ITMS Delhi: सोचिए, सुबह के करीब 9 बजे हैं. आप अपनी गाड़ी से दफ्तर के लिए निकलने हैं. दिल्ली की सड़क पर गाड़ियों का रेला है. एक तरफ लंबी कतार लगी है, दूसरी तरफ सड़क लगभग खाली पड़ी है. लेकिन सिग्नल को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. वह अपने तय समय पर लाल होता है, फिर हरा होता है और फिर लाल. उधर गाड़ी में बैठा आदमी घड़ी देख रहा है, हॉर्न सुन रहा है और मन ही मन सोच रहा है कि आखिर इस सिग्नल को पता क्यों नहीं कि सड़क पर ट्रैफिक कहां है और कितना है.
अब जरा इसी तस्वीर को बदलकर देखिए. जिस तरफ गाड़ियों की भीड़ ज्यादा है, वहां हरी बत्ती थोड़ी देर ज्यादा जले. जिस सड़क पर ट्रैफिक कम है, वहां लाल बत्ती का इंतजार थोड़ा कम हो जाए. कहीं अचानक जाम लगा तो सिस्टम उसे पहचान ले और आगे लगे बोर्ड पर बता दे कि भाई, इस रास्ते से मत जाइए, आगे जाम की स्थिति है. दिल्ली में अब ट्रैफिक को इसी अंदाज में चलाने की तैयारी है.
1,789.52 करोड़ की मंजूरी
दरअसल, केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति यानी CCEA ने दिल्ली के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी दे दी है. और यही सिस्टम इस पूरी कहानी को बदलने वाला है. कैमरे सड़क को देखेंगे, AI ट्रैफिक को समझेगा और सिग्नल हालात देखकर अपना रंग बदलेंगे. यानी दिल्ली में पहली बार कोशिश यह होगी कि ट्रैफिक सिग्नल सड़क को अपने हिसाब से न चलाएं, बल्कि सड़क पर चल रहे ट्रैफिक के हिसाब से खुद को बदलें.
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इस पूरे प्रोजेक्ट को दिल्ली पुलिस लागू करेगी. इसके तहत राजधानी के 42 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर को शामिल किया गया है. प्रोजेक्ट को तीन चरणों में अगले 24 महीनों के दौरान लागू किया जाएगा. इसके बाद सिस्टम के ऑपरेशन और मेंटनेंस का काम 5 साल तक किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था को ज्यादा स्मार्ट और टेक्नोलॉजी बेस्ड बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. खास बात यह है कि ITMS में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, ऑटोमेटेड चालान और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा.
ट्रैफिक देखकर बदल जाएगा सिग्नल का टाइम
सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर अश्विन वैष्णव ने बताया कि, "ITMS दिल्ली के ट्रैफिक सिस्टम को पूरी तरह बदल कर रख देगा. इस समय में दिल्ली के कई जगह सीसीटीवी कैमरा और AI सिस्टम के जरिए ट्रैफिक को कंट्रोल किया जा रहा है. लेकिन ये फिक्स टाइम पर ही काम करते हैं. लेकिन ये नया ITMS सिस्टम एक दिमाग की तरह सोचेगा और रियल टाइम ट्रैफिक कंडिशन को देखते हुए खुद फैसले लेगा."
उन्होंने बताया कि, "ITMS का उद्देश्य यह है कि, जो दिल्ली के 1,529 ट्रैफिक सिग्नल्स हैं, ये सारे अभी फिक्स टाइमिंग के साथ वर्क करते हैं. यानी अगर किसी सिग्नल को 30-35 सेकंड के लिए सेट किया गया है और एक तरफ से ट्रैफिक ज्यादा है और दूसरी तरफ से ट्रैफिक कम है, तो भी वो सिग्नल अपने पूरे सेट समय तक रेड रहेगा. लेकिन अगर यही सिस्टम एडॉप्टिव हो और इंटेलिजेंट हो जो रियल ट्रैफिक कंडिशन के हिसाब से सिग्नल टाइमिंग को बदल सके तो यह ज्यादा बेनिफिट देगा. ये ITMS सिस्टम इसी तरह काम करेगा.
कैसे काम करेगा यह सिस्टम
ये सिस्टम कैमरों और सेंसर से मिलने वाले रियल-टाइम डेटा के आधार पर यह पता लगाएगा कि किस सड़क पर कितनी गाड़ियां हैं और ट्रैफिक किस दिशा में ज्यादा है. इसके बाद सिग्नल की टाइमिंग को उसी हिसाब से बदला जा सकेगा. इससे एक ही कॉरिडोर पर मौजूद अलग-अलग सिग्नल को भी आपस में जोड़ा जा सकेगा, ताकि वाहनों की आवाजाही ज्यादा आसानी से हो सके और बिना वजह जाम की स्थिति न बने.
तीन फेज में लागू होगा प्रोजेक्ट
दिल्ली में ITMS एक साथ पूरी तरह लागू नहीं किया जाएगा. इसे तीन चरणों में लागू करने की योजना है. पहले चरण में 5 बड़े कॉरिडोर को शामिल किया जाएगा. इनमें रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, राव तुला राम मार्ग, तीन मूर्ति और सी-हेक्सागोन शामिल हैं. इसके बाद दूसरे चरण में 7 और कॉरिडोर को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा. तीसरे चरण में बाकी कॉरिडोर को शामिल किया जाएगा. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पूरे शहर में ITMS के लिए कुल 42 कॉरिडोर बनाने की तैयारी है.
