बाढ़ से बचाएगी नदी की गाद! बिहार में मिट्टी से बनेंगी सड़कें, सम्राट सरकार ने गडकरी से किया बड़ा समझौता

बिहार में हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही रोकने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने नई गाद प्रबंधन नीति 2026 लागू की है. इसके तहत नदियों, बैराजों और जलाशयों से गाद निकालकर सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग और तटबंध निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा. इस योजना को लेकर बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के बीच MoU हुआ है.

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बिहार में बाढ़ पर लगाम लगाने की तैयारी.(Photo: AI-generated) बिहार में बाढ़ पर लगाम लगाने की तैयारी.(Photo: AI-generated)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:42 PM IST

बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने नई पहल की है. अब नदियों, बैराजों और जलाशयों से निकलने वाली गाद का इस्तेमाल सड़क निर्माण और तटबंध बनाने में किया जाएगा. इसके लिए बिहार सरकार और केंद्र के बीच नई दिल्ली में महत्वपूर्ण समझौता हुआ है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में MoU पर हस्ताक्षर किए गए.

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इस पहल को बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति 2026 के तहत आगे बढ़ाया जाएगा. इसके जरिए राज्य की नदियों और जलाशयों में जमा गाद को वैज्ञानिक तरीके से बाहर निकालने की योजना है. सरकार का मानना है कि इससे नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ेगी और बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी.

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दरअसल, बिहार में हर साल बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान-माल और फसलों को नुकसान पहुंचता है. खासकर उत्तर बिहार के कई जिले इसकी चपेट में आते हैं. नदियों में लगातार जमा हो रही गाद भी इस समस्या की प्रमुख वजहों में शामिल है. ऐसे में सरकार ने गाद को समस्या के बजाय निर्माण कार्यों के लिए उपयोगी संसाधन बनाने की रणनीति तैयार की है.

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नदियों से निकली गाद से बनेंगी सड़कें और तटबंध

नई नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नदियों से निकाली जाने वाली गाद को बेकार नहीं छोड़ा जाएगा. उपयुक्त मिट्टी और गाद का इस्तेमाल सड़क निर्माण, तटबंध बनाने और पुराने तटबंधों की मरम्मत में किया जाएगा. इससे जलस्रोतों की सफाई के साथ बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है.

सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था से निर्माण परियोजनाओं के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध हो सकेगी. इससे निर्माण कार्यों की लागत घटाने और परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिल सकती है. यानी एक तरफ नदियों में जमा गाद हटेगी, तो दूसरी ओर उसी सामग्री का इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जाएगा.

इस योजना को लागू करने के लिए बिहार की नदियों, बैराजों और जलाशयों में वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने की व्यवस्था की जाएगी. इसके तहत ड्रेजिंग के जरिए नदियों की तलहटी में जमा गाद को बाहर निकाला जाएगा. इससे जलस्रोतों की क्षमता में सुधार और बेहतर जल प्रबंधन का रास्ता खुलने की उम्मीद है.

सम्राट चौधरी और नितिन गडकरी की मौजूदगी में MoU

गाद प्रबंधन नीति को जमीन पर उतारने के लिए नई दिल्ली में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच समझौता हुआ है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में MoU पर हस्ताक्षर किए गए. इसके तहत बिहार की नदियों से ड्रेजिंग के माध्यम से निकाली गई उपयुक्त गाद का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में भी किया जा सकेगा.

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इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार की गाद प्रबंधन नीति की सराहना की. समझौते को राज्य में बाढ़ नियंत्रण और बुनियादी ढांचे के विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से किसानों को भी फायदा मिलेगा. नदियों की सफाई और जलस्रोतों की क्षमता में सुधार होने से जल प्रबंधन बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है. वहीं, निर्माण कार्यों में गाद के इस्तेमाल से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा.

उत्तर बिहार को बाढ़ से राहत दिलाने की तैयारी

गौरतलब है कि बिहार में बाढ़ नियंत्रण लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है. हर साल नदियों का जलस्तर बढ़ने से उत्तर बिहार के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित होता है. इससे लोगों के घरों, खेती और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचता है.

ऐसे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार की नई गाद प्रबंधन नीति को बाढ़ के खतरे को कम करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि नदियों से गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता में सुधार किया जाए और निकली हुई सामग्री को सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तटबंध निर्माण जैसे विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जाए.

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