अमेरिका ने समुद्री ड्रग तस्करी के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए प्रशांत महासागर और कैरेबियन सागर में बड़ी सैन्य कार्रवाई की है. अमेरिकी सेना की दक्षिणी कमान के अनुसार, सोमवार को तीन संदिग्ध ड्रग-तस्करी नावों पर किए गए हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई. सैन्य अधिकारियों ने दावा किया कि मारे गए सभी लोग ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े थे, जबकि इस कार्रवाई में किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा.
दक्षिणी कमान द्वारा जारी बयान में कहा गया कि खुफिया एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह पुष्टि हुई थी कि ये नाव ड्रग तस्करी के स्थापित समुद्री मार्गों पर सक्रिय थीं. बयान के मुताबिक, पूर्वी प्रशांत महासागर में दो अलग-अलग नावों को निशाना बनाया गया, जिनमें प्रत्येक पर चार-चार लोगों की मौत हुई. वहीं कैरेबियन सागर में तीसरी नाव पर किए गए हमले में तीन लोगों की जान गई.
यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे व्यापक ड्रग विरोधी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने और तेज किया है. अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष से अब तक समुद्र में ड्रग तस्करी से जुड़े संदिग्ध जहाजों और नौकाओं पर 40 से अधिक सैन्य हमले किए जा चुके हैं, जिनमें 130 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है.
इस अभियान का नेतृत्व दक्षिणी कमान के प्रमुख मरीन कॉर्प्स जनरल फ्रांसिस डोनोवन ने किया. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति दिवस के मौके पर ड्रग तस्करों के लिए यह खराब दिन साबित हुआ. उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से उत्तरी अमेरिका की ओर आने वाली कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
बता दें कि अमेरिकी अधिकारियों का लंबे समय से मानना रहा है कि वैनेजुएला और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र ड्रग तस्करी के बड़े गलियारे के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं. हाल के महीनों में अमेरिका और वेनेजुएला के संबंध भी तनावपूर्ण बने हुए हैं, खासकर तब जब अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी पर नार्को-आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए हैं.
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रग तस्करी रोकने के लिए सैन्य शक्ति के इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और मानवीय सवाल भी उठ रहे हैं. इसके बावजूद अमेरिका ने संकेत दिया है कि समुद्री मार्गों से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए ऐसी कार्रवाइयां आगे भी जारी रह सकती हैं.