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बताया जा रहा है कि, इस प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत करीब ₹2,100 करोड़ प्रस्तावित की गई थी, जिसमें से करीब ₹1,700 करोड़ की राशि मंजूर की गई है. टेंडर प्रोसेम में करीब 8 महीने लगने का अनुमान है. इसके बाद सिस्टम को लागू करने में लगभग 24 महीने लगेंगे.
VMS बोर्ड बताएंगे आगे का ट्रैफिक
ITMS सिर्फ ट्रैफिक सिग्नल को स्मार्ट बनाने तक सीमित नहीं रहेगा. इसके जरिए सड़क पर होने वाले जाम, डायवर्जन और दूसरी महत्वपूर्ण जानकारी भी वाहन चालकों तक पहुंचाई जाएगी. इसके लिए वेरिएबल मैसेज साइबोर्ड (VMS) का इस्तेमाल किया जाएगा. इन डिजिटल बोर्ड पर रियल-टाइम ट्रैफिक जानकारी दिखाई जाएगी. अगर किसी सड़क पर अचानक जाम लग गया है या किसी रास्ते को डायवर्ट किया गया है, तो वाहन चालकों को इसकी जानकारी पहले ही मिल सकेगी. इससे लोग जरूरत के मुताबिक वैकल्पिक रास्ता चुन सकेंगे.
ITMS में VIP मूवमेंट और ग्रीन कॉरिडोर की जानकारी भी शामिल की जाएगी. अगर किसी खास रास्ते पर ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाता है, तो उसकी जानकारी सिस्टम में दर्ज की जा सकेगी. इसके बाद उस रूट पर आने वाले ट्रैफिक सिग्नल को भी इसकी जानकारी दी जा सकती है. इसका फायदा यह होगा कि जरूरी स्थिति में संबंधित रूट पर ट्रैफिक को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा और रास्ते में आने वाले सिग्नलों को भी उसी हिसाब से कंट्रोल किया जा सकेगा.
पार्किंग की जानकारी भी मिलेगी
दिल्ली में पार्किंग की समस्या भी ट्रैफिक जाम का एक बड़ा कारण है. कई बार किसी अनजान इलाके में पहुंचने वाले ड्राइवर को पता नहीं होता कि नजदीकी पार्किंग कहां है. इसके कारण वह पार्किंग की तलाश में बार-बार सड़क पर चक्कर लगाता है या सड़क किनारे वाहन खड़ा कर देता है. ITMS में पार्किंग से जुड़ी जानकारी भी जोड़ी जाएगी. इससे वाहन चालक अपने आसपास मौजूद पार्किंग फेसिलिटी की जानकारी हासिल कर सकेंगे और पार्किंग की तलाश में सड़क पर बिना वजह चक्कर काटने से बच सकेंगे.
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर नज़र
दिल्ली में पहले से ही कैमरों की मदद से रेड लाइट जंप करने, जेब्रा क्रॉसिंग पार करने और ओवरस्पीडिंग जैसे ट्रैफिक उल्लंघनों पर कार्रवाई की जाती है. ITMS के बाद कैमरा बेस्ड निगरानी का दायरा और बढ़ जाएगा. नए सिस्टम में सीट बेल्ट न लगाने, बाइक पर ट्रिपल राइडिंग और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे उल्लंघनों को भी कैमरों के जरिए पकड़ा जा सकेगा. सिस्टम ऐसे वाहनों की पहचान करने में भी मदद करेगा जिन पर बड़ी संख्या में चालान लंबित हैं या जो किसी हिट एंड रन मामले अथवा पुलिस की तलाश से जुड़े हुए हैं.
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अगर कैमरा नेटवर्क ऐसे किसी वाहन को पहचानता है, तो सिस्टम अलर्ट जारी कर सकता है. यह अलर्ट ट्रैफिक इंस्पेक्टर तक भी पहुंचाया जा सकेगा. इससे पुलिस को संदिग्ध या वांछित वाहन की पहचान करने में मदद मिलेगी. इसका एक फायदा यह होगा कि कैमरों के नेटवर्क से किसी वाहन की संभावित रूट का पता लगाया जा सकेगा. अगर कोई वाहन दिल्ली के अलग-अलग कैमरा पॉइंट पर दिखाई देता है, तो इन रिकॉर्ड्स को जोड़कर उसके संभावित रूट का पता लगाया जा सकता है. ये सिस्टम अपराधिक मामलों में पुलिस के लिए भी मददगार साबित होगा.
एक सिस्टम में दिखेगी दिल्ली की पूरी ट्रैफिक तस्वीर
ITMS का सबसे बड़ा टार्गेट ऐसा सिस्टम तैयार करना है जिसमें ट्रैफिक अधिकारियों को दिल्ली की सड़कों पर रियल-टाइम में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी एक जगह मिल सके. वहीं वाहन चालकों को भी ट्रैफिक, जाम, डायवर्जन, सड़क की स्थिति और पार्किंग जैसी जरूरी जानकारी समय पर मिलती रहेगी. दिल्ली में इस तरह के इंटिग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की चर्चा एक दशक से भी ज्यादा समय से होती रही है. अब 1,789.52 करोड़ रुपये की मंजूरी के बाद यह योजना जमीन पर उतरने की दिशा में बढ़ रही है.
अश्विन सत्यदेव