'फूट सकता है AI का बुलबुला', विदेशी अरबपति की वॉर्निंग

ब्रिजवॉटर के फाउंडर और अरबपति रे डेलियो ने शेयर बाजारों को अलर्ट करते हुए चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि एआई का बुलबुला अब फूटने की कगार पर पहुंच गया है.

Advertisement
विदेशी अरबपति ने एआई को लेकर दी बड़ी वार्निंग. (Photo: AI) विदेशी अरबपति ने एआई को लेकर दी बड़ी वार्निंग. (Photo: AI)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल जारी है. अमेरिका हो, जापान हो, कोरिया हो या फिर भारत हर ओर तबाही मची हुई है और शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. गुरुवार को भी सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए और निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए. 

शेयर बाजारों में आए इस भूचाल के बीच विदेशी अरबपति रे डेलियो ने एक बड़ी चेतावनी दी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा है कि 'एआई का क्लासिक बुलबुला' फूटने की कगार पर पहुंच गया है. इसके पीछे उन्होंने तमाम कारण भी बताए हैं. 

Advertisement

US में ब्याज दरें बढ़ने का असर
अरबपति रे डेलियो के मुताबिक, एआई का बुलबुला फूटने के पीछे बड़े कारणों में एक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में किया जाने वाला इजाफा है. अब निवेशकों को अपनी संपत्ति को नकदी में बदलने की आवश्यकता महसूस होने लगी है. उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशक भी विदेशों में हो रहे घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखेंगे, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार 2025 के बाद से सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख बाजारों में से एक है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर में फोर्ब्स ग्लोबल सीईओ कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए डेलियो ने कहा कि AI को वित्त पोषित करने के लिए भारी मात्रा में कर्ज लिया जा रहा है और ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी के साथ अब यह बुलबुला फूटना शुरू हो सकता है. ब्रिजवॉटर के फाउंडर ने कहा, 'हम चक्र के उस चरण में हैं, जो इससे पहले है लेकिन इस संकट के करीब पहुंच रहा है.'

Advertisement

डेलियो ने गिनाए ये आंकड़े
अरबपति ने एआई की बुलबुला फूटने की चेतावनी देते हुए कुछ आंकड़े सामने रखे. उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चला कि 10-वर्षीय यील्ड बढ़कर 5.368 प्रतिशत हो गई, जो 2002 के बाद से नहीं देखी गई थी. इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारकों का मजबूत संयोजन है, जिनमें सरकारी कर्ज का बढ़ता बोझ, व्यापार का विखंडन, युद्ध से प्रेरित महंगाई का दबाव और AI के बुनियादी ढांचे से संबंधित पर्याप्त पूंजी जरूरतें. ये सभी कारक मिलकर ग्लोबल सेविंग की उपलब्धता को कम कर रहे हैं और संतुलन वास्तविक ब्याज दरों को बढ़ा रहे हैं.

रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म के हवाले से कहा गया है कि एआई-संचालित प्रोडक्शन लाभों से मुद्रास्फीति तेजी से बेअसर हो जाएगी, यह आशावादी धारणा अनिश्चित बनी हुई है. कई एआई-संबंधित व्यवसायों के बीच सीडीएस स्प्रेड बढ़ रहा है. अगर लाभ तत्काल के बजाय बाद में मिलने वाले साबित होते हैं, तो एआई पूंजीगत व्यय के क्राउडिंग-आउट प्रभाव कम से कम 2028 तक बने रह सकते हैं, जिससे महंगाई और वास्तविक ब्याज दरें वर्तमान अनुमान से अधिक रहेंगी.

भारतीय शेयर का गुरुवार को क्रैश 
एआई को लेकर जहां विदेशी अरबपति शेयर बाजारों के लिए अलर्ट जारी कर रहे हैं, तो वहीं भारतीय शेयर बाजार पर नजर डालें, तो गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआत से अंत तक क्रैश होते रहे. बाजार बंद होने पर BSE Sensex 1045 अंक गिरकर 71,593 के लेवल पर बंद हुआ, तो वहीं NSE Nifty 371 अंक की गिरावट लेकर 22,231 पर क्लोज हुआ. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »