चार जुलाई को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से लगभग एक महीने पहले विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि इसे वर्चुअली आयोजित किया जाएगा. पहले कहा जा रहा था कि बैठक में सदस्य देशों के राष्ट्रप्रमुख व्यक्तिगत रूप से भाग लेंगे लेकिन अब अचानक इसमें बदलाव कर दिया गया है.
विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, 'भारत की पहली अध्यक्षता में, एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों का 22वां शिखर सम्मेलन 4 जुलाई 2023 को वर्चुअल तरीके से आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे.'
विज्ञप्ति में कहा गया कि एससीओ के सदस्य देश चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है. तुर्कमेनिस्तान एक स्थायी आमंत्रित सदस्य है, जबकि ईरान, बेलारूस और मंगोलिया के राष्ट्रपतियों को ऑबजर्वर देश के रूप में आमंत्रित किया गया है.
शिखर सम्मेलन को वर्चुअली बुलाने का फैसला क्यों किया गया?
विदेश मंत्रालय की तरफ से ये नहीं बताया गया कि शिखर सम्मेलन को वर्चुअली बुलाने का फैसला क्यों किया गया. हालांकि, जब बैठक वेन्यू से आयोजित करने की योजना बनी थी तब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मध्य एशियाई देशों के नेताओं को दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा गया था. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान और चीन से असहज रिश्तों के कारण यह फैसला किया गया है?
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि उन्हें शिखर सम्मेलन को वर्चुअली आयोजित करने को लेकर विदेश मंत्रालय की घोषणा से ठीक पहले ही सूचित किया गया है. एससीओ के राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर योजना पटेल ने सोमवार को एक अर्जेंट पत्र भेजकर सदस्य देशों और एससीओ महासचिव झांग मिंग से बस इतना कहा कि 'भारत आप सबको बताना चाहता है कि 4 जुलाई को होने वाली एससीओ शिखर सम्मेलन की बैठक वर्चुअल तरीके से आयोजित होगी.'
पिछले साल एससीओ की बैठक उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई थी जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे.
चीन, पाकिस्तान ने बैठक में आने की पुष्टि नहीं की थी
राजनयिक सूत्रों ने द हिंदू को बताया कि शिखर सम्मेलन को वर्चुअली कराने के पीछे एक कारण यह हो सकता है कि चीन और पाकिस्तान सहित कुछ देशों के नेताओं ने बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने को लेकर किसी तरह की पुष्टि नहीं की थी. यूक्रेन में जारी युद्ध को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी बैठक में शामिल होने की संभावना कम दिख रही थी.
अधिकारियों ने कहा कि पीएम मोदी की यात्रा शिड्यूल भी काफी व्यस्त है. वो 19-24 जून के बीच अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं और 14 जुलाई को वो नेशनल डे परेड में हिस्सा लेने के लिए पेरिस में होंगे.
वहीं, जिस जगह शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाना था, वहां आयोजन स्थल का काम भी पूरा नहीं हो पाया है. दिल्ली के प्रगति मैदान में शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाना था लेकिन इसके एक महीने में तैयार होने की संभावना नहीं दिख रही है.
चीन भी हो सकता है एक कारण
बैठक को वर्चुअली आयोजित करने के पीछे चीन भी एक बड़ा कारण हो सकता है. एससीओ को चीन के दबदबे वाला संगठन कहा जाता है. ऐसा माना जा रहा है कि भारत वर्तमान वैश्विक हालात में चीन की अगुवाई वाले देशों के संगठनों को बहुत तवज्जो नहीं देना चाहता है.