Defence Share Rally: भारत के दोनों हाथों में लड्डू... हथियार बनाने वाले स्‍टॉक बने रॉकेट, खूब भागे!

ट्रंप की बयानबाजी के कारण यूरोप को हथियारों के लिए नए विकल्‍प की तलाश है, जो भारत प्रोवाइड करा सकता है. साथ ही अमेरिका के सहयोग से भी भारत के डिफेंस सेक्‍टर को मजबूती मिल सकती है. यही कारण है कि आज भारतीय डिफेंस शेयरों में तेजी देखी जा रही है.

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डिफेंस शेयरों में बड़ी रैली. (Photo: File/PIB) डिफेंस शेयरों में बड़ी रैली. (Photo: File/PIB)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:34 PM IST

शेयर बाजार में शानदार तेजी देखी जा रही है, क्‍योंकि अमेरिका कैसे भी करने अब ये जंग रोकना चाहता है. उसे इस जंग की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. हर दिन अरबो डॉलर का नुकसान हो रहा है. साथ ही महंगाई भी चरम पर पहुंच रही है. ईंधन की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है. 

वॉल स्‍ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि ट्रंप इस युद्ध को खत्‍म करना चाहते हैं. बस इसी खबर के बाद शेयर बाजार में तेजी देखी जा रही है. रात में अमेरिकी बाजार में भी गजब की तेजी देखी गई थी. 

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इधर, भारतीय बाजार भी शानदार तेजी दिखा रहा है. सेंसेक्स 1186.77 अंक या 1.65 प्रतिशत बढ़कर 73,134.32 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 348 अंक या 1.56 प्रतिशत बढ़कर 22,679.40 पर बंद हुआ. इस तेजी में सबसे ज्‍यादा योगदान डिफेंस कंपनियों के शेयरों ने दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर क्‍यों डिफेंस के शेयरों में इतनी तेजी आई है? 

डिफेंस शेयरों में 19% की तेजी
गार्डन रीच शिपब्लिडर्स के शेयरों (GRSE Share) में करीब 19 फीसदी की तेजी आई और यह 2337 रुपये पर आ गया. BDL के शेयरों में 10 फीसदी की तेजी आई और यह 1200 रुपये के ऊपर रहा. कोचीन शिपयार्ड के शेयरों में 13 फीसदी की उछाल रही. इसी तरह, मझगांव डॉक शिपबिल्‍डर्स के शेयरों में 10 फीसदी की तेजी आई. डिफेंस शेयरों में इतनी तेजी तब आई है, जब NATO देशों और अमेरिका के बीच दरार बनता हुआ दिख रहा है. 

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क्‍यों चढ़े डिफेंस शेयर? 
दरअसल  फ्रांस और इटली ने अमेरिका-इजरायल की कुछ सैन्य कार्रवाइयों पर आपत्ति जताई है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप और नाटो देशों के ईरान वॉर में सपोर्ट नहीं करने की वजह से आलोचना की है. उन्‍होंने इन देशों पर कई तीखी बयानबाजी की है, जिस कारण यूरोप-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को दिखा रहा है. साथ ही ट्रंप ने बयान दिया है कि जो देश अमेरिका की एनर्जी पर निर्भर हैं, वह अपनी एनर्जी का जुगाड़ खुद करें. 

एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के बदलाव से यूरोपीय संघ एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में आ जाएगा. सालों से यूरोपीय संघ अमेरिकी डिफेंस सिस्‍टम, खुफ‍िया जानकारी और सैन्‍य सहायता पर ज्‍यादा निर्भर रहे हैं. अमेरिकी रोल में कमी आने से यूरोपीय संघ को अपनी खरीद रणनीतियों पर फिर विचार करने और रणनीतिक स्‍वायत्तता की दिशा में प्रयास तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. हालांकि अमेरिका का विकल्‍प तलाशना मुश्किल है, लेकिन यूरोप भारत जैसे एक अच्‍छे विकल्‍प के तौर पर देख सकता है. 

डिफेंस शेयरों में तेजी का ये भी कारण
इसके साथ ही डिफेंस शेयरों में तेजी की एक और वजह सामने आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान के बाद इन शेयरों में और तेजी देखी जा रही है. उन्होंने रक्षा संबंधी सहयोग को 'सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण' स्तंभ बताया और दोनों देशों के बीच चल रहे संयुक्त अभ्यासों और बढ़ते सहयोग का हवाला दिया. उन्‍होंने यह भी कहा है कि भारत एक खास डिफेंस साझेदार है और डिफेंस मदद हमारे द्विपक्षीय संबंधों के सबसे उज्ज्वल पहलुओं में से एक है. 

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(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

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