UPI भले Free, लेकिन आम ग्राहक से बैंक वसूलता है 10 तरह के चार्ज

UPI पर नए MDR की चर्चा के बीच बैंकिंग में लगने वाले दूसरे चार्ज भी समझना जरूरी है. ATM, चेक, SMS अलर्ट से लेकर पैसे ट्रांसफर करने तक अलग-अलग सेवाओं पर बैंक शुल्क लेते हैं. जानिए ये बैंकिंग चार्ज क्या हैं और 15 अक्टूबर से लागू होने वाले UPI MDR में क्या बदलेगा.

Advertisement
बैंकिंग चार्ज का पूरा हिसाब. (Photo: ITG) बैंकिंग चार्ज का पूरा हिसाब. (Photo: ITG)

धीरज पांडेय

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

UPI का नाम आते ही सबसे पहले एक बात याद आती है- पेमेंट करो, पैसा तुरंत पहुंच गया और अलग से कोई चार्ज भी नहीं. यही वजह है कि आज चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक लोग UPI से पेमेंट करते हैं. लेकिन अब 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने जा रहा है. इसके बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि क्या डिजिटल पेमेंट भी धीरे-धीरे चार्ज वाली सर्विस बन जाएगी?

Advertisement

यहां एक बात समझना जरूरी है. बैंकिंग में लगने वाले हर चार्ज को UPI का चार्ज नहीं कहा जा सकता. ATM, कैश निकासी, चेक, SMS अलर्ट, NEFT-RTGS जैसे कई अलग-अलग बैंकिंग कामों पर बैंकों की अपनी फीस होती है. ये फीस बैंक, अकाउंट और सर्विस के हिसाब से अलग भी हो सकती है. तो पहले नजर डालते हैं उन 10 तरह के बैंकिंग चार्ज पर, जिनका सामना ग्राहक अलग-अलग बैंकिंग सेवाओं के दौरान कर सकते हैं. इसके बाद समझेंगे कि नए UPI MDR में क्या बदला है.

1. ATM की सालाना फीस

बैंक का ATM या डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने पर सालाना फीस लग सकती है. कई मामलों में यह करीब 150 से 300 रुपये तक होती है. इसके ऊपर 18 प्रतिशत GST भी लग सकता है. यानी कार्ड आपके पास है, इस्तेमाल करें या न करें, कुछ अकाउंट में उसके लिए सालाना शुल्क देना पड़ सकता है.

Advertisement

2. दूसरे बैंक के ATM से ज्यादा निकासी

RBI के नियमों के मुताबिक, अपने बैंक के ATM से हर महीने 5 फ्री ट्रांजैक्शन मिलते हैं. दूसरे बैंक के ATM का इस्तेमाल करने पर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में 3, जबकि छोटे शहरों में 5 फ्री ट्रांजैक्शन की छूट रहती है. यह तय लिमिट खत्म होते ही हर अतिरिक्त लेन-देन पर करीब 21 से 23 रुपये प्लस GST तक चार्ज कटता है, जिसमें कैश निकालने के साथ-साथ बैलेंस चेक करना भी शामिल होता है. यानी महीने में तय फ्री लिमिट खत्म होने के बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.

3. ATM लिमिट से ज्यादा रकम निकालने की कोशिश

ATM से एक दिन में कितनी रकम निकाली जा सकती है, इसकी भी सीमा होती है. अगर ग्राहक तय सीमा से ज्यादा रकम निकालने की कोशिश करता है, तो कुछ मामलों में 20 से 25 रुपये तक का चार्ज लग सकता है. इसलिए सिर्फ पैसे निकालने पर ही नहीं, कुछ खास तरह के ATM ट्रांजैक्शन पर भी शुल्क का नियम हो सकता है.

4. बैंक ब्रांच से ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन

अगर आप बैंक की ब्रांच में जाकर बार-बार कैश जमा या निकालते हैं, तो तय संख्या से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर शुल्क लग सकता है. कुछ मामलों में चार से ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन पर 150 रुपये तक चार्ज लिया जा सकता है. हालांकि यह नियम बैंक और खाते के प्रकार के हिसाब से बदल सकता है.

