गाड़ी का माइलेज कम हुआ तो कौन है दोषी? सरकार कहती है, मामला इतना सीधा नहीं है. E20 पर उठ रहे सवालों के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने फिर मोर्चा संभाला है. सरकार का कहना है कि गाड़ी का माइलेज सिर्फ टंकी में डाले गए पेट्रोल से तय नहीं होता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल से लेकर मेंटनेंस तक पूरा हिसाब इसमें जुड़ा है. लेकिन कहानी में ट्विस्ट ये है कि सरकार खुद संसद में मान चुकी है कि पुराने वाहनों के माइलेज में 6% तक गिरावट संभव है. अब सवाल यही है कि अगर E20 पूरी तरह 'जांचा-परखा और तैयार' है, तो माइलेज की बहस बार-बार क्यों हो रही है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि, किसी गाड़ी के माइलेज में गिरावट के लिए केवल E20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. असल माइलेज कई चीजों पर निर्भर करता है, जिसमें ड्राइविंग का तरीका, ट्रैफिक, गाड़ी की मेंटेनेंस, टायर प्रेशर और एसी का इस्तेमाल भी शामिल है. सरकार का कहना है कि E20 को लंबे टेस्ट के बाद वाहनों के लिए सेफ और सिक्योर पाया गया है.
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि माइलेज सिर्फ फ्यूल पर निर्भर नहीं करता. ड्राइविंग स्टाइल, सड़क और ट्रैफिक की स्थिति, वाहन की कंडकिशन, टायर का सही प्रेशर और एसी का इस्तेमाल भी गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी पर असर डालते हैं. मंत्रालय ने कहा कि E20 का कई बार अलग-अलग स्टैंडर्ड पर टेस्ट और वैलिडेशन किया गया है. इन टेस्ट में इंजन की स्ट्रेंथ, ड्राइविंग परफॉर्मेंस, इंजन की स्टार्टिंग, अलग-अलग मटेरियल के साथ फ्यूल की कम्पैटेबिलिटी और जंग से बचाव जैसे पहलूओं को शामिल किया गया था.
सरकार ने E20 को लेकर अपने बयान में कहा कि, यह फ्यूल कई लेवल पर टेस्ट किया जा चुका है. मंत्रालय ने इसे "E20 Tested. Validated. E20 Ready." के तौर पर पेश किया है. सरकार का कहना है कि ये टेस्ट इस बात की तस्दीक करते हैं कि E20 पेट्रोल से वाहन को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे परफॉर्मेंस और बढ़ता है. सरकार के मुताबिक भारत में क्लीनर मोबिलिटी की तरफ बढ़ते हुए यूजर्स को E20 के इस्तेमाल को लेकर सही जानकारी मिलना जरूरी है.
माइलेज को लेकर क्यों उठ रहे सवाल
E20 पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल ब्लेंड किया जाता है. इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल की तुलना में कम होती है, इसलिए लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग से गाड़ी के माइलेज पर असर पड़ सकता है या नहीं. इसके अलावा पुराने वाहनों में फ्यूल लाइन, सील, पंप और दूसरे कंपोनेंट्स पर लंबे समय में ज्यादा इथेनॉल का क्या असर होगा, इसे लेकर भी चिंता जताई गई है.
हालांकि सरकार और वाहन कंपनियों का कहना है कि अभी तक किए गए टेस्ट में E20 की वजह से बड़े स्तर पर इंजन डैमेज की बात सामने नहीं आई है. सरकार का दावा है कि E20 को वाहनों की फ्यूल सिस्टम जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टेस्ट किया गया है.
पहले मान चुकी है सरकार
दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने सरकार ने संसद में E10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ वाहनों में माइलेज कम होने की संभावना को स्वीकार किया था. राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा था कि 2023 से पहले E10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ वाहनों में फ्यूल इकोनॉमी में 3 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी राज्यसभा में लिखित जवाब में माना है कि, E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों के रबर पार्ट्स डैमेज हो सकते हैं.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क