‘नेपाल के पानी हमरा राजा के खा गईल...’, 7 दिन बाद भी नहीं मिला शव, पिता ने बेटे के पुतले को दी मुखाग्नि

नेपाल के त्रिशूली में 216 मेगावाट प्रोजेक्ट की सुरंग में काम कर रहे रक्सौल के राहुल कुमार सिंह 26 अगस्त को अचानक पानी और मलबा आने से लापता हो गए. सात दिन की तलाश के बाद भी शव नहीं मिला. पिता धर्म सिंह ने कुश से बने प्रतीकात्मक शरीर का अंतिम संस्कार किया. राहुल की पत्नी का दर्द भी परिवार की पीड़ा बयां कर रहा है.

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सात दिन बाद भी नहीं मिला राहुल का शव. (Photo: Screengrab) सात दिन बाद भी नहीं मिला राहुल का शव. (Photo: Screengrab)

गणेश शंकर

  • रक्सौल,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:48 PM IST

यह सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं है. यह उस परिवार का दर्द है, जिसने अपने बेटे को आखिरी बार देखे बिना ही उसे अंतिम विदाई दे दी. रक्सौल के पंटोका पंचायत के भरतम्ही वार्ड संख्या-3 निवासी धर्म सिंह के बेटे राहुल कुमार सिंह नेपाल में काम करते थे. नेपाल के त्रिशूली में एंडीज कंपनी के अंतर्गत चल रहे 216 मेगावाट प्रोजेक्ट की सुरंग में राहुल काम कर रहे थे. 26 अगस्त 2026 का दिन राहुल के परिवार के लिए जिंदगी का सबसे मुश्किल दिन बन गया. राहुल सुरंग के अंदर काम कर रहे थे. इसी दौरान अचानक सुरंग में पानी घुस आया. पानी का बहाव इतना तेज था कि उसके साथ मलबा भी अंदर पहुंच गया. इसी मलबे में राहुल सुरंग के अंदर दब गए.

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हादसे के बाद राहुल की तलाश शुरू हुई. रेस्क्यू टीम ने उन्हें खोजने के लिए काफी कोशिश की. परिवार को उम्मीद थी कि किसी तरह राहुल सुरक्षित मिल जाएंगे. हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी रही. लेकिन सात दिन बीत गए. राहुल का कोई पता नहीं चला और उनका शव भी बरामद नहीं हो सका. राहुल के चाचा विशम्बर सिंह ने हादसे की आपबीती बताई. उन्होंने बताया कि परिवार लगातार इस उम्मीद में था कि राहुल वापस लौटेंगे. लेकिन वक्त गुजरता गया और उनके मिलने की उम्मीद भी धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई.

परिवार करता रहा वापसी का इंतजार

राहुल की शादी महज दो साल पहले हुई थी. अभी तक उनके घर में कोई संतान भी नहीं थी. जिस पत्नी ने दो साल पहले उनके साथ जिंदगी बिताने का सपना देखा था, वही अब पति की तस्वीर और उनकी यादों के सहारे रह गई है. राहुल के वापस लौटने की राह देख रही पत्नी की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. पति की मौत की खबर और शव नहीं मिलने का दर्द उनकी जुबान पर भी दिखाई दिया. पत्नी बिलखते हुए कहती रही, 'नेपाल के पानी हमरा राजा के खा गईल...' उनके ये शब्द परिवार के दर्द को बयां कर रहे थे.

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सात दिन तक राहुल का शव नहीं मिलने के बाद परिवार के सामने एक बेहद मुश्किल फैसला था. राहुल का अंतिम संस्कार कैसे किया जाए. हिंदू मान्यता के अनुसार, जब किसी व्यक्ति का शव नहीं मिलता है तो कुश से प्रतीकात्मक शरीर बनाकर अंतिम संस्कार किया जाता है. इसके बाद राहुल के पिता धर्म सिंह ने अपने बेटे के लिए कुश से बनाए गए प्रतीकात्मक शरीर का अंतिम संस्कार किया. जिस पिता को अपने बेटे को आखिरी बार देखना था, उसके कंधे पर हाथ रखकर विदा करना था, उसी पिता को बेटे का चेहरा देखे बिना उसके प्रतीकात्मक शरीर को मुखाग्नि देनी पड़ी.

राहुल की पत्नी के लिए भी यह पल बेहद दर्दनाक रहा. दो साल पहले जिस रिश्ते की शुरुआत हुई थी, वह अब राहुल की तस्वीर और यादों तक सिमट गई है. परिवार के सामने राहुल का शव तक नहीं है, इसलिए अंतिम विदाई भी उनके लिए अधूरी ही रह गई. नेपाल में आई प्रलयकारी बारिश और बाढ़ ने कई परिवारों को गहरे दर्द में डाल दिया है. राहुल का परिवार भी इसी त्रासदी से गुजर रहा है. एक पिता ने अपने बेटे को खो दिया, पत्नी ने अपना पति खो दिया और परिवार को अपने ही सदस्य का आखिरी दर्शन तक नहीं मिल सका.

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नेपाल में अपनों की तलाश में भटक रहे परिजन

नेपाल में रोजगार के लिए बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग जाते हैं. इसी वजह से नेपाल में हुए इस हादसे का असर बिहार के कई परिवारों तक पहुंचा है. पूर्वी चंपारण जिले में भी 15 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना परिजनों की ओर से दी गई है. कई लोग अब भी अपने परिजनों की तलाश में नेपाल में भटक रहे हैं.

राहुल के परिवार के लिए सात दिनों का इंतजार अब उस अंतिम विदाई में बदल गया, जिसमें बेटा सामने नहीं था. पिता ने कुश के प्रतीकात्मक शरीर को मुखाग्नि दी और पत्नी अपने पति की तस्वीर से लिपटकर रोती रही. नेपाल की बाढ़ अपने पीछे सिर्फ तबाही नहीं छोड़ गई, बल्कि कई परिवारों के लिए ऐसा दर्द छोड़ गई, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है.
 

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