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करेले की खेती के लिए बोएं इस वैरायटी के हाइब्रिड बीज, घर बैठे यहां से करें ऑर्डर

किसानों के लिए जायद सीजन में करेले की खेती करना फायदे का सौदा साबित हो सकता है. करेले की नट्टू वैरायटी के 25 ग्राम हाइब्रिड बीज सिर्फ 450 रुपये में मिल रहे हैं, जिन्हें घर बैठे ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं. इस वैरायटी के करेले जल्दी बढ़ते हैं और बाजार में इनकी मांग भी अधिक रहती है.

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जायद सीजन में कर सकते हैं करेले की खेती (फाइल फोटो- ITG)
जायद सीजन में कर सकते हैं करेले की खेती (फाइल फोटो- ITG)

किसानों के लिए जायद सीजन में सब्जियों की खेती करना फायदेमंद होता है. भारत के लगभग सभी राज्यों में करेले की खेती होती है. यूं तो करेले का स्वाद कड़वा होता है लेकिन कई औषधीय गुणों से भरपूर करेले की सब्जी सही ढंग से बनाई जाए तो स्वादिष्ट होती है. गर्मियों के मौसम में बाजार में करेले की अच्छी डिमांड रहती है. करेले की खेती की खासियत है कि इसमें लागत के मुकाबले कमाई अधिक होती है. ऐसे में अगर आप करेले की खेती करना चाहते हैं तो नट्टू वैरायटी के हाइब्रिड बीज की बुवाई करके किस्मत आजमा सकते हैं.  

नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के मुताबिक, करेले की नट्टू वैरायटी के 25 ग्राम हाइब्रिड बीज का पैक अब सिर्फ 450 रुपये में उपलब्ध है. जिसे आप  घर बैठे आसानी से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं. नट्टू वैरायटी के इन हाइब्रिड बीजों से खेती न सिर्फ आसान होगी बल्कि मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है.

नट्टू हाइब्रिड वैरायटी के करेले में क्या खासियत है?
इसकी बेलें मजबूत और लंबी होती हैं. पौधे जल्दी बढ़ते हैं और करेले जल्दी आने शुरू हो जाते हैं. इस वैरायटी के करेले चमकदार हरे होते हैं. बाजार में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है.

कैसे बोएं ये बीज?
सबसे पहले अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी तैयार करें. इसमें गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाएं. बीज बोने का सबसे अच्छा समय फरवरी-मार्च या जून-जुलाई है. 25 ग्राम पैक में काफी सारे बीज आते हैं जो 100-150 पौधों के लिए पर्याप्त होते हैं.

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करेले के बीज बोने का पूरा प्रोसेस  

  • मिट्टी को अच्छे से जोत लें.
  • 2-3 फीट की दूरी पर गड्ढे बनाएं. 
  • एक गड्ढे में 2-3 बीज डालें. 
  • हल्की मिट्टी से ढक दें और नियमित पानी दें.  
  • 7-10 दिनों में अंकुर निकल आएंगे.

पौधे को पूरी धूप और पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. खरपतवार साफ करते रहें और समय-समय पर जैविक खाद डालते रहें. इस वैरायटी में रोग लगने की संभावना कम होती है, इसलिए कम दवाइयों की जरूरत पड़ती है.


 

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