भारतीय शेयर मार्केट को लेकर ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक 'मॉर्गन स्टेनली' (Morgan Stanley) को काफी उम्मीदें हैं. कंपनी ने BSE Sensex के लिए अपना 1,00,000 का बुल केस टारगेट बरकरार रखा है. उसका मानना है कि हाल के महीनों में शेयर मार्केट में आई तेजी आगे भी जारी रह सकती है. हालांकि, आगे की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों और निवेशकों के नजरिए पर निर्भर करेगी.
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि भारत की बेहतर होती ग्रोथ और वैल्यूएशन बाजार को सपोर्ट दे रहे हैं. कंपनी के मुताबिक, सबसे अहम बात यह होगी कि निवेशक भारत और दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ की तुलना कैसे करते हैं. अगर ग्लोबल स्तर पर AI Capex को लेकर सतर्कता बनी रहती है और भारत की ग्रोथ मजबूत होती है, तो भारतीय शेयर मार्केट को फायदा मिल सकता है.
मॉर्गन स्टेनली ने अपने बुल केस को 25 फीसदी संभावना दी है. वहीं 50 फीसदी संभावना के साथ Sensex का बेस केस टारगेट 89,000 रखा गया है. दूसरी ओर, 25 फीसदी संभावना के साथ बेयर केस टारगेट 66,000 तय किया गया है. बेस केस में मैक्रो स्टेबिलिटी, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में बढ़ोतरी और मजबूत आर्थिक ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है.
कमाई में मजबूत बढ़त की उम्मीद
4 अगस्त की अपनी रिपोर्ट में मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि उसे फिलहाल सप्लाई से जुड़ी बड़ी दिक्कतें नजर नहीं आ रही हैं. कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक Sensex कंपनियों की कमाई (Earnings) औसतन 16 फीसदी सालाना की दर से बढ़ सकती है. उसका मानना है कि रिटेल निवेशकों की मांग अब भी बाजार में सप्लाई से ज्यादा बनी हुई है.
जून तिमाही के नतीजों से भरोसा
मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, जून तिमाही के नतीजों ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि भारत की डोमेस्टिक ग्रोथ में तेजी आ रही है. वहीं, ग्लोबल AI ट्रेड में उतार-चढ़ाव विदेशी बाजारों में बढ़ती सतर्कता का संकेत देता है. कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स पॉजिटिव बने रहेंगे.
सुधारों से ग्रोथ में तेजी की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस समय बड़े आर्थिक सुधारों के दौर से गुजर रहा है. इसका असर आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ और कैपिटल फ्लो दोनों पर दिख सकता है. मॉर्गन स्टेनली का यह भी मानना है कि लगातार आ रहे IPO अगले कुछ महीनों तक बाजार को सपोर्ट दे सकते हैं, बशर्ते उनकी रफ्तार बहुत ज्यादा न हो जाए.
वैल्यूएशन पर क्या है राय?
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि भारतीय शेयर मार्केट में हाल में दिखी Valuation De-rating अस्थायी यानी साइक्लिकल है, न कि लंबे समय की सेक्युलर कमजोरी. उसके मुताबिक, भारत की ग्रोथ निचले स्तर से निकलकर अब ऊपर की ओर बढ़ रही है. हालांकि, AI Capex Cycle से फायदा उठाने वाली कुछ अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में इसकी रफ्तार अभी कम है. कंपनी ने यह भी कहा कि भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ को लेकर दो बड़ी चिंताएं जताई जाती हैं. पहली, घटती Fertility Rate और दूसरी, बड़ी सर्विस इकोनॉमी पर AI का असर. हालांकि मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि इन दोनों जोखिमों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर देखा जा रहा है.
IT सेक्टर बनेगा डार्क हॉर्स
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि IT Services आने वाले समय में Dark Horse साबित हो सकती हैं. दुनिया AI बेस्ड एप्लिकेशन और सॉल्यूशंस डेवलपमेंट करने के लिए भारतीय IT कंपनियों की ओर देख रही है. अगर यह ट्रेंड मजबूत हुआ, तो इस सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है.
क्या हैं बड़े जोखिम?
कंपनी के मुताबिक, भारत के लिए सबसे बड़े जोखिम फिलहाल बाहरी हैं. इनमें भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल इकोनॉमी की सुस्त रफ्तार शामिल है. घरेलू स्तर पर कमजोर कृषि उत्पादकता, न्यायपालिका में क्षमता की कमी और AI के कारण लेबर मार्केट पर संभावित दबाव को भी जोखिम के तौर पर देखा गया है. मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि आने वाले महीनों में डोमेस्टिक ग्रोथ और ग्लोबल सेंटीमेंट यह तय करेंगे कि भारतीय शेयर मार्केट की अगली चाल कैसी रहती है.
आजतक बिजनेस डेस्क