बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी का मजबूत दुर्ग दरकता हुआ नजर आ रहा है. उपचुनाव की मतगणना में दूसरे राउंड के बाद मुकाबला रोचक होता नजर आ रहा है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के विधायकी से इस्तीफा देने बाद उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बड़ा उल्टफेर करते हुए नजर आ रहे.
बांकीपुर विधानसभा सीट पर पांचवें राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए हैं. बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा पिछड़ते जा रहे हैं.
आरजेडी की उम्मीदवार रेखा कुमारीतीसरे स्थान पर हैं. फिलहाल 31 में से 5 राउंड की मतगणना पूरी हुई है और आगे के राउंड के साथ मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है, लेकिन जिस तरह से शुरूआती रुझानों में पीके की बढ़त ने बीजेपी का सिरदर्द बढ़ा रखी है.
बांकीपुर चुनाव में क्या होगा बड़ा उलटफेर
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है.जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर, भाजपा के नीरज सिन्हा और राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता प्रमुख उम्मीदवार हैं. तीनों दावेदारों के बीच कड़ी टक्कर की चर्चा है और अब सबकी नजरें नतीजों पर टिकी हैं. पीके ने बांकीपुर सीट पर डेरा जमा रखा था और यहीं उनका दांव बीजेपी के लिए चिंता का सबब बना है.
बांकीपुर में आरजेडी ने 2025 में चुनाव लड़ चुकीं रेखा गुप्ता को ही उपचुनाव में भी उम्मीदवार बनाया है. वे पिछली बार दूसरे नंबर पर रही थीं. उपचुनाव को रोचक मोड़ तब मिला, जब जन सुराज ने अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को मैदान में उतारने की घोषणा की. भाजपा और राजद के उम्मीदवारों पर शिक्षा और राजनीतिक समझ के मामले में प्रशांत किशोर भारी रहे हैं.
हालांकि, प्रशांत किशोर 2025 में पार्टी को कामयाबी दिलाने में विफल रहे थे. तब और अब में फर्क इतना ही है कि पहले उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था. इस बार वे खुद मैदान में हैं. उनके मैदान में उतरने से बांकीपुर का चुनावी माहौल गरमाया. मुकाबला पहले भाजपा के लिए आसान रहते आया है, लेकिन इस बार प्रशांत के मैदान में रहने से मुकाबला दिलचस्प रहा है.
बांकीपुर में कम मतदान से बदलेगा गेम
बांकीपुर का उपचुनाव इसलिए भी खासा चर्चा में आ गया है कि पहले से ही कम वोटिंग के लिए मशहूर इस सीट पर इस बार भी कम वोटिंग का नया रिकार्ड बना है. 2025 में नितिन नवीन यहां से भाजपा के उम्मीदवार थे. तब 41.10 प्रतिशत वोट पड़े थे. 2026 के उपचुनाव में 34.30 प्रतिशत मतदान हुआ है. पटना की इस शहरी सीट पर मतदाता शुरू से ही उदासीन रहते आए हैं.
यह ट्रेंड पिछले 4 चुनावों से दिखता रहा है. 2010 में यहां 36.82 प्रतिशत वोट पड़े थे. 2015 में स्थिति थोड़ी सुधरी और 40.25 प्रतिशत मतदान हुआ. 2020 में भी मतदान उत्साहजनक नहीं रहा. 35.82 प्रतिशत ही वोट पड़े थे. इस सीट पर कम मतदान (34.30 प्रतिशत) का नया रिकार्ड बना है.
बांकीपुर उपचुनाव का क्या होगा असर
उपचुनाव भले भाजपा के लिए अधिक असरदार साबित न हों, लेकिन इसके नतीजों से कई सियासी संकेत उभरने वाले हैं. चुनाव नतीजे अगर बीजेपी के पक्ष में जाते हैं तो यह साबित हो जाएगा कि कुछ भी नहीं बदला है. इससे सबसे बड़ा संकेत यह निकलेगा कि Zen G को जगाने के लिए बनी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उभार के असर से भाजपा समर्थक अछूते हैं. यह भी कि विपक्ष के तरह-तरह के दुष्प्रचारों का भाजपा के वोटरों पर कोई असर नहीं है.
बांकीपुर उपचुनाव का मामला है तो इससे 3 लोगों की प्रतिष्ठा सीधे जुड़ी हुई है. अब देखना यह है कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की यह सीट यह बच पाती है या नहीं. दूसरे कि सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद हुए पहले चुनाव में जनता उनका साथ देती है या नहीं. ऐसे में आखिरी समय में नीतीश कुमार की अपील से उनकी भी प्रतिष्ठा बांकीपुर सीट से जुड़ गई है. मसलन उपचुनावों में विपक्ष की कामयाबी भाजपा के लिए वेक अप काल साबित हो सकती है.
कुबूल अहमद