भारत मौसम विभाग (IMD) ने इस साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान कम बारिश होने का अनुमान जताया है. मौसम विभाग के अनुसार, जून से सितंबर तक होने वाली कुल बारिश लंबे समय के औसत (LPA) की सिर्फ 92 प्रतिशत रहने की संभावना है. यह सामान्य से कम (below normal) है. अल नीनो का असर मुख्य वजह बताया जा रहा है, जो जुलाई के बाद बारिश को और कमजोर कर सकता है.
देश के करीब 60 प्रतिशत किसान मॉनसून पर निर्भर रहते हैं. खरीफ फसलें जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दालें और सब्जियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. कम बारिश से पानी की कमी, सूखा और फसलों की कम पैदावार का खतरा होता है, लेकिन सही तैयारी और उपायों से किसान नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पहले से तैयारी करें और खेती के तरीकों में बदलाव करके फसलों को नुकसान से बचाएं.
कम बारिश का असर क्या होगा?
क्या तैयारी करें किसान?
पानी का सही प्रबंधन करें
मिट्टी को स्वस्थ और मजबूत बनाएं
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पोटाश और कैल्शियम का छिड़काव, सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रो न्यूट्रिएंट्स) का स्प्रे सब्जी फसलों को गर्मी और सूखे से बचाने में मदद करता है. इससे न सिर्फ पौधे स्वस्थ रहते हैं, बल्कि पैदावार और क्वालिटी दोनों में सुधार होता है. जैविक खाद (गोबर, वर्मीकंपोस्ट, हरी खाद) ज्यादा इस्तेमाल करें. स्वस्थ मिट्टी ज्यादा पानी सोखती है और सूखे में फसल को सहारा देती है. मिट्टी की जांच कराएं और उर्वरक संतुलित मात्रा में डालें.
मिश्रित खेती करें
एक ही फसल न बोकर कई फसलों को मिलाकर बोएं. इससे अगर एक फसल प्रभावित हुई तो दूसरी बच सकती है.
खेत की मेड़ पर पेड़ लगाएं. ये मिट्टी बचाते हैं और अतिरिक्त आय देते हैं. इसके अलावा फसल बीमा (PMFBY) करा लें, यह सूखे में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देता है.