अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे, जहां उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अहम शिखर वार्ता होगी. दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव, ईरान संकट और व्यापारिक विवादों के बीच यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ट्रंप के साथ अमेरिकी उद्योग जगत के कई बड़े नाम भी बीजिंग पहुंचे हैं. उनके प्रतिनिधिमंडल में एलन मस्क और जेनसन हुआंग शामिल हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका इस दौरे के जरिए व्यापारिक समझौतों को आगे बढ़ाने और तकनीक तथा सप्लाई चेन से जुड़े तनाव कम करने की कोशिश करेगा.
बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप का स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने किया. इस दौरान अमेरिका में चीन के राजदूत शिए फेंग, चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू और चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. गुरुवार को ट्रंप के सम्मान में औपचारिक राज्य समारोह आयोजित किया जाएगा.
यह लगभग एक दशक बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन यात्रा है. ट्रंप ऐसे समय चीन पहुंचे हैं जब अमेरिका में आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और ईरान युद्ध के असर को लेकर उनकी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले यह दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है.
ईरान, व्यापार और AI पर फोकस
वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि ईरान संकट को खत्म करने के लिए उन्हें चीन की मदद की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, 'हम ईरान के मामले में किसी मदद पर निर्भर नहीं हैं. हम किसी भी तरह जीतेंगे, चाहे शांतिपूर्ण तरीके से या अन्य तरीके से.'
हालांकि माना जा रहा है कि ईरान संघर्ष, व्यापार विवाद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ताइवान और सेमीकंडक्टर निर्यात नियंत्रण इस बैठक के मुख्य मुद्दे होंगे. ट्रंप चीन से अमेरिकी कंपनियों, खासकर टेक कंपनियों के लिए बाजार खोलने की मांग कर सकते हैं.
एनवीडिया प्रमुख जेनसन हुआंग की यात्रा ने खास ध्यान खींचा है. अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों के कारण एनवीडिया को चीन में अपने एडवांस AI चिप्स बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने अंतिम समय में हुआंग को इस दौरे में शामिल होने के लिए कहा था.
व्यापार और ताइवान पर तनाव बरकरार
बीजिंग में ट्रंप की बैठक से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दक्षिण कोरिया के इंचियोन एयरपोर्ट पर चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ लंबी बातचीत की. दोनों देशों के बीच पिछले साल हुए व्यापार समझौते को बनाए रखने पर जोर दिया गया. अमेरिका चाहता है कि चीन बोइंग विमान, कृषि उत्पाद और ऊर्जा आपूर्ति के आयात को बढ़ाए. वहीं चीन अमेरिकी चिप निर्माण तकनीक और सेमीकंडक्टर निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील चाहता है.
इस बीच चीन ने ताइवान को अमेरिकी हथियार बिक्री का भी विरोध दोहराया है. अमेरिका ताइवान को रक्षा सहायता देने के पक्ष में है, जिसे लेकर दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय से तनाव बना हुआ है.