पिछले तीन-चार दिनों से पुणे में हो रही बेमौसम बारिश और तेज ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है. खासकर जैविक तरीके से तरबूज की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है. जहां किसान 100 टन तरबूज की पैदावार की उम्मीद कर रहे थे, वहां अब सिर्फ 6 से 7 टन ही उत्पादन की संभावना है. सोने जैसी तैयार फसल अब मिट्टी के भाव हो गई है. जिससे किसान निराश और परेशान हैं.
नितीन गायकवाड़ और उनकी पत्नी रूपाली गायकवाड़ पिछले आठ साल से तरबूज की खेती कर रहे हैं. इस साल भी उन्होंने पांच एकड़ जमीन पर पूरी तरह जैविक तरीके से तरबूज उगाए थे. दंपति को इस फसल से 20 से 25 लाख रुपये की अच्छी आमदनी की उम्मीद थी. वे सोच रहे थे कि इस साल कुछ घरेलू सपने पूरे हो जाएंगे लेकिन अचानक हुई भारी बारिश और ओले ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
नितीन गायकवाड़ बताते हैं कि फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी थी. तरबूज बड़े-बड़े और स्वादिष्ट थे लेकिन कुछ ही घंटों की ओलावृष्टि ने सब कुछ खत्म कर दिया है. रूपाली गायकवाड़ भी अपनी पीड़ा छुपा नहीं पा रही हैं. वे कहती हैं कि दिन-रात की मेहनत बेकार हो गई है.
गायकवाड़ परिवार पूरी तरह केमिकल-फ्री खेती करता है. वे दूध, बेसन, गुड़, गोबर और गोमूत्र का उपयोग करके खाद और दवा बनाते हैं. उनकी फसल स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी होती है, इसलिए कई ग्राहक सीधे खेत से तरबूज खरीदने आते थे. इस साल भी अच्छी मांग की उम्मीद थी, लेकिन प्रकृति ने सब कुछ बदल दिया है.
किसानों का कहना है कि इस साल लगभग 100 टन उत्पादन और 18- से 20 लाख रुपये का मुनाफा होने की संभावना थी लेकिन अब सिर्फ 6-7 टन फसल बचने की उम्मीद है. बाकी सब ओलों और पानी में खत्म हो गई है.
खेती की लागत निकालना भी मुश्किल
गायकवाड ने बताया कि उनके खेत में पैदा हुए तरबूज एक महीने तक खराब नहीं होते क्योंकि उस पर किसी केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता. खेती पर होने वाले खर्च के बारे में उन्होंने कहा कि इस बार 5 लाख रुपये खर्च हुए थे और 25 लाख कमाई की उम्मीद थी. लेकिन जिस तरह से ओलावृष्टि और बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया है, उसे देखते हुए 5 लाख रुपये भी आ जाएं तो बड़ी बात होगी.
किसान नितिन चंद्र गायकवाड ने कहा कि नुकसान हो देखते हुए शासन से राहत की उम्मीद करते हैं, जिससे अगली फसल के लिए तैयारी कर सकें. मौजूदा हालत में तरबूज की खेती की लागत निकालना भी मुश्किल लग रहा है.
गायकवाड परिवार ने बताया कि ओलों की मार से तरबूज फट गए हैं, उनमें दरारें आ गई हैं और वे अब बेचने लायक नहीं बचे हैं. बंपर उपज और अच्छी कमाई की उम्मीद में जिस तरबूज की खेती की गई थी, वह पूरी तरह से चौपट हो गई है.