इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर कम ब्याज के साथ जारी किए गए रिकवरी सर्टिफिकेट को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने 2 दिसंबर 2021 के बाद ऐसे रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने वाले सभी पूर्व गन्ना आयुक्तों का ब्योरा तलब किया है.
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह की ओर से वर्ष 2006 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया.
15% की जगह 12% ब्याज पर जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कानून के तहत गन्ना बकाये पर 15 फीसदी ब्याज देय है, लेकिन 12 फीसदी ब्याज के आधार पर रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए गए. प्रथम दृष्टया यह 23 दिसंबर 2021 के हाई कोर्ट के फैसले की अवमानना प्रतीत होती है.
पीठ ने गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया कि 2 दिसंबर 2021 के बाद पद पर रहे सभी गन्ना आयुक्तों के नाम अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश शुगरकेन (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड परचेज) एक्ट, 1953 के तहत ऐसे रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए.
मिलीभगत की भी होगी जांच
अदालत ने कहा कि वह यह भी जांच करेगी कि कम ब्याज दर पर रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करना महज प्रशासनिक चूक थी या फिर इसमें किसी तरह की मिलीभगत थी. पीठ ने संकेत दिया कि यदि इस कदम से चीनी मिलों को आर्थिक लाभ पहुंचाने और किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है, तो इसकी भी पड़ताल की जाएगी.
15% ब्याज के साथ वसूली का निर्देश
सुनवाई के दौरान गन्ना आयुक्त ने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में कम ब्याज दर के साथ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी हुए थे. उन्होंने अदालत को बताया कि 30 जुलाई के आदेश के तहत इन सर्टिफिकेट में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसके बाद हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि गन्ना बकाये की वसूली कानून के अनुसार 15 फीसदी ब्याज के साथ की जाए. अदालत ने अगली सुनवाई तक यह जानकारी भी मांगी है कि अब तक कितनी वसूली हुई, किसानों को कितना अतिरिक्त भुगतान मिलना है और रिकवरी सर्टिफिकेट में क्या-क्या संशोधन किए गए हैं.
तीन साल का पूरा रिकॉर्ड मांगा
हाई कोर्ट ने गन्ना आयुक्त को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए पिछले तीन वर्षों का विस्तृत ब्योरा मांगा है. इसमें किसानों को देय गन्ना बकाया, 14 दिन की वैधानिक अवधि के भीतर किए गए भुगतान, समय सीमा के बाद हुए भुगतान और देरी के कारण देय ब्याज की जानकारी शामिल होगी.
डिजिटल रिकॉर्ड की अदालत ने की सराहना
गन्ना आयुक्त ने अदालत को बताया कि 2023-24 पेराई सत्र से गन्ना बकाये और देरी से भुगतान से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड डिजिटल किया जा चुका है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. इस पर हाई कोर्ट ने संतोष जताते हुए कहा कि डिजिटलाइजेशन से भविष्य में अधिकारी यह नहीं कह सकेंगे कि गन्ना आयुक्त कार्यालय के पास संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.
अगली सुनवाई 31 अगस्त को
अदालत ने उन सभी रिकवरी सर्टिफिकेट का भी विवरण मांगा है, जिनके आधार पर अब तक वसूली नहीं हो सकी है. साथ ही उनसे जुड़ी बकाया राशि की जानकारी भी तलब की गई है. मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी. हाई कोर्ट ने गन्ना आयुक्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसानों के गन्ना बकाये की वसूली कानून में निर्धारित पूरी ब्याज दर के साथ सुनिश्चित की जानी चाहिए.
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