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क्या भारत के मित्र थे अयातुल्ला अली खामेनेई? कश्मीर मुद्दे से दिल्ली दंगों तक... दिए PAK से मिलते-जुलते बयान

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने 2017 से 2024 के बीच कश्मीर, अनुच्छेद 370, नागरिकता संशोधन अधिनियम और दिल्ली दंगों जैसे मुद्दों पर कई बार भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी की. हर मौके पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और इन बयानों को भारत की संप्रभुता में दखल बताया.

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमले में मौत हो गई. (Photo: Reuters)
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमले में मौत हो गई. (Photo: Reuters)

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने 2017 में, मुस्लिम वर्ल्ड से कश्मीर के 'दबाए गए मुसलमानों' के समर्थन में एकजुट होने की अपील की. साल 2020 में, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में हुए दंगों के बाद खामेनेई ने फिर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया. उन्होंने हिंदुओं को चरमपंथी बताया था और उनका सामना करने की बात कही. दिल्ली दंगों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई को खामेनेई ने मुसलमानों का नरसंहार बताया.

खामेनेई ने भारत को इस्लामिक दुनिया से अलग-थलग करने की धमकी दी. उन्होंने #IndianMuslimsInDanger हैशटैग भी इस्तेमाल किया. ये कोई पहली या अकेली घटना नहीं थी, 2019 (आर्टिकल 370 हटाने) से 2024 तक अली खामेनेई ने भारत के आंतरिक मामलों पर चार बार टिप्पणी की, हर बार भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरानी राजदूत को तलब करके उनके सुप्रीम लीडर के बयानों की आलोचना की.

2017, कश्मीर: खामेनेई ने मुस्लिम वर्ल्ड से कश्मीर के पीड़ित मुसलमानों के लिए समर्थन जुटाने की अपील की. उनकी यह बात कश्मीर को लेकर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा जैसी थी. उस समय भारत ने कश्मीर को लेकर कोई नई नीति नहीं अपनाई थी. 

अगस्त 2019, कश्मीर: आर्टिकल 370 हटने के बाद अली खामेनेई ने भारत से कश्मीर पर 'न्यायपूर्ण नीति' अपनाने की मांग की. MEA ने ईरानी राजदूत को तलब किया.

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Khamenei

मार्च 2020, दिल्ली दंगे: अली खामेनेई ने ट्वीट किया कि भारत को 'चरमपंथी हिंदुओं' का मुकाबला करना चाहिए. उन्होंने इन दंगों को 'मुसलमानों का नरसंहार' बताया और भारत को इस्लामिक दुनिया से अलग करने की धमकी दी. #IndianMuslimsInDanger हैशटैग इस्तेमाल किया. MEA ने फिर ईरानी राजदूत को तलब किया. यहां ध्यान देने वाली बात है कि दिल्ली दंगों में हिंदुओं पर हमले हुए थे, लेकिन अली खामेनेई ने इसका जिक्र तक नहीं किया. उनकी बातें पाकिस्तानी एजेंसियों के नैरेटिव से मिलती-जुलती थीं.

जनवरी 2020, CAA: ईरान के संसद अध्यक्ष ने नागरिकता संशोधन अधिनियम को 'मुस्लिम-विरोधी भेदभाव' बताया. भारत ने इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया.

सितंबर 2024: अली खामेनेई ने एक ट्वीट में भारत को म्यांमार और गाजा के साथ रखा. इस ट्वीट को 27 लाख लोगों ने देखा. भारत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के सुप्रीम लीडर के इस ट्वीट को गलत जानकारी पर आधारित और अस्वीकार्य बताया था. इस पूरे समय में, जब-जब खामेनेई ने भारत पर टिप्पणी की, भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और स्पष्ट किया कि यह उसके घरेलू मामलों में दखल है.

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अब ईरान पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव में भी शामिल है. सऊदी अरब, UAE जैसे मुस्लिम देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. खाड़ी के ये देश भारत के बहुत करीबी रणनीतिक साझेदार हैं और यहां 90 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन जैसे देशों के नेताओं से बात की, स्थिति पर चिंता जताई और भारतीयों की सुरक्षा के लिए धन्यवाद दिया. भारत ने हमेशा शांति, स्थिरता और तनाव कम करने की बात की है. 

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वैसे, अयातुल्लाह अली खामेनेई को ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न और उनके अधिकारों के खिलाफ माना जाता था. उनकी मौत के बाद दुनिया के अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं. इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के 57 सदस्य देशों में से 10 से भी कम ने खामेनेई की मौत पर सार्वजनिक रूप से शोक व्यक्त किया. अमेरिका, इजरायल, अर्जेंटीना, यूक्रेन जैसे देशों ने इसे सकारात्मक रूप से देखा. रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान, इराक, मलेशिया, तुर्की जैसे इस्लामिक देशों ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की और खामेनेई की मौत पर शोक जताया.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस सैन्य संघर्ष में शामिल सभी देशों से संयम बरतने, संवाद और कूटनीतिक माध्यम से तनाव कम करने की अपील की है. हर देश अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसला लेता है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, 2004-14 के दौरान कांग्रेस-नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में ईरान के खिलाफ तीन बार वोट किया- 2005, 2006 और 2009 में, जब भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर समझौता हो रहा था. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बाद में कहा कि ये वोट जबरदस्ती करवाए गए थे.

2005: यूपीए सरकार के दौरान भारत ने IAEA में ईरान के खिलाफ वोट (रिजॉल्यूशन GOV/2005/77) किया. ईरान ने भारत को 1 लाख करोड़ का LNG डील रद्द करने की धमकी दी. भारत ने गुट निरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) में शामिल देशों के बहुमत से अलग रुख अपनाया.

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2006: यूपीए सरकार के दौरान भारत ने ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए मतदान किया. रूस-चीन झिझक रहे थे, लेकिन भारत इस मामले में अमेरिका के साथ खड़ा रहा.

2009: यूपीए सरकार के दौरान भारत ने तीसरी बार ईरान के खिलाफ वोट (कोम परमाणु संयंत्र और यूरेनियम संवर्धन पर) किया. उसी साल भारत-अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील पूरी हुई.

2022: भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार ने IAEA में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रिजॉल्यूशन पर मतदान से परहेज (अब्स्टेन) किया.

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने 2017 से 2024 के बीच, कश्मीर और अनुच्छेद 370 से लेकर सीएए और दिल्ली दंगों तक- बार-बार भारत के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी की. जिसके जवाब में भारत ने हर बार ईरानी राजदूतों को तलब किया और उनकी टिप्पणियों को अपने घरेलू मामलों में हस्तक्षेप बताकर खारिज कर दिया.

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