18 महीने के मासूम के सिर का वजन 10 किलो... AIIMS तक भटके माता-पिता, मदद की गुहार

Sonepur Love Kush Disease News: सोनपुर के सबलपुर में 18 महीने के मासूम के सिर का वजन 10 किलो होने का दावा. पीएमसीएच से एम्स तक भटके माता-पिता. मजदूर पिता ने लगाई सरकार से मदद की गुहार. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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सोनपुर के सबलपुर निवासी सुभाष कुमार के बेटे की बीमारी बनी पहेली.(Photo:ITG) सोनपुर के सबलपुर निवासी सुभाष कुमार के बेटे की बीमारी बनी पहेली.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • सोनपुर ,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:27 PM IST

बिहार के सारण जिले के सोनपुर स्थित सबलपुर दियारा इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और एक गरीब परिवार की बेबसी को बयां करती यह कहानी 18 महीने के मासूम लव-कुश की है. बच्चे के पिता सुभाष कुमार का दावा है कि बीमारी के चलते उनके डेढ़ साल के बेटे के सिर का वजन बढ़कर लगभग 10 किलो हो गया है, लेकिन तमाम बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी अब तक बीमारी की साफ पहचान नहीं हो पाई है.

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पीड़ित पिता सुभाष कुमार के मुताबिक, साल 2025 में जब बच्चे का जन्म हुआ था तब वह बिल्कुल सामान्य था. लेकिन जन्म के महज सात दिन बाद ही अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. परिवार ने पहले स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन राहत न मिलने पर वे उम्मीद लेकर पटना के बड़े अस्पतालों की ओर दौड़े.

परिवार अपने मासूम को लेकर सबसे पहले PMCH यानी पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचा, इसके बाद IGIMS और फिर AIIMS पटना में भी डॉक्टरों को दिखाया. इसके अलावा त्रिपोलिया अस्पताल और कई निजी चिकित्सकों से भी सलाह ली गई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अब तक उन्हें संतोषजनक इलाज या बीमारी का स्पष्ट कारण नहीं मिल सका है.

आर्थिक तंगी और मजदूरी बनी इलाज में सबसे बड़ी बाधा

एक तरफ जहां मासूम लव-कुश हर दिन इस गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके माता-पिता के सामने आर्थिक तंगी सबसे बड़ा पहाड़ बनकर खड़ी है.

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बच्चे के पिता सुभाष कुमार पेशे से एक मजदूर हैं. दियारा इलाके में रहने के कारण बाढ़ और फसल बर्बाद जैसी प्राकृतिक समस्याएं भी उनकी आमदनी को प्रभावित करती हैं. लगातार अस्पतालों के चक्कर काटने, जांच करवाने और दवाइयों का खर्च उठाने में उनकी सारी जमा-पूंजी खत्म हो चुकी है. अब परिवार के पास इलाज के लिए एक भी पैसा नहीं बचा है.

शासन-प्रशासन से मदद की गुहार

बेबस पिता सुभाष कुमार अब बिहार सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं. परिवार चाहता है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान ले, मेडिकल बोर्ड का गठन कर विशेषज्ञ डॉक्टरों से बच्चे की जांच करवाई जाए और आर्थिक सहायता प्रदान कर उसके उचित इलाज की व्यवस्था की जाए.

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