कार के क्रैश टेस्ट के बारे में अब तक आपने कई बार सुना होगा, लेकिन ट्रेन का भी क्रैश टेस्ट हो रहा है. पैसेंजर्स की बेहतर सेफ्टी के लिए भारतीय रेलवे के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के साथ मिलकर एक क्रैश टेस्ट किया है.
ये क्रैश टेस्ट एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच का हुआ है. इस कंट्रोल्ड क्रैश टेस्ट को आरडीएसओ ने 24 जून 2026 को लखनऊ में पूरा किया है. ये कंप्यूटर स्टिमुलेशन या लेबोरेटरी कंपोनेंट टेस्ट से अलग फुल स्केल फिजिकल क्रैश टेस्ट था.
इस क्रैश टेस्ट में दो एलएचबी को स्पेशली डिजाइन रैम्प से छोड़ा गया, जो तेजी से आगे बढ़ते हुए एक खड़े बैलास्ट वैगन से जाकर टकरा गए. इस टक्कर के वक्त कोच की स्पीड 43 से 44 किलोमीटर प्रति घंटे की थी. ये क्रैश टेस्ट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड EN 15227 के मुताबिक हुआ है.
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क्रैश टेस्ट ये जानने के लिए किया गया कि कोच स्ट्रक्चर किस तरह से क्रैश एनर्जी को एब्जॉर्ब करते हैं. साथ ही टक्कर के दौरान कोच के स्ट्रक्चर पर क्या असर होता है और ऐसी स्थिति में पैसेंजर के बाहर निकलने के स्पेस पर क्या असर होता है. इसका मकसद रियल वर्ल्ड डेटा इकट्ठा करना था, जिसके आधार पर पैसेंजर सेफ्टी को बेहतर किया जा सके. साथ ही फ्यूचर कोच डेवलमेंट में इसका फायदा मिले.
इस क्रैश टेस्ट को बहुत से सेंसर और हाई-स्पीड कैमरा की नजर में किया गया है. इस सेटअप के जरिए कोच के स्ट्रक्चर को होने वाले नुकसान और टक्कर के वक्त कोच की स्थिति को करीब से जानने में मदद मिलेगी. पूरी प्रक्रिया में जो डेटा इकट्ठा हुआ है, उनका इस्तेमाल भविष्य में कोच निर्माण में किया जा सकेगा.
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मॉडर्न एलएचबी को पुराने आईसीएफ कोच के मुकाबले ज्यादा बेहतर माना जाता है. इसकी बड़ी वजह इनका एंटी क्लाइंबिंग डिजाइन और बेहतर स्ट्रक्चर है. हालांकि, रियल वर्ल्ड टेस्ट में जो आंकड़े मिले हैं, ये इन कोच को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे. वहीं ARAI ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दी है.
एआरएआई को हम कारों से जुड़े टेस्ट के लिए जानते हैं, लेकिन इस बार एआरएआई ने आरडीएसओ के साथ मिलकर ट्रेन कोच का क्रैश टेस्ट किया है. एआरएआई ने इसे साइंटिफिक टेस्टिंग और वैलिडेशन के जरिए बेहतर रेलवे सेफ्टी की ओर महत्वपूर्ण कदम बताया है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क