अमेरिका और रूस के बीच एक जंग लगे पुराने खाली तेल टैंकर को लेकर तनाव बढ़ गया था. रूस ने टैंकर की सुरक्षा के लिए अपनी पनडुब्बी और नौसेना तैनात कर दी थी लेकिन फिर बुधवार को अमेरिका ने आइसलैंड के पास अटलांटिक महासागर में जहाज पर कब्जा कर लिया. रूस ने तेल टैंकर पर कब्जे की कड़ी निंदा की और जहाज पर सवार अपने क्रू की वापसी की मांग की थी. रूस के इस कड़े रुख पर अमेरिका ने तेजी दिखाते हुए उसके दो क्रू मेंबरों को रिहा कर दिया है.
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने पुष्टि की कि रूस के कहने पर अमेरिका ने रूसी क्रू सदस्यों को रिहा किया है.
जखारोवा ने कहा, 'हम इस फैसले का स्वागत करते हैं और अमेरिकी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं.'
रूसी दूत किरिल दिमित्रिएव ने भी टेलीग्राम पर जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने मरीनेरा टैंकर पर सवार 'सभी रूसियों' को रिहा करने का फैसला किया.
Bella 1, जिसे मैरिनेरा के नाम से भी जाना जाता है, अमेरिका की तरफ से प्रतिबंधित जहाज है. अमेरिका ने 2024 में इस जहाज पर बैन लगाया था. उसका कहना है कि यह जहाज उन 'शैडो फ्लीट' टैंकरों का हिस्सा था जो अवैध ईरानी तेल की ढुलाई में लगे थे.
जहाज पिछले महीने तेल लेने के लिए वेनेजुएला की तरफ रवाना हुआ था, तभी अमेरिकी कोस्ट गार्ड इसके पीछे लग गए और इसे जब्त करने की कोशिश करने लगे. तब जहाज पर गुयाना का झंडा लगा था. अमेरिकी कोस्ट गार्ड को देख जहाज अटलांटिक महासागर की ओर मुड़ गया और उन्हें चकमा देने के लिए जहाज के किनारे रूसी झंडा पेंट कर दिया.
इसके बाद जहाज रूसी शिपिंग रजिस्टर में मैरिनेरा नाम से दर्ज दिखाई देने लगा. यूरोप की तरफ बढ़ने पर रूस ने इसकी सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना भेजी. इससे रूस और अमेरिका के बीच भारी तनाव पैदा हो गया.
अमेरिका ने जहाज को जब्त करने के लिए ब्रिटेन की मदद ली और फिर बुधवार को इसे जब्त कर लिया गया. जहाज पर 28 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 3 भारतीय शामिल हैं.