अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध दिन-व-दिन भीषण होता जा रहा है. मंगलवार को अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान के परमाणु ठिकानों और राष्ट्रपति कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण जगहों पर भीषण बमबारी की. इस हमले के जवाब में ईरान ने सऊदी अरब, दुबई और कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन्स की बारिश की. युद्ध की इस आग में अब तक 742 ईरानी नागरिकों और 6 अमेरिकी सैनिकों के मारे जा चुके हैं. वहीं, इस युद्ध में दुनिया के कई देशों के शामिल होने की संभावनाएं बढ़ती जा रही है.
ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमलों ने रूस को भड़का दिया है. रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए शुरू की गई ये जंग अब 'तीसरे विश्वयुद्ध' की वजह बन सकती है.
मेदवेदेव का दावा है कि ट्रंप और नेतन्याहू की सनक ने मानवता को विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है. रूस का यह बयान दुनिया भर के शेयर बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचाने के लिए काफी है.
वैश्विक तेल सप्लाई ठप
इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर वैश्विक तेल बाजार पड़ रहा है, जिससे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है. मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई बाधित होने से दुनिया भर में संकट मंडरा रहा है.
भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए साफ किया है कि देश के पास फिलहाल 25 दिनों का तेल रिजर्व मौजूद है. अगले 25 दिनों तक पेट्रोल, डीजल और पीएनजी गैस के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे. केंद्र सरकार वैकल्पिक रूट से क्रूड ऑयल के आयात पर जल्द ही बड़ा फैसला ले सकती है, ताकि सप्लाई चेन प्रभावित न हो. हालांकि, खाड़ी देशों में जारी आगजनी ने भविष्य की चिंताओं को बढ़ा दिया है.
IRGC की खुली चेतावनी
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के चीफ अहमद वाहिदी ने अमेरिका को खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि जंग तब तक नहीं थमेगी जब तक अमेरिका सरेंडर नहीं करता.
वाहिदी के मुताबिक, ईरान के दुश्मनों के लिए नर्क का दरवाजा खुल चुका है. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह उन सभी देशों में अमेरिकी ठिकानों और होटलों को निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ये एक अवैध युद्ध है जिसे अमेरिका ने शुरू किया है.
इस युद्ध में अब तक ईरान में 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 750 से ज्यादा जख्मी हैं तो अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि युद्ध में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, और कई घायल हैं.
वहीं, युद्ध के चार दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान की सैकड़ों मिसाइलों को गिराने का दावा किया है, लेकिन कुवैत में अमेरिका के 3 फाइटर जेट गिरने से हड़कंप मच गया है. अब सवाल उठ रहे हैं कि अगर युद्ध हफ्तों तक चला तो अमेरिका के पास इंटरसेप्टर मिसाइलें कब तक बचेंगी? सऊदी के रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद कंपाउंड में आग लग गई. वहीं यूएई के फुजैराह ऑयल जोन में भी ईरानी हमले के बाद भीषण आग की भी खबरें सामने आई हैं.
'4 से 5 हफ्ते तक खिंच सकता है संघर्ष'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की टाइमलाइन बताते हुए कहा कि ये संघर्ष 4 से 5 हफ्ते तक खिंच सकता है. जबकि नेतन्याहू का दावा है कि ये युद्ध बहुत जल्द खत्म होगा. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने तेवर दिखाते हुए कहा है कि युद्ध हमने शुरू नहीं किया, लेकिन खत्म हम ही करेंगे. हालांकि, हकीकत ये है कि ईरान रुकने का नाम नहीं ले रहा है और लगातार जॉर्डन, बहरीन और कतर में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है.
IAEA का यू-टर्न
IAEA ने पहले ईरान के आरोपों को खारिज किया था, लेकिन अब उसने 'यूटर्न' लेते हुए नतांज परमाणु ठिकाने पर हमले और नुकसान की पुष्टि की है. राहत की बात ये है कि फिलहाल रेडिएशन का खतरा नहीं है. दूसरी ओर, इजरायल ने ईरान के 500 साल पुराने 'गोलिस्तान पैलेस' को भी निशाना बनाया है. यूनेस्को की इस विश्व धरोहर के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं. इजरायली सेना अब लेबनान में भी घुस चुकी है और वहां के 59 इलाकों को खाली करने का अल्टीमेटम दिया है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इजरायल के हमलों से लेबनान में 30 हजार से ज्यादा लोग घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. इजरायल हिजबुल्लाह के ठिकानों को भी निशाना बना रहा है.