ड्रैगन फ्रूट को पिटाया भी कहा जाता है, ये कैक्टस पर उगने वाला फल है. ड्रैगन फ्रूट की खेती एक उभरता हुआ और फायदेमंद कृषि व्यवसाय है, जो कम पानी, सीमित ज़मीन और एक बार निवेश करने पर लंबे समय तक उपज दे सकता है. यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. इसके फायदों और बढ़ती मांग के कारण यह तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है. अगर इसकी खेती को तकनीकी जानकारी और प्लानिंग के साथ किया जाए तो यह किसानों के लिए काफी फायदेमंद व्यवसाय बन सकता है.
ड्रैगन फ्रूट सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन होते है, ड्रैगन फ्रूट का सेवन इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन को बेहतर बनाने, खून की कमी दूर करने, डायबिटीज में सहायता करने जैसी कई चीजों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. ड्रैगन फ्रूट के सेवन से तो फायदा होता ही है लेकिन ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के भी काफी फायदे हो सकते हैं.
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए जरूरी टिप्स
लंबे समय तक उत्पादन
ड्रैगन फ्रूट की खेती एक अच्छी लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट वाली हो सकती है, क्योंकि इसमें खर्च शुरुआत में पौधों, संरचना और मिट्टी की तैयारी में जाता है. ये एक बार पौधे लगने के बाद 30-35 साल तक फल दे सकते हैं, जिससे बार-बार बुवाई की ज़रूरत नहीं पड़ती है.
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
शुरुआत में ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए लगभग ₹3 लाख प्रति एकड़ निवेश पड़ सकता है, एक बार खेती सेट हो जाने के बाद हर साल लाखों की कमाई संभव होती है.
लोगों को जागरूक करना
लोग जब ड्रैगन फ्रूट के विषय में जानेंगे, उनके फायदों को लेकर जागरूक होंगे तो और अधिक रुचि लेंगे. जब लोग फल या उसकी उपयोगिता के बारे में नहीं जानते, तब बाजार में मांग बनाना मुश्किल होता है. ऐसे में किसान को चाहिए कि वे स्थानीय बाजारों, सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से जानकारी फैलाए.
Soilless खेती की तकनीक का प्रयोग
खेत या खाली ज़मीन की उपलब्धता न होने पर, Soilless (मिट्टी रहित) खेती एक व्यवहारिक और लाभदायक विकल्प बन सकती है. इस तकनीक में मिट्टी की जगह कम्पोस्ट, चावल की भूसी और जैविक पदार्थों का उपयोग किया जाता है, जो हल्के भी होते हैं. प्लास्टिक ड्रम या बैरल में इस मिश्रण के साथ ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए जा सकते हैं और परिणामस्वरूप अच्छी पैदावार मिल सकती है.
अनुकूलित वातावरण तैयार करना
ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों की खेती में वातावरण की भूमिका सबसे अहम होती है. फसल की अच्छी गुणवत्ता और मात्रा में तैयार करने के लिए अनुकूलित वातावरण तैयार करना काफी जरूरी है.
शुरुआती चुनौतियों के लिए तैयार रहना
किसी भी चीज में सफलता पाने के लिए हमें सब्र की जरूरत होती है, उसी प्रकार नए कृषि व्यवसाय की शुरुआत में धैर्य रखना बेहद ज़रूरी होता है. शुरुआती सालों में अक्सर उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिले तो, निराशा होना स्वाभाविक होता है. कई बार संभव है कि शुरुआत में कोई लाभ न हो और स्थिति चुनौतीपूर्ण बन जाए, हमें इसके लिए भी तैयार रहना होगा.