राजस्थान के रेगिस्तान में भी किसान खजूर की खेती करते नजर आएंगे. खाड़ी देशों की तर्ज पर राज्य के जैसलमेर जिले में भी अब करीब 400 टन से ज्यादा सालाना खजूर उत्पादन होने लगा है. यहां किसानों को सरकार द्वारा बड़ी संख्या में खजूर के पौधे तैयार करके दिए जा रहे हैं.
खजूर उत्पादन के लिए फार्म को मिला 5 साल का ठेका
जैसलमेर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर जोधपुर मार्ग पर भोजका गांव में स्थित एक सगरा-भोजका डेट फार्म पर खजूर की खेती हो रही है. इस फार्म को खजूर उत्पादन के लिए कुल 5 साल का ठेका दिया गया है. यहां बड़ी संख्या में सैलानी भी आते हैं. फार्म में सैलानियों के ठहरने और मनोरंजन के लिए कई सुविधाएं मुहैया कराई गई है.
जैसलमेर में 400 टन से ज्यादा खजूर उत्पादन
जैसलमेर में 400 टन से ज्यादा खजूर का उत्पादन होने लगा हैं. हॉर्टिकल्चर व उद्यान विभाग के जैसलमेर में डिप्टी डायरेक्टर प्रताप सिंह कुशवाहा ने बताया कि यहां के सगरा-भोजका में जैसलमेर- जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर 104 हैक्टर में प्रायोगिक टिश्यू कल्चर खजूर फार्म की स्थापना की गई थी. फार्म पर खाड़ी देशों से आयातित खजूर की विभिन्न 9 किस्मों के टिश्यू कल्चर से तैयार किए हुए पौधों का रोपण किया गया था. कुल 97.5 हैक्टर में खजूर के करीब 15900 पौधे लगाये गए हैं. इनमें 900 मेल हैं व 15000 फीमेल पौधे हैं.
पिछले 3 सालों में किसानों ने लगाए इतने पौधे
विगत 3 सालों की बात करें तो, 2020 - 21 में करीब 17 लाख रुपये के 3000 पौधे 2021-22 में 70 लाख रुपये के 4000 पौधे व 2022-23 में करीब 75 लाख रुपये के 5000 से ज्यादा खजूर के पौधे किसानो को न्यूनतम सरकारी दरों पर दिए गए हैं. इस वर्ष भी 2023-24 तक 6000 पौधे तैयार कर किसानों को वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जैसलमेर के कई ग्रामीण अंचलों में बड़े पैमाने पर खजूर की खेती हो रही हैं.
खजूर के पौधों पर 75 प्रतिशत की सब्सिडी
खजूर के एक पौधे की कीमत 1500 रुपए. इसमें राज्य सरकार 75 प्रतिशत करीब 1125 रुपए तक की सब्सिडी देती हैं. सब्सिडी के बाद पौधे की कीमत 375 रुपये है. एक हेक्टेयर में 156 पौधे लग सकते हैं. खजूर के पेड़ को 4 साल तक 60 लीटर, 10 साल तक 100 और फिर 150 लीटर पानी चाहिए. पानी खारा हो तो भी चलेगा. पानी से ज्यादा तापमान जरूरी है, क्योंकि फ्रूट 45 डिग्री में पकता है.
(जैसलमेर से विमल भाटिया की रिपोर्ट)