मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लीची की फसल पर भी दिखाई दे रहा है. बागों में पेड़ों पर मंजर (फूल) तो आ गए हैं, लेकिन उनकी संख्या पिछले सालों की तुलना में काफी कम है. इससे लीची किसानों की चिंता बढ़ गई है. दरअसल, यही मंजर आगे चलकर मीठे फल बनते हैं. अगर इस समय कोई समस्या हुई तो पूरी फसल पर बुरा असर पड़ सकता है.
कृषि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सर्दी की शुरुआत में तापमान ज्यादा रहने से कई जगह लीची के पेड़ों पर नए पत्ते जल्दी निकल गए हैं. इससे मंजर बनाने की प्रक्रिया कमजोर हो गई है. अब किसानों को बागानों की अच्छी देखभाल करनी होगी ताकि फसल बच सके और बढ़िया उत्पादन मिल सके.
सिंचाई करते समय बरतें सावधानियां
बिहार लीची उत्पादन के लिए जाना जाता है. पिछले दिनों कई अधिकतर इलाकों में बारिश नहीं हुई, इसलिए मिट्टी सूख रही है. जहां नमी कम है तो वहां हल्की सिंचाई कर सकते हैं. लेकिन ज्यादा पानी बिल्कुल न दें, क्योंकि इससे मंजर खराब हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फल बनने के बाद ही नियमित पानी दें. बारिश होने पर कोशिश करें कि पानी ज्यादा जमा न होने दें, वरना नुकसान होगा.
मंजर पर बीमारी का खतरा
अभी लीची के मंजर पर 'इन्फ्लोरेसेंस ब्लाइट' नाम की बीमारी लगने का डर ज्यादा है. इस रोग के कारण मंजर सूख जाते हैं और फल कम बनते हैं. बचाव के लिए एक्सपर्ट्स की किसानों को सलाह है कि 2 ग्राम रोको दवा को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.
लीची बग से भी बचाव जरूरी
इस समय बागानों में लीची बग (एक तरह का कीट) का प्रकोप भी तेजी से बढ़ता है. इससे फसल को काफी नुकसान होता है. इसके नियंत्रण के लिए अलान्टो कीटनाशक को पानी में मिलाकर स्प्रे करें. साथ ही पेड़ से गिरे कीड़ों को इकट्ठा करके धूप में नष्ट कर दें, ताकि वह फसल को नुकसान न पहुंचा सकें.
मिनी स्प्रिंकलर से होगा फायदा
आने वाले समय में तापमान और बढ़ने की संभावना है. ऐसे में एक्सपर्ट्स ने किसानों को बागानों में मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने की सलाह दी है. इससे पेड़ों के नीचे का तापमान लगभग 4 से 5 डिग्री तक कम किया जा सकता है. इससे फलों के जलने, फटने और गिरने की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है. अच्छी बात यह है कि सरकार इस सिस्टम को लगाने पर करीब 80 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दे रही है, जिससे किसान कम खर्च में अपनी फसल को गर्मी और मौसम के असर से बचा सकते हैं.