विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर बनेगा, मखाना किसानों को सौगात... सम्राट कैबिनेट मीटिंग में 17 एजेंडों पर मुहर

बिहार कैबिनेट की बैठक में गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने के लिए 2520 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई.

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बिहार के गया में विष्णुपद मंदिर का कॉरिडोर काशी के विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा (Photo ITG) बिहार के गया में विष्णुपद मंदिर का कॉरिडोर काशी के विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा (Photo ITG)

शशि भूषण कुमार

  • पटना,
  • 15 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:21 PM IST

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को कुल 17 एजेंडों पर मुहर लगाई गई. सरकार ने गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने के लिए 2,520 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इसके अलावा मखाना विकास योजना, बाढ़ से बचाव, ग्रामीण रोजगार, ऑयल पाम की खेती और सिविल विमानन विभाग में भर्ती समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए.

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कैबिनेट ने विष्णुपद मंदिर परिक्षेत्र के विकास के लिए 2,520 करोड़ रुपये और सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के निर्माण के लिए 996.05 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है. दोनों परियोजनाओं पर कुल 3,516.05 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

मखाना विकास योजना के लिए 89.80 करोड़

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मखाना विकास योजना के लिए 89.80 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसके तहत मखाना उत्पादन, बेहतर बीज, किसानों के प्रशिक्षण और प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा. साथ ही मखाने की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, निर्यात और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था मजबूत की जाएगी. सरकार का लक्ष्य किसानों, व्यापारियों और FPO की आमदनी बढ़ाना है.

कैबिनेट ने नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम (NMEO-OP) के तहत बिहार में ऑयल पाम की खेती के लिए 2.10 करोड़ रुपये खर्च करने की भी मंजूरी दी.

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बाढ़ से निपटने के लिए 1000 करोड़

बिहार सरकार ने जल संसाधन विभाग को आकस्मिकता निधि से 1,000 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि देने का फैसला किया है. इसका इस्तेमाल बाढ़ से बचाव, बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरी कार्यों, सिंचाई, जल-जीवन-हरियाली अभियान और दूसरी महत्वपूर्ण योजनाओं में किया जाएगा.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि इस साल करीब 15 जिलों के 88 प्रखंडों के 2,642 गांव और 21 शहरों के 126 वार्ड बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. इससे करीब 50 लाख लोग प्रभावित हुए, जबकि 55 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि पर असर पड़ा.

उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्यों में NDRF और SDRF की 21 टीमें लगाई गईं. सरकार ने 1,200 से ज्यादा सामुदायिक रसोई शुरू कीं, जिनके जरिए अब तक करीब 1.28 करोड़ प्लेट भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है.

सभी 38 जिलों में 125 दिन रोजगार का प्रावधान

कैबिनेट ने बिहार के सभी 38 जिलों में 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)' लागू करने से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. इसे 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाएगा. योजना में काम मांगने वाले ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक अकुशल मजदूरी वाला रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है.

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श्रमिकों की शिकायतों के समयबद्ध समाधान और योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था भी बनाई जाएगी.

मेडिकल कॉलेजों में 366 सहायक प्राध्यापक

राज्य के पांच सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में नियमित नियुक्ति होने तक 366 रिक्त सहायक प्राध्यापक पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी. इसका उद्देश्य राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मानकों के अनुरूप मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

इसके अलावा सिविल विमानन विभाग में पायलट, इंजीनियर समेत तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर भर्ती और प्रोन्नति के लिए 'बिहार राज्य विमानन संवर्ग भर्ती नियमावली, 2026' को मंजूरी दी गई.

ईंट भट्ठा मालिकों के लिए OTS

कैबिनेट ने ईंट भट्ठा मालिकों को राहत देते हुए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना को भी मंजूरी दी है. 2024-25 तक खान एवं भूतत्व विभाग का बकाया रखने वाले ईंट भट्ठा कारोबारी ब्याज छोड़कर मूल बकाया राशि जमा कर सकेंगे. योजना तीन महीने तक लागू रहेगी.

इसके अलावा बिहार सूचना आयोग में राज्य सूचना आयुक्त के दो अतिरिक्त पद सृजित करने और 17 नवंबर 2021 से लगातार अनधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित डॉक्टर रवि शंकर प्रसाद को सेवा से हटाने का भी फैसला किया गया है. खनन प्रभावित इलाकों में विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को भी लागू करने की मंजूरी दी गई है.

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