16 की उम्र... 12वीं में पढ़ते हैं, AI कंपनी के मालिक, पिता को देते हैं 2 लाख की सैलरी

केरला के 16 साल की उम्र के अजू आज एक एआई कंपनी के मालिक हैं और अपने पिता को एक कर्मचारी के तौर पर 2 लाख रुपये की सैलरी देते हैं. साथ ही वे 12वीं क्‍लास में भी पढ़ाई करते हैं.

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राउल जॉन अजू. (Photo: LinkedIn/@Raul John Aju) राउल जॉन अजू. (Photo: LinkedIn/@Raul John Aju)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

16 साल की उम्र में जब ज्‍यादातर बच्‍चे अभी तक यह तय नहीं कर पाते कि उन्‍हें आगे क्‍या बनना है या वे क्‍या करना चाहते हैं, उस उम्र में केरल के राउल जॉन अजू 15 कर्मचारियों के साथ एक AI स्‍टार्टअप चला रहे हैं. इतना ही नहीं वे अपने पिता को हर महीने 2 लाख रुपये की सैलरी भी देते हैं. 

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बारहवीं कक्षा के इस छात्र ने 15 से ज्‍यादा AI प्रोडक्‍ट्स डेवलप किया है. खबरों के अनुसार, वह अपने पिता को उनकी कंपनी में काम करने के लिए हर महीने 2 लाख रुपये देते हैं और करीब पांच लाख शिक्षार्थियों को ट्रेनिंग दिला चुके हैं. फिर भी अपनी शुरुआती सफलता के बावजूद, वह कहते हैं कि सबसे ज्‍यादा सबक लोगों से सीखने में मिलता है. 

कैसे शुरू किया एआई स्‍टार्टअप? 
राउल की AI जर्नी तब शुरू हुई जब वह नौ साल का था. एडोब में उसके पिता के काम ने उसे प्रीमियम टेक उपकरणों तक पहुंच दी, जिससे उसे टेक सेक्‍टर के उपयोग, उसके काम और अन्‍य बुनियादी चीजों के बारे में पता चला. उन्‍होंने फिर एआई सर्च के बारे में सीखा. लेकिन यह सिर्फ यही तक सीमित नहीं रहा... धीरे-धीरे करके एआई संभावनाओं को लेकर प्रयोग शुरू कर दिया. बस यहीं से उन्‍होंने अपने एआई स्‍टार्टअप की शुरुआत कर दी. 

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जब वह 12 साल के हुए, तब तक उनकी यह जिज्ञासा मीबॉट नामक रोबोट में बदल गई, जिसे उसने स्कूल के एड प्रोजेक्ट के लिए बनाया था. यह टेक्‍नोलॉजी के प्रति उसके नजरिए की शुरुआती झलक थी. तब से, राउल ने MeBot, RESQ AI, ZapGap, Investo AI और FeedFye समेत 15 से अधिक AI प्रोडक्‍ट्स डेवलप किए हैं. इन सभी प्रोजेक्‍ट्स में उनका फोकस तकनीकी प्रदर्शन के बजाय व्यावहारिक समस्याओं को हल करने वाली तकनीक विकसित करने पर रहा है. 

अब अपने पिता को ही देते हैं सैलरी
आज 12वीं क्‍लास में पढ़ते हुए भी राउल करीब 15 कर्मचारियों वाली एक स्‍टार्टअप कंपनी को संभालते हैं. इन एक कर्मचारी में से उनके पिता भी शामिल हैं, जिन्‍हें वे हर महीने 2 लाख रुपये की सैलरी देते हैं. यह व्‍यवस्‍था भले ही असामान्‍य लगे, लेकिन राउल इसे उद्योग में दशकों के अनुभव वाले किसी व्यक्ति से सीखने के अवसर के रूप में देखते हैं. 

अजू जोसेफ ने अमेज़ॅन, एडोब, विप्रो और आईबीएम समेत कई कंपनियों में काम किया है, राउल का मानना ​​है कि यह एक्‍सप्रीएंस रातोंरात हासिल नहीं किया जा सकता या फोन से नहीं सीखा जा सकता. राउल का कहना है कि अपने पिता के साथ काम करने से उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि टेक कंपनियां कैसे काम करती हैं और कैसे आगे बढ़ती हैं? उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि कंपनी में उनके पिता का होना "मेरे मार्केटिंग के लिए अच्छा है."

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संस्थापक होने के बावजूद, राउल को पता है कि उनका एक्‍सप्रीएंश कहां समाप्त होता है और दूसरों का कहां से शुरू होता है. बेटा भले ही बॉस हो, लेकिन वह सीखने के लिए हमेशा तत्पर रहता है.

केरल से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक
राउल के काम ने उन्हें कक्षाओं और स्टार्टअप कार्यालयों से परे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है. नई दिल्ली में आयोजित 2026 इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित AI और बच्चों की सुरक्षा पर एक सत्र में भाग लिया और उद्घाटन भाषण दिया था. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत अमनदीप गिल से भी मुलाकात की और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ बातचीत की.

इंडिया टुडे साउथ कॉन्क्लेव 2025 में, राउल ने भारत की टेक सेक्‍टर में अग्रणी बनने की क्षमता के बारे में बात की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी युवा व्यक्ति की क्षमता को मापने के लिए अंकों और डिग्रियों को एकमात्र पैमाना मानने के बजाय रिसर्च, कौशल, एजुकेशन और रचनात्मकता का महत्व अधिक है. 

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