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यूरोप-चीन में दिक्कत...फायदा मिला भारत को, आलू के सहारे बन रहा दुनिया की 'स्नैक बास्केट'

भारत अब प्रोसेस्ड आलू निर्यात में तेजी से उभर रहा है. वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 के बीच निर्यात में 453% की बढ़ोतरी हुई है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भारी मांग के साथ भारत ने यूरोपीय बाजार की चुनौतियों का लाभ उठाया है. गुजरात प्रोसेस्ड आलू उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां खेती का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ा है.

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इंडियन प्रोसेस्ड आलू का दुनिया के बाजार में धमाल (File Photo- Pexels)
इंडियन प्रोसेस्ड आलू का दुनिया के बाजार में धमाल (File Photo- Pexels)

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है, लेकिन अब हमारी पहचान केवल कच्चा आलू उगाने तक सीमित नहीं रही. 'वैल्यू एडिशन' के दम पर भारतीय प्रोसेस्ड आलू जैसे ग्रैन्यूल्स और पैलेट्स ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी धाक जमा ली है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्रोसेस्ड आलू निर्यात वित्तीय वर्ष 2022 में 95.76 करोड़ रूपये था, जो वित्तीय वर्ष 2025 तक बढ़कर ₹531.72 करोड़ के पार पहुंच गया है, वह भी महज तीन वर्षों में 453.1 फीसदी की यह अप्रत्याशिक बढ़ोतरी दर्शाती है कि भारतीय किसान और उद्योग अब दुनिया की 'स्नैक बास्केट' बनने की ओर अग्रसर हैं. बता दें कि चीन लगभग 935 लाख टन और भारत लगभग 600 लाख टन आलू उत्पादन करते हैं. 

एशियाई देशों में भारी मांग और यूरोपीय संकट का लाभ
भारतीय प्रोसेस्ड आलू का सबसे बड़ा जादू दक्षिण-पूर्व एशिया में चल रहा है, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 80 फीसदी  हिस्सा खरीदता है. वित्तीय वर्ष 2025 में मलेशिया ₹185.64 करोड़ की खरीदारी के साथ सबसे बड़ा खरीदार बना, जिसके बाद फिलीपींस, इंडोनेशिया और थाईलैंड का नंबर आता है. वैश्विक परिस्थितियों ने भी भारत के लिए रास्ते खोले हैं. जहां यूरोप का प्रोसेसिंग उद्योग बिजली की बढ़ती कीमतों और खराब मौसम से जूझ रहा है. वहीं, भारत ने अपनी कम लागत और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के दम पर इस खाली जगह को भर दिया है. इसके अलावा, भारत-आसियान व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली टैक्स छूट ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है.

इस साल भी एक्सपोर्ट की रफ्तार तेज
वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरुआती पांच महीनों अप्रैल-अगस्त 2025 में ही भारत ने 253.68 रुपये करोड़ का निर्यात कर लिया है. जो भविष्य में और भी बड़े रिकॉर्ड बनने का संकेत देता है. आलू के चिप्स, रेडी-टू-ईट आलू और स्टार्च जैसे उत्पादों की वैश्विक मांग को देखते हुए यह साफ है कि भारत जल्द ही दुनिया के 'स्नैक बास्केट' के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. यह प्रगति दिखाती है कि भारतीय खेती अब केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि एक बड़ा लाभकारी उद्योग बन रही है.

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गुजरात बना पोटेटो प्रोसेसिंग हब
भारत की इस सफलता के पीछे गुजरात एक 'पावरहाउस' बनकर उभरा है. उत्तर प्रदेश और पंजाब उत्पादन में भले ही आगे हों, लेकिन प्रोसेसिंग और फ्रोजन फूड (फ्रेंच फ्राइज, वेफर्स) के मामले में गुजरात के किसानों का कोई मुकाबला नहीं है. राज्य के बनासकांठा और साबरकांठा जैसे जिलों में प्रोसेस्ड ग्रेड आलू की खेती का रकबा पिछले दो दशकों में 4,000 हेक्टेयर से बढ़कर 37,000 हेक्टेयर हो गया है. आज गुजरात के कुल प्रोसेस्ड आलू का 60% हिस्सा वेफर्स और 40% फ्रेंच फ्राइज बनाने में इस्तेमाल हो रहा है. यह प्रगति साबित करती है कि भारतीय कृषि अब केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक लाभकारी वैश्विक व्यापार बन चुकी है.

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