Iran Big Crisis: US ने बिगाड़ा खेल... अब ईरान में नया संकट, देश को उठाना पड़ा ये कदम

US-Iran War का बुरा असर ईरानी इकोनॉमी पर जारी है. होर्मुज के आस-पास अमेरिकी नाकाबंदी ने ईरान के तेल निर्यात पर गहरी चोट मारी है और इसके चलते देश की करेंसी रियाल लगातार क्रैश हो रही है.

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अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान की तेल अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट. (Photo: Reuters) अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान की तेल अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

अमेरिका के साथ लंबे समय से युद्ध कर रहे ईरान के सामने अब नया और बड़ा संकट करेंसी क्रैश के रूप में सामने आ रहा है. ईरानी नियंत्रण वाले होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने स्थिति को बद से बदतर कर दिया है. शनिवार को Iranian Currency Rial में आई गिरावट के बाद अचानक ईरान के सेंट्रल बैंक को डॉलर बेचने का बड़ा कदम उठाना पड़ा और इसके जरिए इकोनॉमी को सहारा देने के लिए 2 अरब डॉलर डालने का ऐलान किया गया. 

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डॉलर के मुकाबले लगातार टूट रहा रियाल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की रियाल में शनिवार को भी तेज गिरावट जारी रही. इस बीच ईरान के केंद्रीय बैंक ने अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी का सामना कर रही अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 2 अरब डॉलर तक की धनराशि डालने की घोषणा की.  

फ्री-मार्केट ट्रैकिंग वेबसाइट bon-bast.com के अनुसार, अमेरिकी डॉलर का भाव 26.88 लाख रियाल के आसपास रहा, जो शुक्रवार को 26.32 लाख रियाल था. वहीं, alanchand.com ने डॉलर का भाव 26.95 लाख रियाल बताया.

70% महंगाई दर, करेंसी भी क्रैश
ईरान के सरकारी टेलीविजन की ओर से कहा गया है कि केंद्रीय बैंक ने करेंसी रियाल को सहारा देने के लिए 2 अरब डॉलर तक की बिक्री शुरू कर दी है, जिसने पिछले एक साल में अपने मूल्य का आधे से अधिक हिस्सा खो दिया है. 70% से अधिक की महंगाई दर के साथ ईरान के आम नागरिकों के लिए जीवन और भी कठिन होता जा रहा है, जो बुनियादी आवश्यकताओं या किराए का वहन करने में असमर्थ हैं. 

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US का इस संकट से बड़ा कनेक्शन
ईरान के लोगों के सामने आए इस संकट का सबसे बड़ा कारण होर्मज स्ट्रेट के आस-पास अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी है, जिसने देश की वित्तीय जीवनरेखा (Iran Financial Lifeline) यानी तेल निर्यात को नष्ट करके रख दिया है. हालात ये है कि अपनी सेविंग को सुरक्षित करने के लिए लोग अब डॉलर, अन्य मजबूत मुद्राएं या फिर सोना खरीदने में लगे हुए हैं. 

ईरान इकोनॉमी ढहने की अफवाह का असर
रिपोर्ट की मानें, तो केंद्रीय बैंक गवर्नर के विदेशी मुद्रा मामलों के सहायक मेहदी दाराबी ने रियाल की गिरावट के लिए आंशिक रूप से अमेरिकी अधिकारियों द्वारा ईरानी अर्थव्यवस्था के पतन की झूठी भविष्यवाणियों को जिम्मेदार ठहराया.

दाराबी के मुताबिक, 'ऐसा कहा जा रहा है कि ईरानी अर्थव्यवस्था धराशायी होने वाली है, दुश्मन इसका इस्तेमाल हमारी करेंसी की विनिमय दर को प्रभावित करने के लिए कर रहा है.' हालांकि, उन्होंने कहा कि रियाल की मौजूदा गिरावट अस्थायी है.

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