महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जल्द ही एक बड़ा शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट आकार ले सकता है. दिघी में करीब ₹27,000 करोड़ के निवेश से ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने की तैयारी है. महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से करीब 90,000 रोजगार के मौके बन सकते हैं. प्रोजेक्ट को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड(MDL) आगे बढ़ाएगी और यहां बड़े कमर्शियल जहाजों के निर्माण के लिए आधुनिक सुविधाएं तैयार की जाएंगी.
महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंगलवार को जारी रिलीज के मुताबिक, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने नेशनल शिपबिल्डिंग इंडस्ट्रियल पार्क एंड मरीन लॉजिस्टिक्स (NSHIPML) के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है. यह समझौता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुआ. इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मकसद देश में बड़े स्तर पर जहाज बनाने की क्षमता बढ़ाना और शिपबिल्डिंग से जुड़ी पूरी इंडस्ट्री को मजबूत करना है.
₹27,000 करोड़ का निवेश, बड़े जहाज बनेंगे
प्रस्तावित प्रोजेक्ट में करीब ₹27,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा. सरकार के मुताबिक, दिघी में बनने वाले क्लस्टर में बड़े कमर्शियल वेसल्स यानी कारोबारी जहाज बनाए जा सकेंगे. इस प्रोजेक्ट से भारत की मैरीटाइम इंडस्ट्री से जुड़ी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही जहाज निर्माण से जुड़े दूसरे कारोबार, सप्लाई चेन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
सालाना 2 मिलियन ग्रॉस टन क्षमता का लक्ष्य
समझौते के तहत MDL ने दिघी में कम से कम 2 मिलियन ग्रॉस टन सालाना शिपबिल्डिंग क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसका मतलब है कि क्लस्टर को काफी बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना है. यहां सिर्फ जहाज बनाने की सुविधा ही नहीं होगी, बल्कि शिपबिल्डिंग से जुड़े दूसरे कामों के लिए भी जरूरी ढांचा तैयार किया जाएगा. दिघी का ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर महाराष्ट्र मेरिटाइम बोर्ड और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके लिए NSHIPML को स्पेशल पर्पज कंपनी (SPC) के तौर पर बनाया गया है. सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के लक्ष्यों के साथ भी जुड़ा है.
शिपबिल्डिंग के साथ पूरा इकोसिस्टम बनेगा
सरकारी रिलीज के मुताबिक, प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक शिपबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. इसके साथ मैरीटाइम इंडस्ट्री को जरूरी सपोर्ट देने वाला इंडस्ट्रियल और सप्लाई चेन नेटवर्क भी विकसित होगा. इससे जहाज निर्माण के लिए जरूरी सामान, सेवाओं और दूसरी औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इससे भारत में शिपबिल्डिंग की क्षमता बढ़ेगी और नई तकनीक व निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी.
90 हजार रोजगार के मौके बनने की उम्मीद
इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा असर रोजगार के मोर्चे पर भी देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र सरकार ने करीब 90,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद जताई है. इनमें शिपबिल्डिंग के अलावा सप्लाई चेन और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी शामिल हो सकते हैं. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन ने कहा कि कंपनी सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग से दिघी में आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग सुविधा तैयार करने की दिशा में काम करेगी. MoU पर कैप्टन जगमोहन और NSHIPML के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप पी ने हस्ताक्षर किए.
भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए अहम
दिघी का यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक शिपयार्ड बनाने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उससे जुड़े उद्योगों का नेटवर्क तैयार करने की योजना है. अगर प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है तो इससे महाराष्ट्र के साथ-साथ देश के शिपबिल्डिंग और समुद्री उद्योग को भी फायदा मिल सकता है.
आजतक बिजनेस डेस्क