज मौकों के एक-तिहाई से ज्यादा है. लेकिन सबसे ज्यादा खर्च लालू के नाम नहीं है. यह रिकॉर्ड सुरेश प्रभु के नाम है. उन्होंने सिर्फ चार मौकों पर चार्टर सुविधा ली, जो कुल 13 दिनों की थी. इसके बावजूद उनके नाम करीब ₹3.01 करोड़ का बिल दर्ज है. यानी हर मौके पर औसतन करीब ₹75 लाख खर्च हुए, जो सभी रेल मंत्रियों में सबसे ज्यादा औसत खर्च है. कुल मिलाकर प्रभु ने लालू प्रसाद यादव से करीब ₹1.03 करोड़ ज्यादा खर्च किए, जबकि उन्होंने चार्टर सुविधा का इस्तेमाल लालू के 12 मौकों के मुकाबले सिर्फ 4 बार किया.

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अश्विनी वैष्णव ने सिर्फ एक चार्टर प्लेन में भरी उड़ान

मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, जो 2021 से इस पद पर हैं, उन्होंने अब तक सिर्फ एक बार चार्टर फ्लाइट का इस्तेमाल किया है. उनकी यह उड़ान 2023 में भुवनेश्वर की थी, जिसका इस्तेमाल बालासोर रेल हादसे के बाद दुर्घटनास्थल का दौरा करने के लिए किया गया था. इस चार्टर उड़ान पर करीब ₹25 लाख खर्च हुए थे. बालासोर रेल हादसा भारतीय रेलवे के इतिहास के सबसे भीषण ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक है, जो 2 जून 2023 को ओडिशा के बालासोर जिले के बहानगा बाजार स्टेशन के पास हुआ था. इस दर्दनाक ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना में 296 लोगों की मृत्यु हुई थी और 1,000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

हादसों और बाढ़ के दौरान चार्टर प्लेन का इस्तेमाल

रिकॉर्ड में चार्टर विमानों के इस्तेमाल की प्रमुख वजहों में रेल हादसे, बाढ़ और विभिन्न उद्घाटन कार्यक्रम शामिल हैं. 2011 में तत्कालीन रेल मंत्री के.एच. मुनियप्पा हावड़ा-कालका मेल हादसे के बाद कानपुर गए थे. वहीं, 2009 में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री आर. वेलु कोरमंडल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की घटना के बाद जाजपुर-केओनझार रोड गए थे. 2016 में मनोज सिन्हा ने एक रेल हादसे के बाद कानपुर का दौरा किया था. 2023 में अश्विनी वैष्णव ने बालासोर हादसे के बाद भुवनेश्वर के लिए चार्टर विमान का इस्तेमाल किया.

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2008 की बिहार बाढ़ के दौरान लालू की कई उड़ानें

लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते 2008 की बिहार बाढ़ के दौरान सबसे अधिक बार चार्टर प्लेन का इस्तेमाल किया था. आरटीआई रिकॉर्ड में 4 जून की पटना-जोगबनी-पटना उड़ान, 24 अगस्त की पटना-सुपौल-अररिया-मधेपुरा-पटना उड़ान और 5 सितंबर की पटना-नेपाल-पटना उड़ान दर्ज है.

पहली दो उड़ानों का इस्तेमाल बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों के हवाई सर्वे के लिए किया गया था. तीसरी उड़ान कोसी नदी में टूटे तटबंध की स्थिति देखने के लिए थी. इन तीन उड़ानों पर ही करीब ₹30 लाख खर्च हुए. लालू के कार्यकाल की अन्य चार्टर उड़ानें फ्लैग-ऑफ, स्टेशन उद्घाटन और शिलान्यास जैसे कार्यक्रमों से जुड़ी थीं.

आरटीआई से मिले रिकॉर्ड में समय के साथ जानकारी दर्ज करने के तरीके में भी बदलाव दिखाई देता है. पुरानी एंट्रियों में चार्टर उड़ानों की वजह काफी विस्तार से बताई गई है. उदाहरण के लिए, एक एंट्री में असम के तिनसुकिया जिले में उग्रवादी हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने का उल्लेख है. कुछ रिकॉर्ड में नदी, स्टेशन और यहां तक कि ट्रेन नंबर जैसी जानकारियां भी दर्ज हैं. इसके मुकाबले 2010 के दशक और 2020 के दशक में कई एंट्रियां सिर्फ 'ऑफिशियल' या 'विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रम' जैसी संक्षिप्त जानकारी देती हैं. सुरेश प्रभु की सबसे महंगी उड़ानों में शामिल दिल्ली-इंफाल-अगरतला-दीमापुर-दिल्ली चार्टर पर ₹62 लाख से ज्यादा खर्च हुए. हालांकि, रिकॉर्ड में इसके उद्देश्य के बारे में इससे ज्यादा विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है.

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रेल मंत्रियों के चार्टर प्लेन किसके जरिए बुक किए गए?

रिकॉर्ड के मुताबिक, शुरुआती वर्षों में रेल मंत्रियों की अधिकांश चार्टर फ्लाइट्स भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए संचालित हुईं. एक उड़ान बीएसएफ के विमान की भी दर्ज है. 2018 से, तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल के कार्यकाल में, लगभग सभी चार्टर उड़ानों की बुकिंग IRCTC के जरिए की गई. 2018 से 2020 के बीच पीयूष गोयल के नाम आठ IRCTC बुकिंग दर्ज हैं. इनमें दिल्ली-चेन्नई-मुंबई-दिल्ली की एक उड़ान भी शामिल है, जिस पर करीब ₹39 लाख खर्च हुए.

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