12 साल का बच्चा तालाब में डूब रहा था... दूध बेचने वाले युवक की बहादुरी से बच गई जान

आज की दुनिया में जहां लोग मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगते हैं. वहीं बिहार के बेतिया में एक शख्स ने कुछ ही सेकेंडों में ऐसा फैसला लिया, जिसकी तारीफ हो रही है. तालाब में 12 साल का बच्चा डूब रहा था. आसपास चीख-पुकार मची थी. तभी दूध बेचने वाला एक युवक दौड़ा और पानी में छलांग लगा दी. कुछ मिनट बाद वह बच्चे को निकालकर बाहर आया और तुरंत अपनी बाइक से उसे अस्पताल ले गया.

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तालाब से निकालकर युवक बाइक से बच्चे को लेकर पहुंचा अस्पताल. (Photo: Screengrab) तालाब से निकालकर युवक बाइक से बच्चे को लेकर पहुंचा अस्पताल. (Photo: Screengrab)

अभिषेक पाण्डेय

  • बेतिया,
  • 02 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:31 AM IST

'अगर दो मिनट और देर हो जाती, तो बच्चे की जिंदगी खतरे में थी...' बिहार में बेतिया के एक छोटे से तालाब के किनारे खड़े लोग आज यही बात कर रहे हैं. वजह है एक ऐसा शख्स, जो उस दिन दूध बेचने निकला था. लेकिन घर लौटते-लौटते वह पूरे इलाके का हीरो बन चुका था.

मामला बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया नगर पंचायत का है. शनिवार का दिन था. राम-जानकी मंदिर के पास बने तालाब में कुछ बच्चे नहा रहे थे. उन्हीं में 12 साल का हृदया कुमार भी था. खेलते-खेलते वह तालाब के उस हिस्से में पहुंच गया, जहां पानी काफी गहरा था.

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कुछ ही सेकेंड में हृदया पानी में डूबने लगा. साथ में नहा रहे बच्चों ने पहले उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो वे घबराकर बाहर भागे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे- बचाओ... बचाओ... इसी शोर ने एक शख्स के कदम रोक दिए.

मंदिर परिसर में मौजूद राजेश यादव ने बच्चों की आवाज सुनी. राजेश पेशे से दूध बेचते हैं. उन्होंने न यह सोचा कि तैर पाएंगे या नहीं, न यह कि अपनी जान पर बन सकती है. राजेश ने बस तालाब की तरफ दौड़ लगाई और अगले ही पल पानी में छलांग लगा दी. तालाब का पानी शांत था, लेकिन उसके अंदर वक्त तेजी से भाग रहा था. राजेश ने काफी मशक्कत के बाद हृदया को तलाशा और उसे पानी से बाहर निकाल लाए. किनारे खड़े लोगों ने राहत की सांस ली.

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इसके बाद राजेश ने किसी एंबुलेंस का इंतजार नहीं किया. उन्होंने बच्चे को अपनी बाइक पर बैठाया और सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लौरिया पहुंच गए. डॉक्टरों ने शुरुआती इलाज के बाद बच्चे की हालत गंभीर देखते हुए उसे जीएमसीएच, बेतिया रेफर कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर राजेश कुछ मिनट और सोचते या भीड़ की तरह सिर्फ तमाशा देखते, तो शायद नतीजा कुछ और होता.

हम अक्सर कहते हैं कि इंसानियत खत्म हो रही है. लेकिन बेतिया की यह घटना उस धारणा पर सवाल खड़े करती है. यहां न कोई कैमरा था, न सोशल मीडिया का लाइव वीडियो. एक इंसान ने दूसरे इंसान की जान बचाने के लिए बिना कुछ सोचे अपनी जान दांव पर लगा दी. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर राजेश यादव कुछ मिनट और देर कर देते तो बच्चे को खतरा हो सकता था. राजेश ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक मासूम की जिंदगी बचा ली. आज पूरे इलाके में लोग राजेश यादव की बहादुरी और इंसानियत की मिसाल दे रहे हैं.

 

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