ऑपरेशन सिंदूर में करारी मार झेलने के करीब आठ महीने बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर ड्रोन उकसावे शुरू कर दिए हैं. जनवरी की शुरुआत से जम्मू कश्मीर के कई सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए हैं. इन घटनाओं के बाद भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है, लेकिन इसके बावजूद ड्रोन गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं.
सेना के अनुसार पाकिस्तान द्वारा भेजे जा रहे ड्रोन आत्मघाती या कामिकाजे श्रेणी के नहीं हैं. ये ड्रोन छोटे आकार के हैं और मुख्य रूप से निगरानी के उद्देश्य से इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कामिकाजे ड्रोन ऐसे यूएवी होते हैं जो लक्ष्य की तलाश में मंडराते हैं और फिर विस्फोट के साथ हमला करते हैं. हालिया घटनाओं में देखे गए ड्रोन इस तरह के नहीं थे.
आत्मघाती नहीं, निगरानी वाले छोटे ड्रोन भेज रहा पाकिस्तान
थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आर्मी डे के मौके पर मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल के दिनों में देखे गए ड्रोन बहुत छोटे थे और कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे. उन्होंने कहा कि इन ड्रोन की लाइट्स भी ऑन थीं, जिससे यह साफ है कि ये किसी बड़े हमले के लिए नहीं बल्कि निगरानी के लिए भेजे गए थे.
जनरल द्विवेदी के मुताबिक जनवरी 15 यानी आर्मी डे और 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के आसपास पाकिस्तान को यह आशंका रहती है कि भारत कोई सख्त कदम उठा सकता है. इसी कारण वह ड्रोन के जरिए भारतीय सुरक्षा व्यवस्था को परखने की कोशिश करता है. उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान को इन गतिविधियों को लेकर चेतावनी दे दी गई है और किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा.
जम्मू कश्मीर और राजस्थान में कई सेक्टरों में दिखे ड्रोन
9 जनवरी से अब तक पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के अलग अलग सेक्टरों में करीब 10 से 12 ड्रोन भेजे हैं. गुरुवार रात पूंछ और सांबा के रामगढ़ सेक्टर में ड्रोन देखे गए. इससे पहले नौशेरा और राजौरी सेक्टर में भी ड्रोन गतिविधि सामने आई थी. इन घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों ने एंटी ड्रोन सिस्टम सक्रिय कर दिए और कई जगहों पर फायरिंग भी की गई.
9 जनवरी को सांबा जिले में एक पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा हथियार गिराए जाने की आशंका जताई गई थी. तलाशी के दौरान दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 गोलियां और एक ग्रेनेड बरामद किए गए थे. यह बरामदगी गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा बढ़ाए जाने के दौरान हुई. इसके अलावा राजस्थान के जैसलमेर में भी एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने की सूचना मिली थी.
भारत की सुरक्षा और प्रतिक्रिया समय परखने की कोशिश
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इन ड्रोन के जरिए भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में कमजोरियों की तलाश कर रहा है. दुर्गम इलाके और सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमित निगरानी व्यवस्था के चलते ड्रोन पाकिस्तान के लिए एक अहम साधन बने हुए हैं. इन ड्रोन के माध्यम से वह यह देखना चाहता है कि भारत की कौन सी रडार प्रणाली सक्रिय होती है और किन इलाकों में सेना की गतिविधियां बढ़ती हैं.
भू राजनीतिक विशेषज्ञ सुमित राज ने कहा कि बिना किसी हथियार के भेजे जा रहे ड्रोन भारत की प्रतिक्रिया को समझने के लिए होते हैं. इससे पाकिस्तान को यह जानकारी मिलती है कि किस सेक्टर में भारत की सतर्कता कितनी तेज है और कहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है.
हथियार और आतंकियों की घुसपैठ की आशंका, सेना अलर्ट
सेना प्रमुख ने भी इस बात की पुष्टि की कि ड्रोन घुसपैठ का एक मकसद आतंकियों को भेजने के लिए संभावित रास्तों की तलाश करना हो सकता है. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान को अब तक नकारात्मक जवाब ही मिला है और ऐसी कोई जगह नहीं है जहां से वह आतंकियों को भेज सके.
पूर्व जम्मू कश्मीर पुलिस प्रमुख एस पी वैद का कहना है कि पाकिस्तान तनाव बढ़ाने की कोशिश में जुटा हुआ है. उन्होंने आशंका जताई कि ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ भेजने की कोशिश भी हो सकती है ताकि घाटी में आतंकवाद को फिर से हवा दी जा सके. उन्होंने कहा कि स्थानीय भर्ती लगभग खत्म हो चुकी है, इसलिए पाकिस्तान ऐसे तरीकों का सहारा ले रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर उकसावे के लिए पाक ने भेजे ड्रोन
एसपी वैद ने यह भी कहा कि भारत ने एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात कर रखे हैं और देश को पूरा अधिकार है कि वह उन लॉन्चपैड और ठिकानों पर कार्रवाई करे जहां से ये ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं.
फिलहाल पाकिस्तान भारत की चेतावनियों के बावजूद अपने उकसावे वाले कदमों से पीछे हटता नहीं दिख रहा है. ऐसे में गणतंत्र दिवस से पहले भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं. अब देखना होगा कि इस ड्रोन गतिविधियों के जवाब में नई दिल्ली आगे क्या कदम उठाती है.