प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले बड़ा इशारा कर दिया है. उन देशों को अपने ही अंदाज में जवाब दे दिया है, जिन्हें लगता है कि भारत दुनिया के लिए बस एक बड़ा बाजार है. पीएम मोदी का साफ संदेश है कि अब वो भारत नहीं है, जो विदेशी दबाव में आकर घुटने टेक दे.
दरअसल, लाल किले पर दिए पीएम मोदी के भाषण को गहराई से समझें तो उन्होंने अमेरिका जैसे देश को बिना नाम लिए मैसेज दे दिया है कि अब तक भारत दुनिया के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा है. लेकिन अब भारत को दुनिया के बाजारों पर कब्जा करना है. इसके लिए सबसे जरूरी है कि नकारात्मक सोच से निकलकर अपने बारे में सोचें. भारत अब वो सब काम करने के लिए तैयार है, जिससे विदेशी निर्भरता कम हो. कौन क्या कहेगा, इसकी चिंता नहीं है.
एक तीर से दो निशाने
एक तरह से पीएम मोदी ने अमेरिका को जवाब दे दिया है. क्योंकि पिछले कुछ महीनों से अमेरिका केवल अमेरिकी हित की बात कर रहा है. ग्लोबलाइजेशन को दरकिनार कर वैश्विक इकोनॉमी को प्रभावित कर रहा है. इसका ताजा उदाहरण है, मनमाने तरीके से टैरिफ थोपना और रूस से व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त 100 फीसदी पेनॉल्टी लगाने की धमकी देना. अमेरिकी कदम से ये साफ है कि उसे वैश्विक इकोनॉमी की चिंता नहीं है.
भारत को लेकर भी अमेरिका की दबाव वाली नीति रही है. लेकिन भारत अपनी हितों को दांव पर रखकर समझौते को कतई तैयार नहीं है, और आज पीएम मोदी ने अपने इरादे दुनिया को बता दिया है, और दो टूक कह दिया- अब कोई ग्लोबलाइजेशन की बात नहीं करता, सबको अपनी पड़ी है, भारत को भी अपने बारे में सोचना होगा.
इसी कड़ी में उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले दिनों में कई बड़े रिफॉर्म्स करने होंगे. जो काम 70 साल में नहीं हुए, उसे अगले 7 साल में करने का संकल्प लेना होगा. हमें अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है, अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद को करनी है, और इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प बहुत दृढ़ता के साथ हम लेकर के आगे बढ़ रहे हैं.
40 देशों से FTA की तैयारी
मेक इन इंडिया, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल, इन सारे क्षेत्रों में आज हर भारतीय का मन जुड़ रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि अब किसी एक-दो देश के भरोसे भारत नहीं है. 2014 के बाद दुनिया के करीब 40 देशों के साथ भारत का एफटीए एग्रीमेंट हो रहा है, और अब देश के MSMEs को इस अवसर का लाभ उठाना होगा.
उन्होंने कहा कि दुनिया के बाजारों पर अब भारत को कब्जा करना होगा. पीएम मोदी बोले, 'दुनिया में हमें पहुंचना है, भारत के उत्पाद की हर चीज विश्व के बाजार में पहुंचे और चाहे हमारा टेक्सटाइल हो, हमारी मशीनरी हो, दवाइयां हो, हमने मौका छोड़ना नहीं है. लेकिन वैश्विक जो पैरामीटर्स हैं, उस पैरामीटर को हमें पार करना होगा, हमें दुनिया से जो चीजें मिलती हैं, उससे बेहतर बनाकर देने की कोशिश करनी होगी.'
पीएम मोदी ने कहा, दुनिया से मुकाबले के लिए हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं और आने वाले दिनों में भी नेक्स्ट लेवल रिफॉर्म की ओर बढ़ने वाले हैं. इसलिए सरकार, समाज, उद्योग, उत्पादक, किसान, हर किसी ने अपनी ट्रेडिशनल व्यवस्थाओं में रिफॉर्म करना पड़ेगा, सोच में रिफॉर्म करना होगा, अपने लक्ष्यों को रिफॉर्म करना होगा.
इसी कड़ी में पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से सप्तधारा का नारा दिया है, जिसे आने वाले 5-7 वर्षों में जमीन पर उतारना है. इससे देश को शक्ति मिलेगी, 2047 के लक्ष्य के अनुरूप भारतीय व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा. बीते हुए कल के नीति नियमों से नहीं चल सकते. हमें आने वाले सपनों के हिसाब से नीति नियमों को गढ़ना होगा.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सरकार का खास फोकस
उन्होंने कहा, 'खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बहुत आगे बढ़ाना होगा और प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ-साथ हमें छोटे-छोटे पुर्जे भी बनाने हैं और बड़े-बड़े प्रोडक्ट भी बनाने हैं. ग्लोबल मार्केट में हमारी पहचान विश्वसनीयता और गुणवत्ता के आधार पर होनी चाहिए. क्वालिटी के संबंध में नो कॉम्प्रोमाइज और इसलिए हमारा मंत्र क्वालिटी, क्वालिटी, क्वालिटी होना चाहिए. यही हमारा ग्लोबल ब्रांड वैल्यू बनेगा'.
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा है कि भारत को हरहाल में डिफेंस में आत्मनिर्भर बनना होगा, अब भारत ने अनुभव कर लिया है, दुनिया ने भी अनुभव कर लिया है, इसके बिना कोई चारा नहीं है. नेक्स्ट जनरेशन डिफेंस टेक्नोलॉजी डेवलप करके हमें ग्लोबल सप्लायर बनने की दिशा में हमें लक्ष्य लेकर के चलना है.
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, आने वाले वर्षों में ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनामी पर सरकार का फोकस होगा, जो ग्रीन जॉब्स को भी जन्म देती है. भारत को ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग इन ग्लोबल स्केल में कामयाबी हासिल करनी है.
इसके अलावा खेती हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है. इसलिए फूड प्रोसेसिंग में देश को और आगे बढ़ना होगा. देश के किसानों के लिए अब दुनिया के बाजार खुल चुके हैं, FTA के कारण हमें एक बहुत बड़ा मार्केट मिल रहा है, हमें वहां पहुंचना है.
अमित कुमार दुबे