E20 पेट्रोल पर छिड़ी बहस अब सिर्फ गाड़ियों के इंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे सरकार की नीति और नीयत पर सवाल खड़े होने लगे हैं. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने E20 को लेकर केंद्र सरकार पर ऐसा निशाना साधा है, जिसने पूरे विवाद को फिर गरमा दिया है. उनका सवाल सीधा है. अगर सरकार E20 को सुरक्षित बता रही है तो सरकार के ही मुख्य आर्थिक सलाहकार की कथित टिप्पणी पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल की वापसी की बात क्यों कर रही है. अखिलेश का कहना है कि, "आखिर भरोसा किस पर किया जाए, सरकार पर या सलाहकार पर."
अखिलेश यादव ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने वी. अनंत नागेश्वरन की कथित टिप्पणी वाली तस्वीर साझा की. तस्वीर में कहा गया था कि E20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान हो रहा है और पुराने दोपहिया वाहनों के लिए E10 पेट्रोल की बिक्री फिर से शुरू की जानी चाहिए. इसी को लेकर अखिलेश यादव ने सवाल किया कि जब सरकार E20 को लेकर किसी तरह की समस्या नहीं मान रही है, तो सलाहकार इसके असर को लेकर अलग राय क्यों दे रहे हैं.
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अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि, "कौन है सही... सरकार या सलाहकार? E20 से ख़राब हुई गाड़ियों को खींचकर ले जाने वाले बाइक-कारवाले पूछ रहे हैं, एक तरफ़ तो सरकार कह रही है ‘E20 में सब ठीक है’, दूसरी तरफ़ सलाहकार कह रहे हैं ‘E20 गाड़ियों के लिए नुकसानदेह है’, तो ये स्पष्ट कौन करेगा सही क्या है."
E20 को बताया 'दोधारी तलवार'
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने E20 को 'डबल एज्ड स्वॉर्ड' यानी दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि इसका बोझ आम लोगों पर दो तरह से पड़ रहा है. उनके मुताबिक एक तरफ लोगों को महंगा पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वाहन के मेंटनेंस का खर्च बढ़ने की चिंता भी बनी हुई है. अखिलेश ने आगे लिखा कि, "बात-बात में सर्वे कराने वाली भाजपा सरकार, E20 के परिणाम भुगत रही आम जनता से सीधे संवाद करके क्यों नहीं पूछ लेती की सच क्या है? E20 दुधारी तलवार है, जिसकी जनता पर दोहरी मार है, महंगा पेट्रोल भी और महंगा मेनटेनेंस भी"
कहां से शुरू हुआ मामला
दरअसल, बीते दिनों सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का एक लेख मीडिया में छपा था. जिसमें उन्होंने करोड़ो पुराने दोपहिया वाहनों को लेकर चिंता जताई थी. नागेश्वरन के अनुसार भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन ऐसे हैं, जो BS4 स्टैंडर्ड से पहले के हैं और इनमें कार्ब्युरेटर का इस्तेमाल होता है. पुराने कार्ब्युरेटर इथेनॉल ब्लेंड में मौजूद एक्स्ट्रा ऑक्सीजन के हिसाब से फ्यूल की मात्रा को अपने आप एडजस्ट नहीं कर सकते. ऐसे में इंजन को जरूरत के मुकाबले कम फ्यूल मिलेगा और इंजन गर्म हो सकता है. उन्होंने सरकार को सलाह दी थी कि, ऐसे पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल को वापस लाना चाहिए.
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E10 की वापसी पर बातचीत
इस बीच ख़बर आई है कि, सरकार, ऑयल कंपनियों और इंडस्ट्री बॉडीज के बीच E10 पेट्रोल को वापस लाए जाने पर मंथन शुरू हो चुका है. मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, सरकार पुराने वाहनों के लिए लो ब्लेंडेड फ्यूल की वापसी के हर पहलुओं पर बातचीत कर रही है. यदि सबकुछ ठीक रहा तो भविष्य में E10 पेट्रोल की वापसी की उम्मीद की जा सकती है. जिसमें 90 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल और 10 प्रतिशत इथेनॉल की ब्लेंडिंग होती है. हालांकि, अभी बातचीत शुरुआती चरण में है.
E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है. जिसको लेकर सड़क से लेकर संसद तक बहस हो रही है. सोशल मीडिया पर E20 से जुड़े कई ऐसे वीडियो और पोस्ट मिल जाएंगे, जिसमें लोग इस फ्यूल के इस्तेमाल के बाद वाहनों के माइलेज घटने और मेंटनेंस बढ़ने की शिकायत कर रहे हैं. सरकार भी संसद में स्वीकार कर चुकी है कि, इस फ्यूल के इस्तेमाल से माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की गिरावट संभव है. इसके अलावा वाहनों के रबर कंपोनेंट भी खराब हो सकते हैं.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क