Puncture shop on Expressway: देश में एक्सप्रेसवे और हाईवे का जाल तेजी से फैल रहा है. जहां इन सड़कों ने सफर को आसान और तेज बनाया है, वहीं इन पर चलने वाले लोगों को कई तरह की समस्याओं से भी दो-चार होना पड़ता है. उनमें एक बड़ी समस्या है, चलती गाड़ी का ब्रेक-डाउन होना. अचानक पंचर या किसी तकनीकी समस्या के चलते कई बार लोगों का सफर थम जाता है. ऐसे में एक्सप्रेस-वे और हाईवे पर किसी तरह की मदद मिलना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
लेकिन अब वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत की तैयारी चल रही है. अब रास्ते में गाड़ी पंचर होने या अचानक खराब पड़ जाने पर मदद के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की कंपनी नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) ने देशभर के वे-साइड अमेनिटीज (WSA) सेंटर्स पर वाहनों की मरम्मत और पंचर रिपेयर (Puncture Repair) फेसिलिटी को शुरू करने के लिए निर्देश जारी किए हैं. इससे यात्रियों को रास्ते में ही समय पर तकनीकी मदद मिल सकेगी.
NHLML ने अपने फील्ड ऑफिसों को निर्देश दिया है कि नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे डेवलप किए जा रहे वे-साइड अमेनिटीज सेंटर्स पर व्हीकल रिपेयरिंग की दुकानें और पंचर रिपेयर फेसिलिटी भी बनाए जाएं. वे-साइड अमेनिटीज यानी WSA आमतौर पर नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे हर 40 से 60 किलोमीटर की दूरी पर बनाए जाते हैं. लगभग चार हेक्टेयर एरिया में फैले इन सेंटर्स पर रेस्टोरेंट, फ्यूल स्टेशन, टॉयलेट, ईवी चार्जिंग स्टेशन, ट्रक ड्राइवरों के लिए सुविधाएं और अन्य जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. अब इनमें रोड साइड गैराज भी मिलेगा.
पिछले कुछ समय से कई वाहन चालकों ने शिकायत की थी कि एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पर गाड़ी पंचर होने या खराब होने पर उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. कई बार मदद मिलने में भी देरी होती है. ख़ासकर ये परेशानी और बढ़ जाती है जब मामला रात का हो. औमतौर पर एक्सप्रेसवे और हाईवे का ज्यादातर हिस्सा सुनसान इलाकों से गुजरता है, ऐसे में किसी तरह की तुरंत मदद न मिल पाना एक बड़ी समस्या है.
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 तक देशभर के प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे पर 700 से अधिक वे-साइड अमेनिटीज शुरू करने का टार्गेट तय किया था. जिनमें से तकरीबन 134 अमेनिटीज सेंटर शुरू हो चुके हैं, जबकि 511 प्रोजेक्ट्स को आवंटित किया जा चुका है. इसके अलावा 56 नए WSA की बोली लगना बाकी हैं. उम्मीद है कि, आने वाले समय में जल्द ही इन सेंटर्स को भी शुरू कर दिया जाएगा. इन WSA को लीज बेस्ड पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत डेवलप किया जा रहा है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क