Advertisement

5. खाते में तय बैलेंस न रखना

कई सेविंग अकाउंट में बैंक एक न्यूनतम बैलेंस रखने की शर्त रखता है. अगर ग्राहक इस सीमा से नीचे चला जाता है, तो बैंक शुल्क ले सकता है. HDFC, ICICI और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख प्राइवेट बैंकों में यह चार्ज करीब 100 से 600 रुपये तक हो सकता है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने बचत खातों में यह शर्त पूरी तरह खत्म कर दी है. इसके अलावा किसी भी बैंक के जीरो-बैलेंस या जन-धन अकाउंट में ऐसी शर्त लागू नहीं होती. इसलिए खाता खोलते समय उसके नियम और शर्तें अच्छी तरह देख लेना जरूरी है.

6. चेक बाउंस होने पर शुल्क

चेक जारी किया, लेकिन खाते में पर्याप्त पैसा नहीं था तो चेक बाउंस हो सकता है. ऐसी स्थिति में बैंक ग्राहक से चार्ज ले सकता है. यह शुल्क करीब 250 से 500 रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा अगर चेक किसी दूसरे बैंक का है, तो वहां भी अलग नियम हो सकते हैं.

7. SMS अलर्ट का चार्ज

बैंक आपके मोबाइल पर लेनदेन से जुड़े SMS भेजता है. कुछ बैंक इस सुविधा के लिए तिमाही शुल्क लेते हैं. यह रकम करीब 15 से 20 रुपये प्रति तिमाही हो सकती है. यानी साल भर में छोटी रकम जुड़कर अलग खर्च बन जाती है.

Advertisement

8. ज्यादा पन्नों वाली चेकबुक

चेकबुक के पन्ने भी हर स्थिति में मुफ्त नहीं होते. तय संख्या से ज्यादा पन्ने लेने पर बैंक प्रति पन्ना शुल्क ले सकता है. कुछ मामलों में 25 पन्नों से ज्यादा की चेकबुक पर 2 से 5 रुपये प्रति पन्ना तक चार्ज लिया जा सकता है.

9. NEFT, RTGS और IMPS पर शुल्क

बैंक से पैसे ट्रांसफर करने के अलग-अलग तरीके हैं. NEFT, RTGS और IMPS में कुछ तरह के ट्रांजैक्शन पर शुल्क लग सकता है. यह रकम करीब 2 से 25 रुपये तक हो सकती है. कौन-सा चार्ज लगेगा, यह ट्रांजैक्शन के तरीके, रकम, समय और बैंक के नियम पर निर्भर करता है.

10. बैंक खाता बंद कराने का शुल्क

खाता खोलना कई बार आसान होता है, लेकिन उसे बंद कराने पर भी कुछ बैंक शुल्क लेते हैं. खाता बंद करने का चार्ज करीब 200 से 500 रुपये तक हो सकता है. यह भी बैंक और अकाउंट की शर्तों पर निर्भर करता है.

अब समझिए UPI का नया MDR क्या है?

इन बैंकिंग चार्ज को UPI के नए नियम से अलग समझना जरूरी है. UPI पर जनवरी 2020 से MDR यानी Merchant Discount Rate नहीं था. अब 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के P2M यानी व्यक्ति से दुकानदार/मर्चेंट को किए गए UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा. इसकी अधिकतम सीमा एक ट्रांजैक्शन पर 300 रुपये रखी गई है.

Advertisement

लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि यह सीधे ग्राहक से लिया जाने वाला UPI चार्ज नहीं है. MDR मर्चेंट से लिया जाएगा. सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि दुकानदार यह लागत ग्राहक से न वसूलें. P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे पर MDR नहीं लगेगा. कुछ खास सेवाओं में ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत की जगह 5 रुपये का फ्लैट MDR रखा गया है. वहीं छोटे दुकानदारों के लिए भी छूट का प्रावधान है.

यानी अभी यह कहना सही नहीं होगा कि UPI करने पर आम आदमी से सीधे चार्ज लिया जाएगा. असली बदलाव मर्चेंट पेमेंट के स्तर पर हुआ है. हां, आगे दुकानदार इस लागत को अपने दाम में शामिल करते हैं या नहीं, इस पर नजर रहेगी.

कुल मिलाकर तस्वीर थोड़ी अलग है. बैंकिंग में अलग-अलग सेवाओं पर कई तरह के चार्ज पहले से मौजूद हैं. UPI का नया MDR उसी तरह का सीधे ग्राहक से लिया जाने वाला सामान्य चार्ज नहीं है. इसलिए बैंक के ATM या चेक के शुल्क को UPI चार्ज बताना सही तस्वीर नहीं देगा. आम आदमी के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि दोस्त को पैसे भेजने वाला UPI पेमेंट फ्री रहेगा. ₹2,000 तक के P2M पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा. नए MDR का दायरा मुख्य रूप से ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट तक सीमित है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »