बिहार के बेतिया स्थित ऐतिहासिक मीना बाजार में सोमवार को जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया. प्रशासन ने पहले से चिन्हित करीब 85 दुकानों को हटाने की कार्रवाई की. इस दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और बड़ी संख्या में पुलिस बल व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे.
स्टे का दावा, फिर भी चली कार्रवाई
कार्रवाई के बाद दुकानदारों में भारी नाराजगी देखने को मिली. प्रभावित व्यापारियों का आरोप है कि कई दुकानों के मामले में पटना हाईकोर्ट से स्थगन (स्टे) आदेश मिला हुआ था, जबकि कुछ मामलों की अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित है. इसके बावजूद प्रशासन ने बिना इंतजार किए बुलडोजर चलाकर दुकानों को ध्वस्त कर दिया. व्यापारियों ने इसे प्रशासन की मनमानी और तानाशाही करार दिया.
'राज व्यवस्था के समय से मिला था पट्टा'
दुकानदारों का कहना है कि उन्हें ये दुकानें पूर्व राज व्यवस्था के समय पट्टे पर आवंटित की गई थीं और वे वर्षों से नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करते आ रहे हैं. उनका आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर केवल छोटे और गरीब व्यापारियों को निशाना बनाया गया, जबकि सड़क के दूसरी ओर पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, जहां से भी सड़क का विस्तार संभव था.
आत्मदाह की चेतावनी, दस्तावेज दिखाए
कार्रवाई के विरोध में कई व्यापारियों ने आत्मदाह तक की चेतावनी दी. उनका कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह इन दुकानों पर निर्भर थी और दुकान टूटने से परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने मीडिया के सामने कथित तौर पर पटना हाईकोर्ट का स्टे आदेश और दुकानों से जुड़े पट्टा दस्तावेज भी प्रस्तुत किए.
इलाके में तनाव, भारी पुलिस बल तैनात
व्यापारियों का कहना है कि प्रभावित दुकानदारों में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी शामिल हैं. कार्रवाई के बाद मीना बाजार क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी है.
अभिषेक पाण्डेय