सुभाष चंद्रा के खिलाफ CBI ने दर्ज की FIR, नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की शिकायत पर सीबीआई ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. आरोप है कि चंद्रा ने गलत और बढ़ा-चढ़ाकर नेटवर्थ दिखाई और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस को धोखा दिया.

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सुभाष चंद्रा पर गलत तरीके से लोन लेने का आरोप. (File Photo: ITG) सुभाष चंद्रा पर गलत तरीके से लोन लेने का आरोप. (File Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 05 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

Essel Group के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ CBI ने एफआईआर दर्ज की है. पीटीआई के अनुसार, सुभाष चंद्रा पर आरोप है कि उन्‍होंने लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से लोन लेने के लिए अपनी नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई थी. 

बाद में ये लोन डिफॉल्‍ट हो गए, जिससे सरकारी लेंडर को 1,322 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का नुकसान हुआ. LIC हाउसिंग फाइनेंस की ओर से शिकायत के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई है.

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LICHFL की शिकायत में कहा गया है कि चंद्रा ने नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किए थे, जिनका इस्तेमाल कुल 980 करोड़ रुपये के दो लोन की मंज़ूरी और भुगतान हासिल करने के लिए किया गया था. 

ये लोन वसंत सागर प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड और डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी. वसंत सागर को 500 करोड़ रुपये रुपये का लोन दिया गया था, जिसमें  पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड Co-Borrower थी.

इसी तरह, 480 करोड़ रुपये का लोन डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट के नाम पर था और इसमें Co-Borrower स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड थी. 

चंद्रा ने दी थी अपनी गारंटी
FIR में कहा गया है कि 500 करोड़ रुपये लोन वसंत सागर को टेकओवर, टॉप-अप और बिजनेस विस्‍तार के लिए होम एंट‍िटी लोन के तौर पर मंजूर किया गया था और इसपर सुभाष चंद्रा ने 28 मार्च 2018 को एक कंटिन्यूइंग गारंटी दी थी. इसी तरह, 480 करोड़ रुपये की डिजिटल लोन को एक अलग लोन अकाउंट के तहत रेंटल सिक्‍युरिटाइजेशन स्‍कीम के तहत रेंटल डिस्‍काउंटिंग स‍ुविधा के तौर पर मंजूर किया गया था और इसपर भी चंद्रा ने गारंटी दी थी. 

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नेटवर्थ की जानकारी गलत
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि 500 करोड़ लेने के लिए नेटवर्थ सर्टिफिकेशन DIM एंड कंपनी द्वारा 28 मार्च, 2018 को जारी किया गया था, जिसमें उनकी नेट वर्थ लगभग 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी. LICHFL ने आगे बताया कि 480 करोड़ रुपये डिजिटल लोन को चंद्रा द्वारा जमा किए गए नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर मंज़ूर किया गया था, जिसे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स MPJ एंड कंपनी ने 6 जुलाई, 2018 को जारी किया था. इस सर्टिफिकेट में उनकी नेट वर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी.

LICHFL के अनुसार, बाद में ये दोनों लोन डिफॉल्ट हो गए. FIR के मुताबिक, 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016' के तहत आगे की कार्यवाही के दौरान, चंद्रा ने LICHFL को सौंपे गए सर्टिफिकेट में बताई गई नेटवर्थ होने से इनकार किया. FIR में कहा गया है कि कार्यवाही के दौरान, जाने-माने उद्योगपति ने 2024 में अपनी नेट वर्थ 31.79 करोड़ रुपये और 2017-18 में 40,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा बताई थी. 

एलआईसी को दिया धोखा
FIR में आरोप लगाया गया है कि चंद्रा ने कर्ज लेने वाली कंपनियों - वसंत सागर प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और उनके अधिकारियों व निदेशकों के साथ मिलकर LICHFL को धोखा दिया और इन कंपनियों को लोन दिलवाया, जिसका बाद में उन्होंने गलत इस्तेमाल किया.

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इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि चंद्रा ने अपनी नेटवर्थ को बढ़ा-चढ़ाकर और गलत तरीके से दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज़ बनाए, ताकि LICHFL को धोखा देकर मुख्य कर्जदारों को फंड जारी करवाया जा सके. 

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